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Mahoba: भगवान गोवर्धन नाथ जी को मनाने पहुंचे देवराज इंद्र

सौरभ तिवारी, महोबा

नृप मलखान सिंह भए अवतारी, जाते वृंदावन भई चरखारी,, उपरोक्त गीत ऐसे ही नहीं बना बल्कि लीला धारी भगवान् श्रीकृष्ण की लीलाओं को जिस तरह से चरखारी में साकार कर के दिखाया जाता है। वैसा अन्यत्र कहीं और देखने को नहीं मिलता, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मेला सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ जी आज भी जीता जागता प्रमाण है। जहां पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में से एक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली में धारण करके समूचे ब्रज क्षेत्र को इंद्र की अति बारिश से बचाकर गोवर्धन पर्वत के नीचे समूचे ब्रज वासियों के साथ गोवंश को भी सुरक्षित रखकर समूचे ब्रज क्षेत्र को इंद्र के प्रकोप से बचाकर इंद्र के घमंड को जिस तरह से भगवान गोवर्धन नाथ जी ने चूर किया। उसका साक्षात निरूपण चरखारी के श्री गोवर्धन नाथ जी मेला में आज भी देखने को मिलता है। इसी क्रम में देवराज इंद्र नगर चरखारी के सदर मंदिर में हाथ जोड़कर भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना करने के लिए मेला परिसर में सदर बाजार की मुख्य सड़क से होते हुए वी पार्क से पचराहा होते हुए मेला परिसर पहुंचे। जहां पर उन्होंने भगवान गोवर्धन नाथ जी से क्षमा याचना करने के साथ गोवर्धन पर्वत को उतारने के लिए निवेदन किया। भगवान श्री कृष्ण की उपरोक्त लीला की झांकी आज मेला परिसर में जीवंत हो उठी। जहां देवराज इंद्र ने भगवान गोवर्धन नाथ जी से प्रार्थना की। वहीं भगवान बलभद्र ने भी इंद्र का घमंड चूर हो जाने पर अपने धाम पर पुनः वापस जाने की तैयारी कर ली। मेला परिसर में देवराज इंद्र की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए आज भगवान गोवर्धन नाथ जी गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली से उतार देंगे और भगवान वासुदेव (बलभद्र भगवान) अपने मंदिर वासुदेव मंदिर में पुनः वापस आ जाएंगे। सदर मंदिर से देवराज इंद्र की सवारी के साथ में नगर पालिका अध्यक्ष मूलचंद, अनुरागी मनोज पाठक एवं नगर के अनेकों गणमान्य लोग साथ में मौजूद रहें। मेला परिसर में देवोत्थान एकादशी को समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र की कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं भगवान गोवर्धन नाथ जी की पूजा के लिए उनकी परिक्रमा के लिए मेला परिसर में हजारों की संख्या में आकर भगवान गोवर्धन नाथ जी की पूजा अर्चना एवं कार्तिक गीत गाते हुए मेला के विहंगम दृश्य को प्रतिपादित करती हैं।

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