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20 साल पहले चिंतन शिविर में सोनिया गांधी ने बनाया था चक्रव्यूह, 2004 के चुनाव में सत्ता से बेदखल हुई अटल जी की सरकार

जयपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी का उदयपुर में ’नव संकल्प चिंतन शिविर’ चल रहा है। जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की मजबूती के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। शिविर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत सभी बड़े नेता मौजूद रहेंगे। राजस्थान में ये तीसरा मौका है जब यहां कांग्रेस का चिंतन शिविर हो रहा है। 20 साल पहले सोनिया गांधी ने इसी धरती से अटल जी की सरकार को सत्ता से बेदखल करने का चक्रव्यूह तैयार किया था। जिसका परिणाम ये रहा कि 2004 के चुनाव में बीजेपी की हार और पंजे की जीत हुई थी।

माउंट आबू में शिविर का आयोजन
केंद्र की सत्ता में अटल जी की सरकार थी और कांग्रेस छह साल से सत्ता से बेदखल थी। बीजेपी शाइनिंग इंडिया कैंपेन के तहत जोर शोर से प्रचार में लगी थी। लग रहा था कि शाइनिंग इंडिया कैंपेन के सामने कांग्रेस कहीं नहीं टिक पाएगी। तभी 2002 में सोनिया गांधी ने राजस्थान के माउंट आबू में चिंतन शिविर का आयोजन किया। तब चिंतन शविर में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था, ’कांग्रेस के मुख्यमंत्री लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। डेढ़ साल बाद लोकसभा चुनाव हैं, जनता हमें देख रही है। इस बैठक में कई निर्णय लिए गए। इस चिंतन शिविर के बाद करीब 8 साल बाद कांग्रेस की केंद्र की सत्ता में वापसी हुई थी।

2004 और 2009 में यूपीए को मिली जीत
2004 के लोकसभा चुनाव में अटल जी के खिलाफ कांग्रेस ने कई मुद्दे उठाए। जिनकी तैयारी चिंतन शिविर में पहले से ही कर ली गई थी। कांग्रेस ने बीजेपी को महंगाई, आतंकवाद सहित कई मोर्चो पर घेरा। मतदान के बाद सोनिया गाध्ां के नेतृत्व में कांग्रेस की बड़ी जीत हुई। पार्टी उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी। लेकिन सोनिया गांधी ने भविष्य की राजनीति को देखते हुए मास्टर स्ट्रोक खेला। उन्होंने, मनमोहन सिंह के नाम पर मुहर लगा दी और वह देश के प्रधानमंत्री बनें। सोनिया गांधी के इस निर्णय का फाएदा हुआ और 2009 में दूसरी बार यूपीए की सरकार दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई।

2014 से पहले 2013 में जयपुर में बैठक
2013 में जयपुर चिंतन शिविरः केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए की दो टर्म की सरकार (9 साल) लगभग पूरी हो चुकी थी। मनमोहन सिंह की सरकार पर भ्रष्टाचार के कई तरह के आरोप लग रहे थे। ऐसी स्थिति में राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस की ओर से 18 से 19 जनवरी के बीच चिंतन शिविर आयोजित की गई थी। जयपुर का चिंतिन शिविर राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने के लिए ही कराई गई थी। इस चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने कहा था, ’कल रात मां (सोनिया गांधी) कमरे में आईं और रोने लगी। वह अपने अपने अनुभवों से जानती हैं कि सत्ता एक जहर है। इस चिंतन शिविर के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की केंद्र में प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनी थी।

2014 के बाद से मिल रही हार
2014 में मिली हार के बाद कांग्रेस की जमीन धीरे-धीरे अन्य राज्यों से खिसकने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के दिल में जगह बना ली। यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया। लेकिन बीजेपी ने इस चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की। 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी को यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन पार्टी महज 1 सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई। दो साल बाद 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले 2022 में गुजरात, हिमाचाल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, 2023 में कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए उदयपुर में 13 से 15 मई के बीच कांग्रेस की ओर से चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस बार के चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस के संगठन में बदलाव और मजबूती लाना है।

422 नेता हिस्सा लेंगे
बता दें, कांग्रेस राजनीतिक, आर्थिक और संगठनात्मक मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करने को लेकर अपनी भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए उदयपुर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित कर रही है। जोकि पार्टी की ओर से आयोजित किया जा रहा अब तक का चौथा चिंतन शिविर है। इस शिविर में पार्टी के कुल 422 नेता हिस्सा लेंगे। उदयपुर कांग्रेस चिंतन शिविर के मुख्य वक्ता राहुल गांधी हैं। इसके अलावा सोनिया गांधी में बोलेंगी।

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