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खाद्य विभाग का यह रोग है पुराना, पात्रों को नहीं मिल रहा है दाना, अपात्र बेचते हैं राशन

दिनेश सिंह, गाजियाबाद

गाजियाबाद: केन्द्र और राज्य सरकार की पात्र गृहस्थी योजना का लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा है। जबकि अपात्र राशन कार्ड बनवा कर सरकारी दुकानों से गेहूं चावल लेकर बाजार में बेच रहे हैं। पहले यह काम राशन डीलर करते थे। अब मोदी सरकार की निगरानी एवं बायोमेट्रिक सिस्टम की सख्ती की वजह से प्रत्येक राशन कार्ड धारी परिवार खाद्यान्न ले रहा है। गांव में स्थिति और भी खराब है अभी

हालिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार को बखूबी पता है कि राशन वितरण की खामियों की वजह से गरीबों को राशन नहीं मिलता जबकि कई ऐसे परिवार हैं जो गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे हैं। उनका राशन कार्ड बना हुआ है। आपको बता दें कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते तथा निवास प्रमाण पत्र के अभाव में ऐसे लाखों परिवार हैं जो अत्यंत दयनीय हालत में हैं। जिन्हें पात्र गृहस्थी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है प्रताप विहार सेक्टर 11 से ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि मैं विगत 10 साल से गाजियाबाद में रह रहा हूं। मकान खरीदने की स्थिति ना होने की वजह से किराए पर रहना पड़ता है। एक तो मकान मालिक लिखकर नहीं देते दूसरी वजह है कि एक-दो साल में निवास स्थान परिवर्तित हो जाता है। गत वर्ष कोविड-19 मे पार्षद संतराम यादव ने कैंप लगवा कर ऑनलाइन फॉर्म भरवाया एवं 50 रूपये फार्म भरने का लिया। लेकिन एक साल बीत जाने के उपरांत भी राशन कार्ड नहीं बना उनका कहना है कि मेरा आधार कार्ड जौनपुर जिले का है। इसी वजह से मेरे एवं अन्य फैक्ट्रियों में कई वर्कर पूर्वांचल बिहार से हैं। जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। रामअवतार मधुबनी निवासी बुलंदशहर इंडस्ट्रियल एरिया की झुग्गी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी फैक्ट्री बंद हो गई। हम रेलवे लाइन या आसपास के क्षेत्रों से कबाड़ बीनकर उसे बेचकर अपना जीवन यापन करता हूं। मेरा राशन कार्ड आज तक नहीं बना एक दलाल के माध्यम से कोशिश की और 500 रू भी ले लिया और राशन कार्ड भी नहीं बना। इसी तरह कई परिवार हैं। जिनका राशन कार्ड आज तक नहीं बन पाया है और ना ही खाद्य सुरक्षा का लाभ उन्हें मिल पा रहा है।

इस मामले में खाद्य विभाग के क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि जिस जिले का आधार कार्ड है। उसी जिले में राशन कार्ड बनेगा। हां पोर्टिबिलिटी के तहत वह राशन कहीं से भी ले सकते हैं। लेकिन प्रश्न वहीं खानाबदोश परिवार झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले परिवार जिन्हें खाद्य सुरक्षा योजना की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। वह परिवार इस योजना एवं सिस्टम की खामियों की वजह से लाभ से वंचित हैं।

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