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रूस यूक्रेन युद्ध पर बड़ी भविष्यवाणी, रूस या अमेरिका कौन है अगला सुपरपॉवर

विश्व में छिड़े महासंग्राम जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 24 फरवरी 2022 की सुबह यूक्रेनवासियों के लिए खौफ और सदमा देने वाली सुबह से कम नहीं था। रुस का युद्धाभ्यास से अचानक हमलावर हो जाना विश्व को अचम्भित करने वाला था। अब यूक्रेन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और रुस अपना वर्चस्व दिखा रहा है। क्या ये युद्ध तीसरे विश्वयुद्ध की आहट है। इस युद्ध का अंजाम क्या होगा। रुस अपनी रणनीति में सफल होगा या यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की बाजी मार लेंगें। क्या अमेरिका और रुस खुलकर आमने सामने आएंगें। क्या ये शक्तियां आपस में टकराएंगीं। इन्हीं सवालों का जवाब हमारे कंसल्टिंग एडिटर सर्वमङ्गला स्नेहा ने एक खास मुलाकात में विश्वप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य मधुसूदन मिश्र, पं. ज्योतिर्माली से लिया है। प्रस्तुत है इस बातचीत के कुछ अंश-

रिपोर्टर- रुस और यूकेन में संधि हो पाएगी |
ज्योतिर्माली- संधि कोई देश तब करता है जब वह शांति की राह पर चलना चाहता हो। यहां पावर का प्रयोग करके रुस सुपर पावर बनना चाहता है। अमेरिका को उसके सर्वोच्च पद से पदच्युत कर देना चाहता है। वहीं उसके सामने छोटा सा यूक्रेन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। वह पांच उंगुलियों के साथ एकजुट होकर एक मुट्ठी बन जाना चाहता है। वह नाटो के साथ सदस्यता प्राप्त करके बड़ा और रुस को मुंह तोड़ जवाब देना चाहता है। संधि मात्र रणनीति है जेलेंस्की की। संधि की आड़ में अपनी शक्ति का प्रदर्शन दोनों देश कर रहे हैं।
रिपोर्टर- रुस यूक्रेन महायुद्ध कब तक चलेगा |
ज्योतिर्माली- रुस के राष्ट्रपति श्री पुतिन जी कुंडली में 24 नवम्बर 2022 तक का समय उनके देश और वैश्विक दृष्टि से ठीक नहीं रहेगा। उनके मस्तिष्क में जो विस्तारवादिता की रणनीति खलबली मचा रही है वह नवम्बर तक कौंधती रहेगी। कहने का तात्पर्य है कि युद्ध करने की मानसिकता और उनके देश के प्रति उनका देशप्रेम कम नहीं होगा। जिसका भुगतान वैश्विक दृष्टि से कहीं न कहीं सबको भोगना पड़ेगा। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों ने जो पाबंदियां आर्थिक दृष्टिकोण से लगाई हैं उसके फलस्वरुप पुतिन एक बार नरम तो एक बार गरम रवैया अपनाएंगें। जिससे युद्ध लम्बे अंतराल तक चलता रहेगा। अप्रैल 18 2022 के आसपास ग्रह ऐसे संकेत दे रहे हैं कि पुतिन संधि करने पर जोर देते दिखेंगें पर करना नहीं चाहेंगें। ऐसी परिस्थिति में बैठकों का दौर जारी रहेगा उसके बावजूद युद्ध चलता रहेगा। 27 मार्च तक परिस्थितियां बहुत असहज और असामान्य सी होती दिखेंगी। युद्ध रुक रुक कर चलता रहेगा।
रिपोर्टर- भारत का इस युद्ध का क्या असर पड़ेगा |
ज्योतिर्माली- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की रणनीति भारत के भविष्य की दृष्टि से सटीक है। कारण रुस भारत का पुराना मित्र है वहीं चीन पाकिस्तान से अंदरुनी तौर पर साथ देता रहता है जिससे भारत को दोहरे आक्रमण की चिंता सताती रहती है। ऐसे में तटस्थ रहना बहुत सही कदम माना जाएगा। मोदी जी की कुंडली और पुतिन की कुंडली पर ध्यान दें तो हम कह सकते हैं कि मोदी जी अपनी रणनीति से सबके चहेते बन जाते हैं तो पुतिन अपने वैभव, अनुशासन और मातृभूमि से सहज प्रेम उन्हें मोदी के करीब लाता है। पाकिस्तान समय की प्रतीक्षा कर रहा है। 13 मार्च 2022 के दिन दोपहर 12 बजे के बाद ग्रह अपनी चाल बदल रहे हैं जिससे मोदी जी रुस यूक्रेन मामले में एक बार फिर संधि वार्ता के लिए पहल करते नजर आएगें। तबतक बहुत कुछ उजड़ चुका होगा। भारत की एक भूल उसके लिए शूल बन सकती है। इसलिए नेताओं को प्रतिपल सचेत रहना होगा और हर कदम फूंक फूंक कर रखना होगा। भारत के ग्रह 2029 तक अधिक सशक्त हैं। भारत की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत है। आंतरिक कलह के बावजूद भारत हर अग्नि परीक्षा से बाहर निकल जाएगा। पाकिस्तान चीन के साथ साथ रुस को भी अपने पाले में लाने की कोशिश करेगा पर सफल नहीं होगा।
रिपोर्टर- यूक्रेन फिर स्थापित हो पाएगा  |
ज्योतिर्माली- एक शहर जब ध्वस्त होता है तो उसे बरसों लग जाते हैं संभलने में। एक देश उजड़ा है तो वक्त जरुर लगेगा। हां पुतिन की इच्छा सोवियत संघ को स्थापित करने की इच्छा फिलहाल धराशायी हो गई है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश अगर सहायतार्थ सामने आएगें तो संभलने का अंतराल कुछ कम हो जाएगा। पर हां लोगों की सोच से जल्द ही उठ खड़ा होगा यूक्रेन। 2025- 2028 के बीच कुछ हद तक संभल जाएगा।

रिपोर्टर- जेलेंस्की क्या फिर एक बार राष्ट्रपति बन पाएंगें |
ज्योतिर्माली- कानून के जानकार जेलेंस्की अब पहले से कहीं अधिक ताकतवर नेता के रुप में उभरेंगें। 25- 27 प्रतिशत जनता उन्हें नकार सकती है पर 65 प्रतिशत लोगों की नजर में जेलेंस्की एक सशक्त नेता रहेंगें। जिन्होंने अपने देश के स्वाभिमान के लिए रुस जैसे ताकतवर देश के समक्ष घुटने नहीं टेके। वरन् अपने देश को सैन्य बल में तब्दील करने की रणनीति अपना ली और कहीं न कहीं रुस को सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसे स्वाभिमानी देश के स्वाभिमानी राष्ट्रपति को भला कौन नहीं चाहेगा। जेलेंस्की की कुंडली में राहु सर्कस करता है जिससे जेलेंस्की कभी शिखर पर तो कभी धरातल में पहुंच जाते हैं। इस उठा पटक के बीच भी उनके जीवन का ग्राफ उन्नतशील ही माना जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जेलेंस्की का दबदबा बढ़ेगा।
रिपोर्टर- रुस का भविष्य कैसा है
ज्योतिर्माली- मिखाइल गर्वाचैव के समय जब सोवियत संघ खंड खंड हो गया था तब भी हमने लिखा था कि सोवियत संघ खंड खंड हो जाएगा और गौर्वाचैव की करारी हार होगी। रुस पुतिन के राज्य में एक ताकतवर देश के रुप में उभरा। आज उसके जैसी सैन्य शक्ति गिने चुने देशों के पास ही है। यूक्रेन की राह भी आसान नहीं होगी। नाटो इतनी जल्द उसे सदस्यता देना नहीं चाहेगा पर हालात वश देने को मजबूर हो जाएगा। जिससे रुस का सपना सोवियत संघ को पुन: स्थापित करने का सपना ही रह जाएगा। साथ ही रुस और अधिक आक्रामक बनने की तैयारी करेगा।

रिपोर्टर- क्या रुस और अमेरिका में युद्ध संभव है |
ज्योतिर्माली- रुस ऐसी गलती अभी नहीं करेगा। जिसतरह 2014 से यूक्रेन के साथ एक तरह का शीत युद्ध चल रहा था पर जब रुस के सब्र का बांध टूटा तो आक्रमणकारी बन गया। उसी तरह रुस पहले अभी हुई क्षति की क्षतिपूर्ति की ओर ध्यान देगा और चीन के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ रणनीति तैयार करने की पहल गुप्त रीति से करेगा। ऐसा लगेगा सब शांत हो गया। दुनिया अपने धुन में फिर से चलने लगी है। पर पुतिन अपनी इस हार का बदला लेने की फिराक में रहेंगें। एक दो मौके वो ढूंढ भी लेंगें पर पूर्णतया सफल नहीं हो सकेंगें।
रिपोर्टर- क्या हम विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं |
ज्योतिर्माली- अभी नहीं। आप इसे अर्ध विश्व युद्ध कह सकते हैं। पर विश्वयुद्ध नहीं। 27 फरवरी 2022 से युद्ध आक्रमक, प्रबल और भयानक होगा। 18 अप्रैल 2022 तक अवस्था असमान्य ही रहेगी। 4 मई 2023 से 25 जून 2023 तक परिस्थितयां फिर बेकाबू होंगी। हालात फिर बिगड़ेंगें। उस समय जब लोग सोचेंगें कि वतन वापसी की जाय तभी राजनैतिक परिस्थितियां असहज हो जाएंगीं। लोग फिर वतन वापसी का सपना ही देखेंगें। लोग मायूस और टूट से जाएंगें। जेलेंस्की अपने देश के लोगों को यकीन चाहकर भी नहीं दिला पाएंगें कि वे लोग अपने देश लौट आएं। सब कुछ सामान्य लगेगा पर होगा नहीं।

रिपोर्टर- रुस और चीन एकसाथ आकर सामने से युद्ध लड़ सकते हैं |
ज्योतिर्माली- 70 वर्षीय पुतिन को इस समय अपने देश को सुपरपावर घोषित करने की चाह जग चुकी है। विस्तारवादी नीति रुस के दिमाग में घर कर चुकी है। चीन सामने से रुस का साथ न देकर पीछे से सहयोग करने का आश्वासन देगा। चीन की ड्रैगन रणनीति से रुस भी धोखा खा सकता है। क्योंकि चीन अपनी रणनीति में ना तो किसी को सेंध लगाने देगा और ना ही कहीं सेंध लगाने से बाज़ ही आएगा। ऐसे में चीन को अपना दोस्त समझकर बहुत हड़बड़ाहट में पुतिन का कदम उनके लिए ही भविष्य में सिर दर्द बन सकता है। चीन की दुधारी तलवार पर रुस अपनी गर्दन कितने दिन तक टिका पाएगा। उसे समझना होगा कि चीन अविश्वसनीय है।

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