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APJ Abdul Kalam Birth Anniversary : इमली के बीज बेचने के साथ ही स्टेशन पर कलाम साहब ने ’फेंके’ अखबार, जानें अविवाहित होने के बावजूद कैसे तीन बेटों के पिता बने मिसाइल मैन

नई दिल्ली। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीएजे अब्दुल कलाम का जन्म दिवस 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। एक गरीब घर में जन्म लेने वाले एपीएजे अब्दुल कलाम ने वह काम कर दिया, जिसका लोहा देश ही नहीं विदेश में बजता है और इसी के चलते कलाम साहब को मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है। जिदगी ने जब उन्हें जिस भूमिका को निभाने का दायित्व सौंपा, वह उसपर खरे उतरे। वे देश के राष्ट्रपति रहे, एक महान विचारक रहे, लेखक रहे और वैज्ञानिक भी रहे। देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा। डॉक्टर कलाम ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि, उनके तीन बेटे हैं, जिनका नाम पृथ्वी, अग्नी और ब्रह्मोस है।

मछुआरे के घर में कलाम साहब ने लिया था जन्म
भारत के मिसाइल मैन कहने जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के शहर रामेश्वरम में हुआ था। एक मछुआरे के घर में पैदा हुए कलाम का बचपन अभावों में बीता, लेकिन उन्होंने बचपन से ही कुछ करने का हौसला पाल रखा था। अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए कलाम ने घर-घर में अखबार बांटना शुरू किया। वो स्कूल के बाद अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए अखबार बांटा करते थे। वह नाव के जरिए नदी को पार कर स्कूल जाते। अवकाश के दिन खुद नाव चलाते और जो पैसा मिलता उससे घर का खर्च चलाया करते।

इस वजह से बेचे इमली के बीज
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कलाम महज 8 साल के थे, जब उन्होंने रोजाना एक आना कमाना शुरू कर दिया था। वह समझ नहीं पाए थे कि अचानक इमली के बीज महंगे क्यों हो गए। डॉ. ऐ पी जे अब्दुल कलाम के लेखक सचिन सिंहल अपनी किताब में लिखते हैं कि शायद कलाम को भी नहीं पता था कि क्यों इमली के बीजों के दाम बढ़ गए, लेकिन उन्होंने इमली के बीजों को इक्ट्ठा करना शुरू कर दिया। वे इमली के बीज इक्ट्ठा करते थे और मस्जिद के पास वाली सड़क पर बेच आते थे, जिससे दिनभर में उन्हें एक आने की की कमाई हो जाती थी। दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्…दौरान इमली के बीजों का पीसकर एक खास किस्म का पाउडर बनाया जाता था, जिसका इस्तेमाल युद्ध में काम आने वाली गाड़ियों के ईंधन बनाने के लिए किया जाता था।

 इंडियन एयरफोर्स में जाने का सपना टूट गया
कलाम साहब मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र थे। गणित और भौतिकी उनके पसंदीदा विषय थे। कलाम का सपना इंडियन एयरफोर्स में जाने का था। इसलिए उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन नियती में कुछ और ही लिखा था। कलाम साहब इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में बैठे थे। इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में उन्हें मिलाकर कुल 25 उम्मीदवार थे। इसमें से सिर्फ 8 उम्मीदवारों का चयन होना था। एपीजे अबुल कलाम नौवें पोजिशन पर रहे और उनका इंडियन एयरफोर्स में जाने का सपना टूट गया। उस वक्त कौन जानता था कि उनके इस सपने का टूटना सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अच्छा था। उन्हें और भी बड़ी भूमिका में देश की सेवा करनी थी। इसके बाद कलाम साहब ने जो किया वो इतिहास बन गया।

नए वैज्ञानिकों और बच्चो के लिए प्रेरक बाते लिखा करते थे कलाम
डॉक्टर कलाम देश के पहले ऐसे राष्ट्रपति बने, जो सोशल मीडिया में लगातार युवाओं तथा नए वैज्ञानिकों और बच्चो के लिए प्रेरक बाते लिखा करते थे। ये बात पूरी दुनिया जानती है कि बच्चों के बेहद प्रिय कलाम साहब ने पूरा जीवन अकेले बिताया, उन्होंने शादी नहीं की और ना ही अपना परिवार बढ़ाया, लेकिन सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि उनके बच्चे थे। इस बात को खुलासा जब एक इंटरव्यू के दौरान हुआ, जब उनके निजी जीवन के बारे में पूछा गया। दरअसल, एक बार राष्ट्रपति भवन में कलाम साहब बच्चों के बीच में घिरे हुए थे। उसी वक्त वहां उनका इंटरव्यू लेने आए एक विदेशी पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आपकी कोई अपनी संतान नहीं है फिर भी आप बच्चों से इतना प्यार करते हैं।

कलाम बोले, नहीं आप गलत हैं
पत्रकार की बातें सुनकर कलाम साहब मुस्कुराए और बड़ी शालीनता के साथ बोले कि नहीं आप गलत हैं। मेरे तीन बच्चे हैं। कलाम साहब का यह जवाब सुनकर सब हैरान रह गए, लेकिन जब उन्होंने अपनी पूरी बात कही तो हर किसी की आंखें खुशी और गर्व से छलछला उठीं। क्योंकि कलाम ने कहा कि आपको पता नहीं मेरे तीन बेटे हैं, जिनके नाम हैं पृथ्वी, अग्नी और ब्रह्मोस। कलाम साहब ने पूरी जिंदकी भारत माता के नाम कर दी। वह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक थे। इसके अलावा कलाम साहब, भारत रत्न अटल जी के भी बहुत करीब थे।

भारत सरकार ने दिया भारत रत्न
भारत सरकार ने 1981 में कलाम साहब को पद्म भूषण और फिर 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। . भारत रत्न पाने वाले वे देश के तीसरे राष्ट्रपति हैं और उनसे पहले सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन को भरात रत्न दिया गया। एपीजे अब्दुल कलाम को 1992 में 1999 में रक्षा सलाहाकार नियुक्त किया गया। इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1996 में पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया। अब्दुल कलाम को 2002 में भारत का 11वां राष्ट्रपति चुना गया था।

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