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Afghanistan: चिकित्सा आपूर्ति की भारी किल्लत, बच्चे गंभीर कुपोषण का हुए शिकार

अफगानिस्तान सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली बहुत दिनों से गंभीर हालातों से गुजर रही है। अफगानिस्तान पिछले दो दशकों से करीब-करीब पूर्ण रूप से विदेशी सहायता पर आश्रित है। तालिबान के कब्जे के बाद यहां की विदेशी सहायता लगभग रुक गई है। विदेशी सहायता और चिकित्सा आपूर्ति खत्म होने के कारण अफगान बच्चे गंभीर कुपोषण की चपेट में आ रहे हैं। वहीं अमेरिका ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली 9.5 बिलियन अमरीकी डालर की मदद पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसी तरह का निर्णय अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक ने भी लिया था। आपको बता दें कि काबुल के इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं। वहीं कमरों की इतनी कमी आ गई है कि एक बिस्तर पर एक साथ दो से तीन बच्चों का उपचार किया जा रहा है। सभी माताएं फर्श पर बच्चों को स्तनपान कराती हैं। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में दवा की भी भारी किल्लत चल रही है। लोगों को भोजन तक नसीब नहीं हो रहा है। वहीं हॉस्पिटल में 360 बिस्तर हैं, लेकिन एक दिन में 500 से अधिक मरीज आ रहे हैं। अस्पताल में नवजात शिशुओं से लेकर 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों का इलाज होता है। अस्पताल में भर्ती मरीजों में सबसे ज्यादा मरीज कुपोषण से पीड़ित है।

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