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क्या दान में मिला करोड़ों का बंगला, महंत नरेंद्र गिरि की मौत की वजह बना!

क्या बाघंबरी मठ की बेशुमार संपत्ति बनी मौत की वजह ?
क्या करोड़ों की कीमत का बंगला बना जान का दुश्मन ?
क्या हत्यारे ने एक तीर से दो शिकार किए हैं?
क्या कथित सुसाइड नोट फर्जी है ?
यह कुछ सवाल हैं जो इस वक्त रह रह कर लोगों के जेहन में आ रहे हैं कि आखिर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या क्यों की ?
जो अखाड़ा परिषद जैसी सर्वशक्तिमान संस्था का अध्यक्ष हो, बड़ी बड़ी शख्सियत जिसके आगे माथा टेकती हों, सरकार से लेकर प्रशासन तक जिसके आगे सिर झुकाता हो वो महज एक शिष्य से दुखी होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेगा ये यकीन कर पाना नामुमकिन है।

अब सवाल यह है कि अगर महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या नहीं की तो फिर उनकी हत्या किसने की और क्यों की?
अस्तित्व न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक अभी कुछ दिनों पहले ही महंत नरेंद्र गिरि को करोड़ों की कीमत का एक बंगला दान में मिला था बाघमबारी गद्दी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बंगले को लेकर महंत नरेंद्र गिरि और मठ से जुड़े हुए कुछ लोगों के बीच मनमुटाव और विवाद भी हुआ था, करोड़ों की कीमत के बंगले के दान में मिलने की पुष्टि अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद ने भी की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नरेंद्र गिरी कभी आत्महत्या नहीं कर सकते, पुलिस के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि के पास से 12 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है लेकिन इस पर भी स्वामी जितेंद्र आनंद ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जो शख्स अपना हस्ताक्षर ठीक से नहीं कर सकता एक पेज नहीं लिख सकता वह भला 12 पेज की चिट्ठी कैसे लिख देगा उन्होंने कहा कि 2 दिनों पूर्व एक बिल्डिंग नरेंद्र गिरी को दान में मिली थी और अगर वह आत्महत्या की योजना पहले से बना रहे थे तो अवसाद ग्रस्त व्यक्ति भला करोड़ों रुपए की कीमत का दान क्यों स्वीकार करेगा। यह संभव ही नहीं है कि नरेंद्र गिरी आत्महत्या कर लें इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
महंत नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरी के ऊपर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया जा रहा है, लेकिन आनंद गिरि ने भी इस मामले में न सिर्फ अपनी सफाई दी है बल्कि कुछ बड़े और सनसनीखेज आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी पूरी जिंदगी चार पेज का पत्र नहीं लिखा तो वह 12 पेज का सुसाइड नोट कैसे लिख सकते हैं?
इसके साथ ही आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि के साथ रहने वाले उनके एक गनर और उनके साथ रहने वाले कुछ लोगों पर भी सवाल खड़े किए हैं उन्होंने कहा कि जिनके पास कुछ नहीं था वह आज करोड़ों रुपए के मालिक हैं करोड़ों की संपत्ति बन गई है, आखिर उनके पास संपत्ति आई कैसे यह जांच का विषय है। अब सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि क्या महंत नरेंद्र गिरि के आसपास रहने वाले लोगों ने सुनियोजित साजिश के साथ महंत नरेंद्र गिरि की हत्या को अंजाम दिया ? क्या वाकई में महंत नरेंद्र गिरि की हत्या हुई है और उसे आत्महत्या दिखाकर एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की गई है ?
पुलिस को मिले सुसाइड नोट के मुताबिक इसमें 3 लोगों के नाम का महंत नरेंद्र गिरि ने जिक्र किया है जिसमें एक आनंद गिरी हैं, एक बड़े हनुमान जी मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी जो लेटे हनुमान जी के मुख्य पुजारी हैं और संदीप तिवारी जो उनके बेटे हैं. फिलहाल पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है लेकिन आनंद गिरि के दावे के मुताबिक बड़े हनुमान जी के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी ने उस वक्त उनका साथ दिया था जब महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था और आद्या तिवारी उनके बेहद करीबी थे, इसलिए आनंद गिरि के साथ मुख्य पुजारी और उनके बेटे को भी फंसाकर रास्ते से हटाने की योजना तैयार की गई है। उनके मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि की हत्या हुई है और आरोप आनंद गिरि पर लगाकर रास्ते के सभी कांटों को हटा दिया गया है। जिससे बाघमबारी गद्दी की बेशुमार दौलत पर कब्जा किया जा सके।
अब महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज लगातार गहराता जा रहा है, महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की या फिर सुनियोजित हत्या का शिकार हुए यह सवाल अब बेहद पेचीदा होता जा रहा है। इसकी सच्चाई अब जांच के बाद ही सामने आ पाएगी, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि बाघमबारी मठ आज बड़े षड्यंत्र का केंद्र बन चुका है।

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