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पैसों की किल्लत से जूझ रहा अफगानिस्तान

अफगानिस्तान पर अधिग्रहण करने के बाद तालिबान के पास युद्ध में जीत प्राप्त करने से भी बड़ी चुनौती है वहां की सरकार चलाना।अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के साथ अब लोग बेरोजगारी और गरीबी से जूझ रहे हैं। भारत के आम लोग दो वक्त की रोटी खाने के लिए अपने घर की कीमती वस्तुएँ बेचने को मजबूर हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिली है।

वहीं, 15 अगस्त को तालिबान की काबुल की नाकाबंदी के तुरंत बाद विदेशी सहायता तत्काल रोक दी गई थी। इसके साथ ही अमेरिका ने देश के केंद्रीय बैंक में 9.4 बिलियन अमरीकी डालर के भंडार को रोक दिया। इसके अलावा, International Monetary Fund और world Bank ने भी ऋण रोक दिया है. और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने अपने 39 सदस्य देशों को तालिबान की संपत्ति को फ्रीज करने की चेतावनी दी है।

अगस्त में तालिबान के कब्जे के बाद से करोड़ों लोगों को बैंकों से अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करते हुए देखा गया है। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान की बैंक संपत्तियों को फ्रीज करने और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा निधि को रोकने के ऐलान ने अफगानों के बीच परोशानी बढ़ा दी है। अफगान के जो लोग पहले सरकारी नौकरियों कर रहे थे या प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे थे, उन्हें रातोंरात बेरोजगार कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, अफगानों ने अब काबुल की सड़कों को साप्ताहिक बाजारों में बदल दिया है. जहां वे अपने घर के सामान को सस्ते मूल्यों पर बेच रहे हैं. जिससे वे अपने परिवार को खाना मुहैया करा सकें।

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