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पंजाब विधानसभा में पेश होने जा रहे तीन और नए मनी बिल , सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले राज्यपाल ने दी मंजूरी,जानें क्या हैं ये बिल

चंडीगढ़

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए तीन मनी बिलों में से दो को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दे दी है। उन दो मनी बिलों में से एक जीएसटी संशोधन बिल 2023 है,जबकि दूसरा बिल गिरवी रखे जाने वाली जायदादों पर स्टांप ड्यूटी लगाने को लेकर है।

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए तीन मनी बिलों में से दो को विधानसभा में पेश करने की अनुमति दे दी गई है। साथ ही उन्होंने यह निर्णय लिया है जब सुप्रीम कोर्ट में तीन नवंबर को राज्य सरकार की ओर से विधानसभा के सत्र बुलाने को लेकर याचिका दायर की गई है।

राज्य की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
आपको बता दें कि इस याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पारित बिलों को राज्यपाल द्वारा मंजूर नहीं किया जा रहा है। राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने का निर्णय लिया था और इस केस की सुनवाई 3 नवंबर को होने वाली है।

विधानसभा में पेश होने जा रहे ये दो बिल
राज्य सरकार ने मंजूरी दी है कि जिन दो मनी बिलों को वे चाहते हैं, एक में 2023 जीएसटी संशोधन बिल शामिल है, जिसके अंतर्गत राज्य में जीएसटी एपिलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई है, और दूसरा बिल जिसके बारे में विचार किया जा रहा है, वह जायदादों पर स्टांप ड्यूटी लगाने को संबंधित है।

राज्यपाल ने क्यों नहीं दी बिलों को मंजूरी
यह विधानसभा सत्र के दौरान जून में पेश किया जाने वाला बिल था, लेकिन सरकार ने इसे सत्र के शुरू होने से मात्र एक दिन पहले राज्यपाल के पास भेजा, जिसके कारण राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी। इसलिए, सरकार को इस बिल को वापस लेना पड़ा। हालांकि एक और मनी बिल भी राज्यपाल के पास पंजीकृत है, जिसमें फिस्कल रिस्पॉसिबिलिटी और बजट प्रबंधन से संबंधित है, लेकिन इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

अभी तक चार बिलों को नहीं मिली मंजूरी
राज्यपाल ने जून महीने में विधानसभा सत्र के दौरान पारित चार बिलों को अभी मंजूरी नहीं दी है, इससे स्पष्ट होता है कि वे संभावना सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर युद्ध करना चाहते हैं। अगर वह इन बिलों को पास कर देते, तो यह संकेत मिलता कि राज्यपाल ने जून महीने में उनकी अनुपालन बिना बुलाए गए सत्र को मंजूरी दी है, जिसे वे अब तक असंविधानिक मानते आए हैं।

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