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चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद क्यों लग जाती है आचार संहिता? देखिए आपके जीवन पर पड़ेगा क्या असर

 अब मंत्री जी हुए बेकार
नेता जी हो जाएं सावधान

चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है. आचार संहिता का अनुपालन पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों, उनके समर्थकों, कार्यकर्ताओं के साथ ही सत्ताधारी दल के प्रतिनिधियों को भी करना होगा. क्या होती है चुनाव आचार संहिता, अब क्या काम किया जा सकता है और क्या काम नहीं? सबसे पहले समझते हैं कि क्या होती है आदर्श आचार संहिता।

क्या होती है आदर्श आचार संहिता
आचार संहिता लगते ही चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांस्फर, प्रमोशन पर रोक लग जाती है. प्रदेश से संबंधित नए विकास कार्यों, योजनाओं की शुरुआत भी अब नहीं हो सकती. हालांकि चुनावी घोषणा से पहले जितने ट्रांस्फर, नए कार्य के फैसले ले लिए जाते हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ता. आचार संहिता इसलिए लगाई जाती है ताकि कोई व्यक्ति धन, बल के आधार पर वोटरों को प्रभावित न कर सके. आदर्श आचार संहिता उस दिन तक लागू रहती है जिस दिन चुनाव के नतीजे आते हैं. अब समझिए किन चीजों पर लगता है प्रतिबंध

किन चीजों पर लग जाता है प्रतिबंध
सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि, उम्मीदवार, उम्मीदवार के चुनाव एजेंट किसी भी सार्वजनिक उपक्रम, सरकारी, अर्धसरकारी विभाग के निरीक्षण गृह, डाक बंगला और अन्य किसी विश्रामगृह का प्रयोग चुनाव प्रचार या चुनाव कार्यालय के लिए नहीं करेंगे. चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल के मंत्री सरकारी दौरों को चुनाव कार्य से नहीं जोड़ेंगे और ना ही सरकारी तंत्र या कर्मचारियों का इस्तेमाल कर सकेंगे. हालांकि, दो स्थितियों में सरकारी मदद की जा सकती है.

दो स्थितियों में की जा सकती है सरकारी मदद
चुनाव अवधि में सरकारी, अर्धसरकारी विभाग, संस्था, सार्वजनिक उपक्रम द्वारा किसी भी नई योजना, परियोजना, कार्य, कार्यक्रम की घोषणा या उसकी शुरुआत नहीं की जाएगी. चालू परियोजना, कार्यों में जो काम चालू हैं और धनराशि जारी की जा चुकी है, वो कार्य यथावत चलते रहेंगे. चालू परियोजना, कार्य में कोई नई वित्तीय स्वीकृति नहीं दी जाएगी. लेकिन, दैवीय आपदा और मानवजनित दुर्घटना में दी जाने वाली मदद राशि पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा.

मंत्रियों की शक्तियां और अधिकार हो जाते हैं सिमित
केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री किसी मतदान केन्द्र पर मतदाता होने के अलावा अन्य किसी हैसियत से प्रवेश नहीं करेंगे. चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव से सम्बंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के ट्रांस्फर, नियुक्ति और प्रमशन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा. विशेष परिस्थिति में ट्रांस्फर, नियुक्त या प्रमोशन राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा.

उम्मीदवारों को रखना होता है इन बातों का ध्यान
उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि ऐसा कोई काम लिखकर, बोलककर या किसी प्रतीक के जरिये नहीं करेंगे जिससे किसी धर्म, सम्प्रदाय, जाति या सामजिक वर्ग और उम्मीदवार, राजनीतिक दल, राजनीतिक कार्यकर्ता की भावना आहत हो या उससे अलग वर्गों, व्यक्तियों के बीच तनाव पैदा हो. पूजा स्थलों जैसे मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वारों का उपयोग चुनाव में प्रचार के लिए या चुनाव सम्बंधी किसी कार्य के लिए नहीं किया जाएगा.
अस्तित्व न्यूज़ के लिए प्रवीण तिवारी की रिपोर्ट

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