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22 माह के बाद बिकरू कांड का सामने आया सनसनीखेज सच, ‘मुखबिर’ की सूचना पर विकास ने बहाया था 8 पुलिसवालों का खून

कानपुर। गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के बाद पुलिस-प्रशासन का उसके मददगारों पर शिकंजा कसता जा रहा है। वारदात के दिन अपराधी को पुलिस की रेड की जानकारी देने के आरोप में जेल में बंद तत्कालीन एसओ विनय तिवारी और दारोगा केके शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है.ं। कमिश्नरेट पुलिस ने पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की कार्रवाई की जानकारी शासन को भेज दी है।

क्या है पूरा मामला
2 जुलाई 2022 को गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने हथियारबंद साथियों के साथ मिलकर सीओ समेत आठ पुलिसवालों की बेरहमी से हत्या कर सनसनी फैला दी थी। पुलिस और यूपी एसटीएफ के जवाइंट ऑपरेशन में विकास समेत उसके छह गुर्गे एनकाउंटर में मारे गए। पुलिस ने विकास की मदद के आरोप में तीन दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जिसमें चौबेपुर के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी और दारोगा केके शर्मा शामिल थे। एसआईटी की जांच के बाद दोनों को पुलिससेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

जांच में सामने आया सच
बिकरू कांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। .जांच में चौबेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी और हलका इंचार्ज केके शर्मा को विकास दुबे का मददगार पाया गया था। दोनों पर आरोप है कि पुलिस की दबिश की जानकारी विकास दुबे को पहले से दे दी थी। वारदात के बाद शहीद सीओ बिल्हौर का एक आडियो वायरल हुआ थां। जिसमें शहीद सीओ, एसपी को विकास के घर पर रेड के बारे में जानकारी देते कह रहे थे कि, साहब, उसे थाने से फोन पहुंच गया होगा।

ये पाए गए दोषी
कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने बताया कि बिकरू कांड में जो पुलिसकर्मी दोषी पाए गए थे उनमें से अधिकतर की जांच कमिश्नरी पुलिस को सौंपी गई थी, जिसमें से तत्कालीन एसओ विनय तिवारी व हलका इंचार्ज केके शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है। अन्य 14 दोषी पुलिसकर्मियों को मिस कंडक्ट दी गई है, जिसमें तीन इंस्पेक्टर, सात सब इंस्पेक्टर, दो हेड कांस्टेबल व दो सिपाही शामिल हैं। तीन सब इंस्पेक्टर व दो सिपाहियों को दंडित करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। जबकि जांच में दोषी पाए गए इंस्पेक्टर मो. इब्राहिम, वेद प्रकाश और लालमणि रिटायर हो चुके हैं।

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