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केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसकी लगेगी लॉटरी , किसका लुटेगा आशियाना

इसको लेकर अब कयासों के बाजार गर्म है , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के काम काज का लेखा जोखा मंगाकर इसके संकेत दे दिए है की नॉन परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो उनकी जगह पर एनर्जेटिक और अनुभवी चेहरों को जगह मिल सकती है ,
उत्तर प्रदेश उत्तराखंड सहित कई राज्यों में आगामी साल में चुनाव होने जा रहे हैं इन चुनावों को लेकर बीजेपी ने सियासी बिसात बिछाने शुरू कर दी है इसी कड़ी में जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए अब केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है, कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है, तो कुछ पुराने चेहरों की छुट्टी भी हो सकती है, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से भी कई चेहरे ऐसे हैं जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में दावेदारी कर रहे हैं, दो एक दिनों में होने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में किसे मिलेगा मौका हम समझाते हैं.
ज्योतिरादित्य सिंधिया,सर्वानंद सोनेवाल बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का यह पहला विस्तार होगा।इस विस्तार में
ज्योतिरादित्य सिंधिया को शामिल किया जा सकता है। कांग्रेस से उनके मतभेद की वजह से पिछले साल भाजपा को मध्यप्रदेश की सत्ता वापसी में मदद मिली थी। इनके अलावा सर्बानंद सोनोवाल को भी मौका मिल सकता है। उन्होंने असम में भाजपा को जीत दिलाकर हेमंत बिस्वा सरमा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की राह बनाई थी।वरुण गांधी, रामशंकर कठेरिया, अनिल जैन, रीता बहुगुणा जोशी, जफर इस्लाम और अपना दल की अनुप्रिया पटेल देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में आगामी वर्ष में चुनाव होना है इन चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश से वरुण गांधी, रामशंकर कठेरिया, अनिल जैन, रीता बहुगुणा जोशी, जफर इस्लाम और अपना दल की अनुप्रिया पटेल मोदी कैबिनेट में शामिल होने की कतार में हैं अजय भट्ट, अनिल बलूनी। उत्तराखंड में आगामी वर्ष में चुनाव को देखते हुए अजय भट्ट या अनिल बलूनी को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है , कर्नाटक से प्रताप सिन्हा,पश्चिम बंगाल से जगन्नाथ सरकार, शांतनु ठाकुर या निसिथ प्रामाणिक। हरियाणा से बृजेंद्र सिंह, राजस्थान से राहुल कासवान, ओडिशा से अश्विनी वैष्णव, महाराष्ट्र से पूनम महाजन या प्रीतम मुंडे या हिना गावित शामिल हैं।
इस लिस्ट में दिल्ली से परवेश वर्मा या मीनाक्षी लेखी का नाम भी हो सकता है।बताया जा रहा है कि बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी,
महाराष्ट्र के नेता नारायण राणे, भूपेंद्र यादव और एक वरिष्ठ नेता जिनके पास बिहार के साथ गुजरात का भी प्रभार है उन्हें भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इस विस्तार में चिराग पासवान को शामिल किए जाने पर उनके चाचा पशुपति पारस रोड़ा बन सकते हैं। दोनों के बीच टकराव चल रहा है। इसकी वजह से लोक जनशक्ति पार्टी दो फाड़ हो गई है। हाल ही में पार्टी के पांच सांसदों के साथ पशुपति अलग हो गए हैं। पिछले साल चिराग के पिता राम विलास पासवान का निधन हो गया था, इसके बाद अब यह फूट सामने आई।अटकलों के बीच अभी यह साफ नहीं है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की JDU से किसी को केंद्रीयमंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या नहीं। 2019 में नीतीश ने केंद्र में मंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कम से कम दो मंत्रालयों की उम्मीद कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि उनकी पार्टी से लल्लन सिंह, रामनाथ ठाकुर और संतोष कुशवाहा
इस दौड़ में शामिल हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है और कुछ मंत्री ऐसे हैं जिनके विभागों में कटौती हो सकती है। अभी 9 मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं। इनमें प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, नितिन गडकरी, डॉ. हर्षवर्धन, नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

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