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सब्जी की बढ़ती कीमतों ने तोड़ी आम आदमी की कमर, टमाटर हुआ लाल, प्याज ने निकाले आंसू

भाजपा सरकार में बढ़ती महंगाई से चहुंओर हाहाकार है। लोग पेट्रोल-डीजल की मार से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि सब्जियों के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी से ग्रहणियों के किचन का बजट गड़बड़ा गया है। व्यापारियों से मिली सूचना के अनुसार, इस बार बढ़ती महंगाई से ऐसा नहीं है कि हमें प्रॉफिट हो रहा है। कई वस्तुओं में हम लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं कम उपज की वजह से मिर्ची के भी रेट लगातार बढ़ रहे हैं। आपको बता दें कि भारी बारिश की वजह से मैदानी इलाकों से टमाटर की फसलें गायब हो गई। साउथ से आ रहे टमाटर पर डीजल की मार से दामों में फर्क आ गया है। व्यापारियों के अनुसार, दूर से आने पर टमाटर में रखरखाव और लंबी दूरी तय करने पर ट्रकों में टमाटर खराब हो जाता हैं। जिससे उसके दामों में में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। दूसरी ओर कुछ दुकानदार नाम ना छापने की शर्त पर कहते हैं कि मंडियों पर एक पार्टी का कब्जा होने की वजह से वह इच्छानुसार सब्जियों की आवक रोककर दामों में बढ़ोत्तरी करवा देते हैं। स्थानीय खरीदारों ने बताया कि इस समय मैदानी क्षेत्रों में कोई भी फसलें नहीं है। मात्र बेल की फसलें रह गई हैं। इसलिए बाहर से आने वाली सब्जियों के दामों पर बेतहाशा वृद्धि हो रही है। आम आदमी परेशान है और पार्टियां चुनावी माहौल को बनाने में व्यस्त हैं। बढ़ती महंगाई पर भाजपा अंकुश लगाने में विफल रही है। कई महिलाओं ने कहा कि दिवाली सर पर है। सब्जियों और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। इसमें हम लोग एक दूसरे को जो भी मिठाईयां या अन्य सामान बांटते थे। इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा एक तो कोविड-19 दूसरे बढ़ती महंगाई, इसलिए हर चीज के दामों में बढ़ोत्तरी से खरीदारी में कटौती करने की कोशिश की जाएगी। इसी तरह की कहानी भारतीय रिजर्व बैंक के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में भी कुछ इसी तरह की बातें निकल के सामने आई हैं कि सर्वेक्षण दिखाता है उपभोक्ताओं का विश्वास अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। उपभोक्ता विश्वास सूचकांक सितंबर में जो 49.9 पर आ गया जबकि जुलाई में 53.8 पर था। मुद्रास्फीति के मामले में इस समय विश्व में भारत तीसरे नंबर पर आ गया है। टमाटर, प्याज और मिर्ची के दामों में एवं आलू की कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले दूने का अंतर आ गया है। आलू इस समय बाजार में 25 से ₹30 किलो बिक रहा है। खाद्य मुद्रास्फीति समस्या जितनी दिख रही है उससे कहीं ज्यादा बड़ी है। दूसरी तरफ बॉर्डर्स को घेरे बैठे किसानों की वजह से देश के अन्य क्षेत्रों से आ रही आवक भी डिस्टर्ब हुई है। इस महंगाई में एक बहुत बड़ा फैक्टर किसान आंदोलन भी माना जा रहा है। बहरहाल, भारत में महंगाई लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। रोजमर्रा की चीजें जैसे सब्जी फल दूध के दाम आसमान छू रहे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार भी बढ़ती महंगाई से दबाव में तो दिख रही है लेकिन उसके पास कोई कारगर उपाय महंगाई रोकने का नहीं है लोग सरकार से पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने की अपील भी कर रहे हैं दिल्ली जैसे शहर में पेट्रोल शतक के पार है जबकि पहले ऐसा नहीं था आपको बता दें कि पांच राज्यों में होने जा रहे चुनाव में उत्तर प्रदेश एक बहुत बड़ा राज्य है और इस समय चुनावी वर्ष में महंगाई एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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