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वर्तमान में पत्रकारों को अपने अधिकारों के लिए होना होगा संगठित, तभी मिल पाएंगे अधिकार

अजय सिंह, ब्यूरो चीफ/सीतापुर

अपने आप में चौथा स्तंभ कहलाए जाने वाली मीडिया की सरकार की तौर पर उपेक्षा की जाती है यू तो देखा जाए तो एक जनप्रतिनिधि चुनाव जीतकर एमएलए बनता है मंत्री बनता है और उसको अनेकों सुविधाएं मिलती है सुरक्षा की दृष्टि से आर्थिक दृष्टि से सभी प्रकार की उसकी सुरक्षा होती है व्यवस्था होती है किंतु जो पत्रकार अपनी जान हथेली पर लेकर समाज और सरकार के बीच में सेतु का काम करता है ना तो उसकी ओर सरकार ध्यान देती है और ना ही कोई अन्य संस्थाएं, उनकी जान को खतरा बना रहता है जबकि जो पत्रकार अपनी संस्था के लिए काम करते हैं उस संस्था के मालिक दिनों-दिन तरक्की के शिखर को छूते हैं। जब मेहनतकश पत्रकार हमेशा उपेक्षित रहता है देखने में आता है कि नेताओं को हर तरह का लाभ मिलता है। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। लेकिन पत्रकारों के लिए कोई योजना नहीं, यदि स्वास्थ्य विभाग में जाए तो उनकी कोई अलग से विशेष व्यवस्था नहीं, रेलवे में भी देखने में आता है कि उनके लिए ना तो कोई अलग से कतार की व्यवस्था होती है, ना कोई विशेष छूट दी जाती है, जबकि कोई घटना हो जाती है तो सबसे पहले पत्रकार पहुंचकर कवरेज करते हैं, समाचार पत्र में लिखते हैं, किंतु पत्रकारों की हमेशा उपेक्षा होती है। यदि पत्रकार अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए कोई कारोबार करना चाहे तो उनके लिए अलग से कोई कोटा नहीं रहता, सरकार भवन बनाती है उनकी नीलामी करवाती है लेकिन पत्रकारों के लिए कोई विशेष छूट नहीं करती है और ना ही उनके लिए कोई आरक्षण उपलब्ध होता है। सरकार आर्मी के लोगों के लिए, बुजुर्गों के लिए, पिछड़ा वर्ग के लिए और सभी वर्गों के लिए कोई ना कोई योजना चला रही है। लेकिन पत्रकारों के लिए कोई योजना नहीं, कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, लेकिन जो पत्रकार रात दिन मेहनत करते हैं अपनी जान की भी परवाह नहीं करते और कवरेज करते हैं। सरकार इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही, जो पत्रकार समाज की सेवा कर अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, वहीं जो नेता 5 साल के लिए समाज सेवा के नाम पर नेता बनते हैं उनको बहुत सारी सुविधाएं दी जाती है, विधायक ना रहते हुए भी उनको पेंशन दी जाती है उन्हें अनेक लाभ दिए जाते हैं, लेकिन जो पत्रकार पढ़ लिखकर पत्रकारिता करते हैं उनकी हमेशा उपेक्षा होती है, समय रहते हैं सरकार को इस दिशा में भी कार्य करने चाहिए लेकिन इसका एक कारण है पत्रकारों की एकता जब तक पत्रकारों में एकता नहीं होगी वह साथ संगठित नहीं रहेंगे, तब तक वह अपने अधिकारों से वंचित रहेंगे, पत्रकार आंदोलन का गौरवशाली इतिहास रहा है, देश की आजादी के बाद पत्रकार हितों को लेकर सशक्त प्रयास हुए लेकिन आज पत्रकारों में हिम्मत नहीं है कि वह हड़ताल कर ले पत्रकार जब संगठित रहेंगे तभी अपने अधिकार लागू करा पाएंगे, पत्रकारों का पत्रकारिता करना मौलिक अधिकार है पत्रकार समाज का महत्वपूर्ण घटक है इसलिए वह समाज को सही दिशा दें, वर्तमान में पत्रकारों की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो गई है। हमें अपने अधिकारों को जानना होगा और साथ मिलकर आवाज उठानी होगी, तभी पत्रकारों का हित संभव है, वास्तव में सरकार को चाहिए कि वह उदारता का परिचय देते हुए पत्रकारों की वाजिब मांगों को मानकर अपनी सदस्यता का परिचय दें, लोकतंत्र में सरकार और पत्रकार परस्पर एक दूसरे के पूरक हैं बिना पत्रकारों के सरकार अधूरी है तो पत्रकार भी सरकार के बिना अपंग रहेंगे, कुछ दिन तक तो एक दूसरे के बगैर काम चलाया जा सकता है लेकिन लंबे समय तक नहीं इसलिए निदान आवश्यक है पत्रकारिता के काम में सबसे प्रमुख है जनमत को आकार देना उनको दिशा निर्देश देना और जनमत का प्रचार प्रसार करना पत्रकारिता का यह कार्य लोकतंत्र को स्थापित करता है लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में पत्रकारिता लोगों के मध्य जागरूकता लाने का एक सशक्त माध्यम है पत्रकारिता के मुख्य कार्यों पर नजर डाले तो हम यह कह सकते हैं कि समाचार के माध्यम से लोगों को घटित घटनाओं को सूचित करना है पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है इस हिसाब से न्यायपालिका कार्यपालिका विधायिका जैसे तीन स्तंभ को बांधे रखने के लिए पत्रकारिता एक कड़ी के रूप में काम करती है कारण पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसलिए सभी सम्मानित पत्रकार साथी एक प्लेटफार्म पर आएं और अपनी एकता का प्रमाण पत्रकार भाइयों से अनुरोध है अपनी आवाज बुलंद करिए सरकार के कानों में गूंजे पत्रकार कवरेज करने जाता है जान हथेली पर कवरेज करता है सरकार क्या देती है जीरो बटा सन्नाटा पत्रकार बिना पूछे मेटिंग में पहुंच जाते हैं यह नहीं होना चाहिए अधिकारी फोन करें पत्रकार को बुलाए तब पत्रकार अधिकारी के पास पहुंचे पत्रकार अपनी गरिमा गिर आए हुए हैं चौथा स्तंभ गिरता ही जा रहा है अगर पत्रकार नहीं समझे तो आने वाला पल बहुत दयनीय होगा अपनी आवाज बुलंद करिए अपना सम्मान बनाए रखिए।

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