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सेना में जाने का सपना टूटा तो काकरकुंड गांव के छोरे ने वकार युनूस से क्रिकेट का ‘ककहरा’ सीखा, सौरभ गांगुली के चलते अब टीम इंडिया के लिए खेलेगा टैक्सी चालक का बेटा

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान हो चुका है। जिसमें मुकेश कुमार को पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया है। मुकेश ने घरेलू टूर्नोमेंट के अलावा इंडिया ए में अपने हुनर का लोहा मनवाया। अब बिहार का ये लाल नीली जर्सी में देश के लिए खेलेगा। ऐसे में हम आपको मुकेश की िंजंदगी से जुड़े किस्से से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आप हैरान हो जाएंगे। कैसे टैक्सी चालक का बेटा सेना में सिलेक्ट होने के बाद मेडिकल मे ंअनफिट होने के बाद हिम्मत नहीं हारी। सेना की वर्दी नहीं मिली तो अपने गांव में क्रिकेट का ककहरा सीखा और बिहार के गोपालगंज से सीधे बंगाल पहुंच गया। यहां मुकेश को पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर वकार युनूस ने गेंदबाजी के टिप्स सिखाए तो अरूण लाल के चलते रणजी में खेलने का मौका मिला।

हादसे के बाद पिता ने कोलकाता बुलवाया
मुकेश का जन्म बिहार के गोपालगंज जनपद के काकरकुंड गांव में हुआ था। मुकेश के पिता अपना परिवार पालने के लिए कोलकाता जाकर वहां ऑटो चलाने लगे। मुकेश पहले गोपालगंज में क्रिकेट खेलते थे और उनका प्रदर्शन अच्छा था। घर की आर्थिक स्थित खराब होने के चलते मुकेश ने इंडियन आर्मी ज्वाइन करने के लिए दो दौड़ लगाई। दोनों बार वह सफल भी रहे, लेकिन मेडिकल में अनफिट होने के कारण मुकेश का चयन भारतीय सेना में नहीं हो सका। इस बीच मुकेश क्रिकेट खेलते रहे और वह बिहार के लिए अंडर-19 क्रिकेट भी खेले। मुकेश ने कुछ दिन पहले मीडिया को बताया था कि, 2011 में मैं मोटरबाइक से गिर गए थे। काफी चोट लगी थी। मुकेश के पिता ने उन्हें कोलकाता बुला लिया। काम की तलाश के साथ मुकेश क्रिकेट खेलना जारी रखा। मुकेश कोलकाता के खेप के नाम से मशहूर टूर्नामेंट में खेलने लगे। जहां प्राइवेट क्लबों से प्रति मैच 500 रुपये मिलते थे।

कोच रानादेब बोस ने उनकी प्रतिभा को पहचाना
मुकेश ने 2014 में बंगाल क्रिकेट संघ के ट्रायल में हिस्सा लिया। कोच रानादेब बोस ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। रानादेब सर के कहने पर ही उन्हें ईडन गॉर्डन के एक कमरे में रहने की जगह भी मिल गई। 2015 में बंगाल के लिए पदार्पण किया। बंगाल के लिए रणजी डेब्यू करने के बाद मुकेश ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आकाशदीप और ईशान पोरेल के साथ मिलकर बंगाल की गेंदबाजी को मजबूती दी। बंगाल की रणजी टीम का आक्रमण विश्व स्तरीय हो गया। आईपीएल में मुकेश को दिल्ली की टीम में बतौर नेट गेंदबाज भी शामिल किया गया। इस दौरान उन्होंने लगातार अपनी गेंदबाजी में सुधार किया। 2022 रणजी ट्रॉफी में कमाल करने के बाद इंडिया ए और ईरानी ट्रॉफी में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और इसी का फायदा उन्हें टीम इंडिया में जगह के रूप में मिला है।

गेंदबाज वकार युनूस भी अवाक रह गए थे
मुकेश की गेंदबाजी देखकर पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज वकार युनूस भी अवाक रह गए थे। मुकेश ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया था कि, बंगाल क्रिकेट संघ की तरफ से आयोजित ’विजन 20-20 कैंप में मुझे वकार से प्रशिक्षण प्राप्त करने का मौका मिला। उन्होंने मुझे स्टंप्स के पास गेंद डालने की सलाह दी थी, जो मेरे बहुत काम आई। मुकेश के मुताबिक, वकार के बताए टिप्स में मैंने काम किया और सटीक यॉर्कर गेंद डालने में कामयाब रहा। बंगाल क्रिकेट टीम के कोच रहे अरुण लाल ने मुकेश की प्रतिभा को पहचाना था और उसका पूरा समर्थन किया था। इतना ही नहीं, रानादेब ने सौरव गांगुली से बात करके उन्हें ईडन गार्डन स्टेडियम में एक कमरा दिलवाया और उनके खाने का भी इंतजाम कराया। सारी सुविधाएं मिलने के बाद मुकेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब भारतीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं।

तो उनका नाम काट दिया गया था
पश्चिम बंगाल की रणजी टीम के लिए साल 2014 में बड़े स्तर पर ट्रायल हो रहा था। बंगाल के गेंदबाजी कोच रानादेब बोस बंगाल क्रिकेट के डायरेक्टर जयदीप मुखर्जी खिलाड़ियों का चयन कर रहे थे। ट्रायल देने वाले खिलाड़ियों की सूची में मुकेश का नाम आखिरी कुछ खिलाड़ियों में था। वह लाइन में खड़े थे और उन्होंने अपने पीछे खड़े लड़के से कहा कि वह उनकी जगह का ध्यान रखे। वह बाथरूम से आ रहे हैं, लेकिन जब मुकेश लौटे तो वहां कोई नहीं था। उन्होंने रानादेब बोस और जयदीप मुखर्जी को देखा। मुकेश दोनों के सामने जाकर एक मौके के लिए मिन्नतें करने लगे। लिस्ट देखी गई तो मुकेश के नाम के सामने लाल निशान था, क्योंकि कई बार उनका नाम पुकारे जाने के बाद जब कोई खिलाड़ी नहीं आया तो उनका नाम काट दिया गया था। रानादेब अंत में मान गए और मुकेश को गेंद दी। उन्होंने शानदार अंदर आती यॉर्कर गेंद की और बल्लेबाज परेशान हो गया। इसके बाद बंगाल की टीम के संभावित खिलाड़ियों में उनका चयन हो गया।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी
मुकेश के पिता काशीनाथ सिंह की पिछले साल मौत हो गई थी। इसके बाद उनके लिए मुश्किलें बढ़ गईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पूरी लगन के साथ मुकेश अपने सपने को हकीकत में बदलने में लगे रहे। पिता की मौत के बाद बड़े स्तर पर उन्होंने और भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और अब उन्हें भारतीय टीम में चुना जा चुका है। अगर उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका मिलता है और वह यहां भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आईपीएल में भी उनका बिकना तय है। ऐसा होने पर उन्हें आर्थिक समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। मुकेश का संघर्ष खत्म हो चुका है, लेकिन अभी भी उन्हें बहुत कुछ हासिल करना बाकी है।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम
शिखर धवन (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर (उप कप्तान), रजत पाटीदार, राहुल त्रिपाठी, इशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शाहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, मुकेश कुमार, आवेश खान, मोहम्मद सिराज और दीपक चाहर।

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