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क्या वाकई में आजम के खिलाफ मुलायम ने मोदी से की थी डील, शिवपाल ने कर दिया बड़ा खुलासा !

रिपोर्ट- प्रवीण तिवारी

किसी ने सच ही कहा है कोई तो मजबूरियां रही होंगी कोई यूं ही बेवफा नहीं होता। लेकिन सवाल ये है की आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है की शिवपाल सिंह यादव ने अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। जिसके खिलाफ वो तब भी चुप रहे जब उन्होंने पूरी पार्टी को अपने बेटे अखिलेश यादव को सौंप दी, वो भी तब जब शिवपाल यादव को सरेआम रुसवा करके पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ,शिवपाल तब भी मुलायम के लिए “मुलायम “ही बने रहे जब सार्वजनिक तौर पर अखिलेश यादव ने शिवपाल का अपमान किया ।

लेकिन अब ऐसा क्या हो गया की शिवपाल मुलायम के खिलाफ खड़े हो गए। पहली बार शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह पर वार किया है, पहली बार लक्ष्मण ने राम पर सवाल खड़ा किया है ।
दरअसल बार-बार अखिलेश यादव से अपमानित होने के बाद अब शिवपाल यादव अपने भतीजे अखिलेश यादव को बर्बाद करने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा कोई और नहीं बल्कि खुद उनके बड़े भाई मुलायम सिंह यादव है। उन्हें बखूबी मालूम है कि मुलायम सिंह यादव वह दीवार है जिन्हें भेदे बगैर वे अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का ना तो कुछ बुरा कर सकते हैं ना खुद का भला। यही वजह है कि सियासी मजबूरियों ने शिवपाल यादव को मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बोलने को मजबूर कर दिया। लगातार अटकले लग रही थीं कि शिवपाल यादव बीजेपी का दामन थामेंगे बीजेपी के साथ उनकी नजदीकियां लगातार बढ़ती दिखाई भी दे रही हैं।

 

लेकिन शिवपाल को ये भी मालूम है की बीजेपी में जाकर खुद का भला नहीं कर पाएंगे और बीजेपी भी सच से बखूबी वाकिफ है कि शिवपाल को बीजेपी में लेकर बीजेपी सपा का नुकसान नहीं कर पाएगी। यही वजह है कि अब बीजेपी ने शिवपाल यादव के जरिए आजम खान और जयंत को तोड़ने का प्लान तैयार किया है और अगर वाकई में शिवपाल ऐसा करने में कामियाब हो गए तो मुस्लिमों का बड़ा वोट बैंक सपा से छिटक सकता है और अगर आजम खान ने साथ साथ जयंत भी सपा से टूट गए तो जाट मुस्लिम और यादव सपा से छिटक सकता है यानी समाजवादी और अखिलेश यादव बोन लेश हो जायेंगे। ऐसे में सांप भी मर जायेगा और लाठी भी नही टूटेगी, यानी शिवपाल यादव आजम जयंत के साथ मिलकर एक ऐसा मोर्चा खड़ा कर सकेंगे जो सपा के खिलाफ किसी को भी फायदा पहुंचा सके और उसके लिए उन्हें बीजेपी से जो मदद चाहिए होगी वो आसानी से मिल सकेगी। इसका दूसरा पहलू ये भी है की खुद मुलायम तो हस्तिनापुर से बंधे हैं वे चाहते हुए अखिलेश का विरोध नही कर सकते ऐसे में अगर इस रणनीति में मुलायम की मूक सहमति भी हो तो इससे इंकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है की अब खुद के मुस्तकबिल के लिए शिवपाल मुलायम के भी खिलाफ जाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

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