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dir="ltr" lang="en-US" prefix="og: https://ogp.me/ns#" > इस वजह से कानपुर में पांच साल से सलाखों के पीछे तन्हाई की सजा काट रहा ’मिर्जा लाल मुंह वाला’ - Astitva News
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इस वजह से कानपुर में पांच साल से सलाखों के पीछे तन्हाई की सजा काट रहा ’मिर्जा लाल मुंह वाला’

कानपुर। आमने इंसानों को कोर्ट द्धारा सजा दिए जाने के अनगिनत किस्से सुने होंगे, लेकिन कानपुर में ‘’मिर्जा लाल मुंह वाला’ नाम के बंदर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बंदर, पिछले पांच सालों से चिड़ियाघर स्थित एक तन्हाई बाड़े में दिन गुजार रहा है। इसे सलाखों के पीछे ही रखकर शाकाहारी खाना दिया जाता है। यहां के डॉक्टर्स का कहना है कि, फिलहाल इसे तब तक बाहर नहीं लाया जा सकता, जब तक इसके स्वभाव में परिवर्तन नहीं आया। डॉक्टर्स के मुताबिक, बंदर की देखरेख के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो इस पर 24 घंटे नजर रखते हैं।

मिजापुर से पकड़ा गया था बंदर
चिड़ियाघर के डॉक्टर नासिर खान बताते हैं, बंदर को करीब पांच साल पहले वन्य विभाग की टीम ने मिर्जापुर से पकड़ा था। ये आमलोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देता था। वन्य विभाग की टीम बंदर को लेकर कानपुर आई। यहां हमलोगों ने पहले इसका इलाज किया। बंदर को शाकाहारी भोजन दिया जाता तो वह नहीं खाता। बंदर ने कई कर्मचारियों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। जिसके बाद इसे एक बाड़े में बंद कर निगरानी शुरू कर दी गई। डॉक्टर के मुताबिक, जब तक इसके स्वभाव में बदलाव नहीं आता, तब तक बंदर को बाड़े में ही रखा जाएगा।

शराब के साथ पांस का लती
डॉक्टर नासिर बताते हैं कि, चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने इसका नाम ’मिर्जा लाल मुंह वाला’ रखा था। यह बंदर मिर्जापुर के एक तांत्रिक के साथ रहता था। तांत्रिक ने इसका नाम ‘कलुआ’ रखा हुआ था। चूंकि तांत्रिक मांस व मदिरा का शौकीन था और बंदर को भी वही खिलाता था, इसलिए वह भी मांस और शराब का लती हो गया। इस बीच तांत्रिक की मौत हो गई। शराब और मांस मिलना बंद होने से बंदर आक्रामक हो गया। लोगों पर हमला करने लगा। बंदर के हमले से कई लोग बुरी तरह से जख्मी हुए थे। कड़ी मशक्कत के बाद बंदर को पकड़ा गया था।

3 सौ से ज्यादा लोगों को काट चुका है बंदर
डॉक्टर के मुताबिक, बंदर इस कदर शराब के प्रति लालायित था कि शराब की दुकानों में घुस जाता था। शराब लेकर जा रहे लोगों पर हमला कर बोतल छीन लेता था। उन्हें काट लेता था। मिर्जापुर में एक तरह उसका आतंक था और तीन सौ से अधिक लोगों को काट चुका था। मिर्जापुर से आने के बाद ये बाड़े में बंद है और बंदर के स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया है। वह अभी भी आक्रामक है और किसी को भी देखकर हमलावर हो उठता है। इसीलिए उसे बाड़े में बंद रखा जाता है।

–तब तक बाड़े में रहेगा बंदर
डॉक्टर नासिर बताते हैं, जब तक उसका स्वभाव सही नहीं हो जाता, वह बाड़े में ही रहेगा। बताते हैं, बंदर को शाकाहारी भोजन दिया जा रहा है। उसके स्वभाव के बारे में एक साल पहले शासन को पत्र लिखा गया था। डॉक्टर नासिर बताते हैं कि कलुआ के साथ ही अन्य उपद्रवी बंदरों को भी बाड़ों में रखा गया है। जिनके स्वभाव में परिवर्तन आता है उन्हें छोड़ दिया जाता है। डॉक्टर्स की टीम इन पर नजर रखती है और जांच के साथ इलाज भी किया जाता है।

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