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जिम कॉर्बेट के अधिकारियों पर सीएम ने चलाया चाबुक, घोटालेबाजों की हुई विदाई

जिम कॉर्बेट में अवैध निर्माण और बड़े घोटाले के आरोपों से कटघरे में खड़ी सरकार ने आखिरकार वन महकमे में कार्यवाई का चाबुक चला ही दिया। इस दौरान कॉर्बेट पार्क में अवैध कटान और नियम विरुद्ध निर्माण को लेकर तीन IFS अधिकारियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यवाई की है। कार्रवाई के दौरान वन संरक्षक राजीव भरतरी, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव अनूप मलिक और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जेएस सुहाग तत्काल प्रभाव से पदों से हटा दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में वन विभाग के मुखिया राजीव भरतरी (हेड ऑफ फॉरेस्ट) को हटाने के आदेश जारी कर दिया है अब उनकी जगह विनोद कुमार को वन विभाग का मुखिया बनाया गया है। वहीं राजीव भरतरी को अब उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि विनोद कुमार प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव और वन मुखिया की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस तरह उत्तराखंड वन विभाग में विनोद कुमार को पावरफुल किया गया है। प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक से प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके अलावा जेएस सुहाग से भी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को वापस ले लिया गया है।

विभाग में मुख्य वन संरक्षक निशांत वर्मा को मुख्य वन संरक्षक 1 आदमी एवं आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है। उनसे उत्तराखंड वन विकास निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके अलावा पराग मधुकर धकाते को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक बनाया गया है। अशोक कुमार गुप्ता को वन संरक्षक शिवालिक वृत्त की जिम्मेदारी दी गई है। उधर धर्मेश कुमार को वन संरक्षक अपर निदेशक उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी भेजा गया है। उनसे वन संरक्षक निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। विभाग में वन संरक्षक दीप चंद्र आर्य को वन संरक्षक पश्चिमी वित्त हल्द्वानी की जिम्मेदारी दी गई है। उनसे उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण के निदेशक का पद वापस लिया गया है. अखिलेश तिवारी को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व का डायरेक्टर बनाया गया है। उधर तिरुज्ञानसंबंदम को प्रभागीय वन अधिकारी हरिद्वार वन प्रभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनसे क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम की जिम्मेदारी वापस ली गई है। गौरतलब है की फुल प्रूफ सिक्युरिटी के बावजूद कार्बेट के बफर और कोर जोन में सड़क और भवन निर्माण होते रहें और वन्य जीव विभाग के अधिकारी सोते रहें। बफर और कोर जोन तक रिजार्ट मालिकों ने सड़कें बना दी और किसी जिम्मेदार अधिकारी को कानोकान खबर तक नहीं लगी। कार्बेट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों की जांच के लिए ईमानदार अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को जांच दी गई है। लेकिन उन्हें भी जांच नहीं करने दी गयी। आखिरकार उन्होंने शासन में पत्र लिखकर जांच की मंशा पर सवाल उठाते हुए खुद को जांच से अलग कर लिया था।

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