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दुनियाभर में एक नए धर्म अब्राहमी की दस्तक, धर्म बनाने के उद्देशय पर खड़ा हुआ विवाद

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी… दुनिया के कई सारे धर्मों के बीच इन दिनों एक नया धर्म चर्चा में आया है. यह धर्म है अब्राहमी. इस नए धर्म की फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. और न ही इसकी अभी नींव रखी गई है और न ही इसके अनुयायी मौजूद हैं. हर धर्म का एक धार्मिक ग्रंथ होता है, लेकिन इस अब्राहमी धर्म का आज तक कोई धर्मग्रंथ भी नहीं है.
इसके बावजूद इस धर्म की खूब चर्चा हो रही है. मिस्र में धार्मिक एकता के लिए शुरू हुई मुहिम मिस्र फैमिली हाउस की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर अल अजहर के शीर्ष इमाम अहमद अल तैय्यब की इस धर्म को लेकर की गई टिप्पणी के बाद आलोचना हो रही है. ऐसे में बहुत से लोगों के मन में ये सवाल है कि अचानक क्यों अब्राहमी धर्म की चर्चा तेज होने लगी है
क्या है अब्राहमी धर्म?
पहले जरा ये समझते हैं कि अब्राहमी धर्म है क्या. अब्राहमी धर्म को फिलहाल एक धार्मिक प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसके तहत इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म के बीच समानता को ध्यान में रखते हुए पैगंबर अब्राहम के नाम पर एक नया धर्म बनाने की चर्चा हो रही है. इस धर्म को लाने के पीछे का उद्देश्य इन तीनों धर्मों के बीच के मतभेदों को खत्म करना है.

अब्राहमी धर्म पर चर्चा भले ही अब जोर पकड़ रही है, लेकिन इसकी सुगबुगाहट करीब एक साल से हो रही है. इसको लेकर खूब विवाद भी हुए. हालांकि अरब देशों में इस धर्म को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है.

क्यों हो रहा है विरोध?
अब सवाल ये है कि आखिर इस धर्म का विरोध क्यों हो रहा है. तो आपको बता दें कि हाल ही में मिस्र में अल-अजहर के सर्वोच्च इमाम अहमद अल तैय्यब ने इस नए धर्म को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि जो लोग ईसाई, यहूदी और इस्लाम के एकीकरण का आह्वान कर रहे हैं, वे आकर कहेंगे कि उन्हें सभी बुराइयों से छुटकारा मिल जाएगा. लेकिन यह बात जान लीजिए कि दूसरे धर्मों का सम्मान करना और उन्हें मानना ​​दो अलग-अलग बातें हैं. उनके मुताबिक सभी धर्म के लोगों को एक साथ लाना संभव नहीं है. मिस्र के कुछ पादरियों ने भी अब्राहमी धर्म के अस्तित्व पर विरोध जताया है. यह भी कहा जा रहा है कि अब्राहमी धर्म धोखे और शोषण की आड़ में एक राजनीतिक आह्वान है.

यूएई और इजरायल का संबंध सुधार!
रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल के साथ संबंधों को सुधारने के लिए एक समझौता किया है. इसे अब्राहमी समझौता कहा जाता है. अब संयुक्त अरब अमीरात पर धर्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जा रहा है. इजरायल के साथ स्थिति सामान्य होने के बीच अब्राहमिक धर्म का विरोध करने वालों को एक बहाना मिल गया है. नए धर्म का विरोध करने के बहाने यूएई में स्थिति सामान्य करने का विरोध भी शुरू हो गया है.

तीनों धर्मों के साझा संबंध का क्या है आधार?
अब्राहमी धर्म के तहत इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्म के बीच साझा संबंध स्थापित करने की कोशिश की जा रही है. इसका आधार पैगंबर को बनाया जा रहा है. पैगंबर यानी प्रोफेट को ईश्वर का संदेशवाहक कहा जाता है. अब्राहमी यानी वैसा धर्म जो एक ईश्वर को मानता है, अब्राहम को ईश्वर का पैगंबर यानी संदेशवाहक मानते हैं. इनमें प्रमुख रूप से यहूदी, ईसाई, इस्लाम जैसे धर्म शामिल हैं. मध्य पूर्व में पनपे ये तमाम धर्म एकेश्वरवादी हैं. इसके अलावा इन धर्मों में कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो एक जैसी हैं.

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