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‘हुजूर’ कातिल का कत्ल और वादी-गवाह की हो चुकी मौत, पर 41 बरस से जिंदा है कचहरी में बेहमई गांव की तारीख

अश्वनी निगम
कानपुर देहात। चंबल की खुंखार महिला डकैत फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को कानपुर देहात के बेहमई गांव में घुसकर 21 लोगों की गोलियों से फूनकर हत्या कर दी थी। ठाकुर राजाराम ने तब फूलन, मुस्तकीम, रामप्रकाश और लल्लू के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 31 साल के बाद चार्जशीट दाखिल की। हत्याकांड की मुख्य कातिल का कत्ल हो चुका है, दर्जनों गवाहों की मौत हो गई है। बावजूद मुकदमा खत्म नहीं हुआ है। पिछले 41 सालों से केस कोर्ट में चल रहा है और बेहमई को सिर्फ तारीख-पे-तारीख मिल रही है।

लाइन पर खड़ा कर उतारा मौत के घाट
बेहमई को 14 फरवरी 1981 की तारीख नहीं भूलती है। वह एक शुभ मुहुर्त था, जब गांव के राम सिंह की बिटिया की बारात आई थी, लेकिन यह शुभ मुहुर्त बेहमई के लिए दुर्भाग्य बनकर आया था। उस वक्त के खूंखार डकैत श्रीराम-लालाराम की बेहमई गांव में बंधक बनी फूलनदेवी अपने साथ कुछ दिन पहले हुए सामूहिक दुष्कर्म का बदला लेने के लिए गैंग के साथ पहुंची थी। खबर थी कि शादी में शामिल होने के लिए श्रीराम भी आया था, लेकिन वह भाग निकला। खुन्नस में फूलन देवी शनिवार की शाम 21 लोगों को एक लाइन में खड़ा करने के बाद गोलियों से भून डाला था।

कोर्ट में दाखिल हुई थी चार्जशीट
बेहमई कांड के बाद मृतकों के परिवारवालों ने फूलन समेत दस डकैतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। नरसंहार के 31 साल बाद 25 अगस्त 2012 को कानपुर देहात की अदालत में अभियुक्तों पर चार्ज तय हुए। जिसमें मुख्य अभियुक्त फूलनदेवी की दिल्ली में हत्या कर दी गई। फूलन की मौत के बाद शेष नौ में पांच हाजिर थे, जबकि चार फरार हैं। एक अभियुक्त को अदालत ने घटना के वक्त नाबालिग करार देकर किशोर न्यायालय में मुकदमा स्थानांतरित कर दिया। शेष चार अभियुक्त- कोसा, भीखाराम, रामसिंह और श्यामबाबू के खिलाफ सुनवाई जारी है, लेकिन तमाम गवाहों और जिरह के बावजूद अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

छत पर मिली चिट्ठी से खुले थे डकैतों के नाम
15 फरवरी 1981ः अगले दिन बेहमई गांव के मरजाद सिंह को अपने घर की छत पर तीन पत्र मिले थे। उस पत्र में रामावतार, विश्राम सिंह मस्ताना, लालाराम, बृजलाल, विश्वनाथ निषाद, श्यामू उर्फ श्याम बाबू, मोती उर्फ काटू, रामकेश , रतिराम, बालादीन निषाद, राम सिंह, छोटेलाल निषाद समेत 12 डकैतों के नाम लिखे थे। इसी पत्र के आधार पर पुलिस ने अपनी तफ्तीश आगे शुरू की। 3 मार्च को पहली गिरफ्तारी रामकेश की हुई थी। उसने अन्य 10 डकैतों के नाम बताए थे। 3 मार्च 1981 से 6 अप्रैल 1981ः फूलन पुलिस के हाथ नहीं लग रही थी। रामकेश के पकडे जाने के बाद पुलिस ने डकैतों के खात्मे का अभियान छेड़ दिया।

13 फरवरी 1982 को फूलन ने किया सरेंडर
7 अप्रैल 1981 तक 11 डकैतों को पुलिस ने अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया। 7 अप्रैल 1981ः बेहमई कांड में सबसे पहले पकड़े गए आरोपी डकैत रामकेश के खिलाफ कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 24 नवंबर 1982ः अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे। सबके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी। 13 फरवरी 1983ः मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कहने पर फूलन ने अपने गैंग के 10 लोगों के साथ सरेंडर कर दिया। तब बेहमई कांड को दो साल पूरे हो चुके थे।

1986 में आ जाता फैसला
फूलन 11 साल के लिए जेल भेजी गई थी। एडवोकेट गिरीश नरायण दुबे बताते हैं, फूलन चूंकि ग्वालियर जेल में थी। वहां उसके खिलाफ वारंट भेजा जाता तो वहां के अधिकारी उसे तामील नहीं करवाते। कारण फूलन न तो गिरफ्तार हुई थी न ही हाजिर हुई थी। प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि उनकी फाइल अलग कर दी जाती। ताकि अन्य लोगों का मामला ट्रायल में चला जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यदि ऐसा हुआ होता तो मामले में फैसला 1986 तक आ जाता।

6 जून को सुनवाई
बेहमई सामूहिक नरसंहार के मुकदमें में स्पेशल जज डकैती कोर्ट में 24 मई को बहस की तारीख नियत की गई थी। दोपहर तक इंतजार के बाद एक बार फिर इस मामले में तारीख बढ़ गई। अब कोर्ट ने बचाव पक्ष की बहस के लिए 6 जून की तारीख मुकर्रर की है। बेहमई निवासी महिला श्रीदेवी बताती हैं कि, उनके पति, देवर समेत घर पर मजदूरी कर रहे छह लोगों को फूलन देवी उठा ले गई। गांव के बाहर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। श्रीदेवी बताती हैं, इस मुकदमें के वादी राजाराम, राम सिंह व अधिकांश गवाहों की मौत हो चुकी है।

दो साल पहले टल गया था फैसला
मूल केस डायरी न होने का पेंच फंसने से दो साल पहले फैसला टल गया था। इसका निस्तरण होने के बाद अभियोजन की ओर से दूसरी बार बहस हो चुकी है, लेकिन बचाव पक्ष की बहस में लगातार गतिरोध बना है। 24 मई को कोर्ट में आरोपित विश्वनाथ उपस्थित हुआ। जबकि श्याम बाबू का हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। जबकि आरोपी पोसाएक बार फिर से कोर्ट में पेश नहीं हुआ। बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने बताया कि अब कोर्ट ने बहस जारी रखने के लिए 6 जून की तारीख नियत की है।

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