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हाथ पर हाथ धरे रह गए दिग्गज, जिनकी चर्चा नहीं उन्होंने मारी बाजी, योगी कैबिनेट ने सियासी पंडितों की निकाली हवा

25 मार्च को हुए योगी कैबिनेट के शपथग्रहण ने सभी को चौंका दिया। ये ऐसा शपथग्रहण था जिसने सभी सियासी पंडितों को सकते में डाल दिया। इस बार शपथग्रहण के लिए कई ऐसे नाम थे जिनकी चर्चा पूरे जोरों पर थी लेकिन उनको कैबिनेट में जगह नहीं मिली जबकि कई नाम ऐसे रहे जिनको लेकर किसी ने कयास भी नहीं लगाया था और वो मंत्रीमंडल में जगह पा गए। जैसे

श्रीकांत शर्मा

श्रीकांत शर्मा मथुरा से चुनाव जीते, डिप्टी सीएम की रेस में नाम काफी आगे चल रहा था मगर कैबिनेट तक में जगह नहीं मिली. श्रीकांत शर्मा योगी की पहली कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री थे।

सतीश महाना

सतीश महाना 8वीं बार चुनाव जीते, पिछली योगी कैबिनेट में भी शामिल थे. फिर भी इस बार उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. वो कल्याण सिंह सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं. और परिवार संघ से जुड़ा रहा है.

आशुतोष टंडन

आशुतोष टंडन पार्टी के थिंक टैंक माने जाते हैं. बावजूद इसके उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. आशुतोष टंडन योगी की पिछली सरकार में नगर विकास मंत्री रहे. लेकिन इस बार उनको जगह नहीं मिली. आशुतोष, वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे हैं.

राजेश्वर सिंह

राजेश्वर सिंह ने चुनाव से ठीक पहले ही ईडी की नौकरी छोड़ी. वो जॉइंट डायरेक्टर के पद पर थे. नौकरी छोड़कर उन्होंने भाजपा ज्वाइन की. प्रदेश की सबसे हॉट सीट सरोजनीनगर से चुनाव भी जीता. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी राजेश्वर के करीबी संबंध हैं. लेकिन फिर भी उनको मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं मिली.

अपर्णा यादव

अपर्णा यादव मुलायम सिंह की छोटी बहू हैं. अपर्णा यादव ने भाजपा के लिए न सिर्फ परिवार से बल्कि पार्टी से बगावत की. चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा का खूब प्रचार भी किया. पीएम मोदी के रोड शो के दौरान वाराणसी भी गईं. लेकिन बावजूद इसके उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.
अब आपको बताते हैं ऐसे नाम जिनकी चर्चा कहीं से कहीं तक नहीं थी. लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिल गई. इसमें पहला नाम है।
दानिश आजाद

दानिश आजाद 32 साल की उम्र में मंत्री बने हैं. दानिश ने न तो कोई चुनाव लड़ा है न ही वे किसी सदन के सदस्य हैं. उनका नाम कहीं भी दूर-दूर तक नहीं था. साल 2019 में दानिश आजाद ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक लेटर भी लिखा था. जिसमें उन्होंने पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे उत्पीड़न का मुद्दा उठाया था।

जेपीएस राठौर

जेपीएस राठौर ने भी कैबिनेट में जगह बनाई है. राठौर को राज्यमंत्री बनाया गया है. वो अभी प्रदेश महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष थे. राठौर ने आईआईटी बीएचयू से एमटेक किया है. इस चुनाव में जेपीएस के पास पश्चिम यूपी का जिम्मा था. उनका नाम मंत्री पद के लिए कहीं भी चर्चा में नहीं था।

डॉ. अरुण कुमार सक्सेना

विधायक डॉ. अरुण कुमार सक्सेना को भाजपा ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया है. वो योगी सरकार में पहली बार मंत्री बने हैं. डॉ. अरुण कुमार सक्सेना एमबीबीएस हैं. लगातार तीसरी बार उन्होंने जीत हासिल की है. उन्होंने भी दिग्गजों को पछाड़कर सभी को सरप्राइज कर दिया।

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