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आयुर्वेदिक इलाज से महज तीन माह में बिना सर्जरी से खुली फैलोपियन ट्यूब, शादी के साढ़े आठ साल के बाद नीलुफर के आंगन में सुनाई दी बच्चे की किलकारी की गूंज

नई दिल्ली। मां बनने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन खराब जीवनशैली और गलत खानपान की आदतों से कई महिलाओं का मां बनना मुश्किल हो गया है। ऐसी ही कहानी झाड़खंड की रहने वाली नीलुफर की है। नीलुफर फैलोपियन ट्यूबल ब्लॉकेज की समस्या से पीड़ित थी। इस कारण वह गर्भधारण करने में असमर्थ रही थी। आशा आयुर्वेदा क्लीनिक में तीन माह तक चली आयुर्वेदिक उपचार से बिना सर्जरी के फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज का सफल इलाज किया गया। जिससे शादी के साड़े आठ साल बाद नीलुफर का मां बनने का सपना पूरा हुआ है।

नीलुफर ने बताया की औलाद की चाह में न जाने कितने अस्पतालों के चक्कर काट चुकी थीं। इलाज के दौरान ना जाने कितनी मंहगी दवाइयां खाई, किंतु इन सब के बावजूद कोई परिणाम नहीं मिला। 2021 में डॉक्टर ने एचएसजी टेस्ट करवाने की सलाह दी। टेस्ट में आए परिणाम के बाद पता चला की दोनों ट्यूब ही ब्लॉक है। डॉक्टर ने सर्जरी करने के लिए बोला जिसके सफल होने के चांस भी कम थे। डॉक्टर ने आईवीएफ करवाने के लिए भी जोर डाला, लेकिन इससे भी कोई हल नहीं निकला।

नीलुफर ने बताया कि, इसी दौरान यूट्यूब से आशा आयुर्वेदा के बारे में पता चला। जहां डॉक्टर ने रिपोर्ट देख के मुझे आशवासन दिया की आपकी कंडीशन का इलाज हो सकता है लेकिन आपको धैर्य से काम लेना होगा। क्लीनिक में तीन माह तक चले आयुर्वेदिक इलाज और उत्तर बस्ती थेरेपी के बाद सभी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मेरे आंगन में बच्चे की किलरियों की गूंज सुनाई दी।

आयुर्वेद के अनुसार, ट्यूब ब्लॉकेज एक त्रिदोष स्थिति है। जिसे संतुलित करने के लिए उत्तर बस्ती थेरेपी दी जाती है। क्योंकि फैलोपियन ट्यूब ऐसी दो नलियां होती है जो गर्भाशय से जाकर मिलती है। अगर किन्हीं कारणों से इन नलिकायों में कोई बाधा आ जाती है तो ऐसी स्थिति में माता-पिता को संतान का सुख प्राप्ति नहीं होती है। उत्तर बस्ती थेरेपी में बिना किसी चीड़ फाड़ के फैलोपियन ट्यूब को ठीक किया जाता है।

आयुर्वेद से जुड़े डॉक्टर्स बताते हैं, ट्यूबल ब्लॉकेज के प्रबंधन के लिए आयुर्वेद वात-कफ दोष, पचाना और अपान वतनुलोमाना को शांत करने पर केंद्रित हैं। उत्तर बस्ती उपचार में गर्भाशय के जरिए फैलोपियन ट्यूब में एक विशेष प्रकार की औषधीय तेल, घी, या काढ़ा डाला जाता है। इसको करने में मात्रा 15 से 20 मिनट तक का समय लगता है। यह थेरेपी लगातार तीन दिनों तक या रोगी के आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।

डॉक्टर्स के अनुसार, उत्तरा बस्ती हाइड्रोसाल्पिनक्स, पीसीओएस और पीसीओडी के इलाज में भी उपयोगी है। उत्तर बस्ती के द्वारा ट्यूब में होने वाला ब्लॉक आसानी से खुल जाता है और महिला बच्चे करने के योग्य बन जाती है।उत्तर बस्ती ट्यूबल ब्लॉकेज महिला बांझपन के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। उत्तर बस्ती पूरे मूत्र प्रणाली जननांग अंगों को साफ करती है। यह परिसंचरण में सुधार करता है, सिस्टम के चैनल खोलता है और सभी विषाक्तता को दूर करता है।

डॉक्टर्स बताते हैं, उत्तर बस्ती मूत्र प्रणाली और जननांग क्षेत्र के पारंपरिक कामकाज को भी बहाल करती है। यह अतिरिक्त रुप से एक बहुत ही विशिष्ट क्षेत्र में पोषण प्रदान करने में मदद करता है। यह उन महिलाओं के लिए आशा की किरण है जो मूत्र और जननांग प्राणली के सर्जिकल हस्तक्षेप के बिना बंद ट्यूब को खोलना चाहते है। यहां थेरेपी के साथ खानपान और योगासन पर भी ध्यान दिया जाता है। अब ट्यूब ओपन होने के बाद नीलुफर कंसीव करने में सफल रही है।

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