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Mahoba: सिंचाई विभाग का अजब कारनामा, मृतक किसानों के खिलाफ पुलिस को दी तहरीर

सौरभ तिवारी, महोबा

सरकार किसानों की आय दुगनी करने की कोशिश कर रही है। लेकिन सरकारी सिस्टम में बैठे लोग सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहे हैं। जी हां ऐसा ही एक मामला बुंदेलखंड के महोबा जिले में देखने को मिला। जहां पर सिंचाई विभाग द्वारा एक दर्जन मृतक किसानों सहित लगभग डेढ़ सैकड़ा किसानों के खिलाफ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती करने का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। फिलहाल इस मामले में प्रभारी जिलाधिकारी ने मामले की जांच करने की बात कही है।

आपको बता दें कि महोबा जिले के सदर तहसील की ग्राम पंचायत पिपरामाफ के उर्मिल बांध का निर्माण सन 1978 को हुआ था और डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन को सिंचाई विभाग द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया था। इसी जमीन पर जल स्तर कम होने पर सिंचाई विभाग द्वारा उन किसानों को पट्टे किये गए थे। जिनकी जमीन अधिग्रहण की गई थी जिसमें वह खेती कर रहे हैं। वहीं अब सींचपाल और सोहनलाल साहू द्वारा पट्टे प्रक्रिया के तहत अन्य लोगों को जमीन के पट्टे कर दिए गए। जब किसानों ने विरोध किया तो सींचपाल द्वारा अपनी कमियां छिपाने के लिए पिपरागांव के 154 किसानों के खिलाफ थाने में जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। जिसमें लगभग एक दर्जन किसान ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी हैं। जिसमें राजकुमार, मिजाजी और खिल्ला जैसे लगभग एक दर्जन किसान है। फिलहाल इस मामले में प्रभारी जिलाधिकारी द्वारा जांच कर कार्यवाही करने को कहा गया है। मृतक के परिजनों ने बताया कि उनकी जमीन का पट्टा उर्मिल बांध डूब क्षेत्र में है और उनका पिता की मौत एक वर्ष पूर्व हो चुकी है और उन्हें यह पता नहीं है कि उनके मृतक पिता के खिलाफ भी तहरीर दी गई है। पट्टा धारक बारे लाल कहते हैं कि उनकी जमीन उर्मिल बांध में थी और विभाग द्वारा पट्टा किया गया था और कहा गया था आपकी जमीन पर आप ही खेती करेंगे लेकिन अब हमसे सींचपाल द्वारा 10 हजार रुपये मांगे जा रहे थे हमारे पास पैसा नहीं थे। इसलिए हमारा पट्टा दूसरे लोगों को कर दिया। जब इसका हमने विरोध किया तो हमारे खिलाफ थाने में तहरीर दे दी। वहीं समाजसेवी कहते हैं कि हमारा गांव उर्मिल बांध डूब क्षेत्र में आता था जिसको विस्थापित किया गया था और उस समय अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि आपकी जमीन है और पानी भरने पर विभाग के पास और खाली होने के बाद किसानों की होगी। लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा कुछ बाहरी किसानों को पट्टे कर दिए गए जिसका हम लोगों ने विरोध किया तो एक दर्जन मृतक किसानों सहित लगभग 150 किसानों के खिलाफ थाने में तहरीर दे दी गई।

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