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मुंबई के गरवारे संस्थान में हिंदी दिवस पर परिचर्चा का आयोजन

अंकित साह/मुंबई

हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर मुंबई विश्वविद्यालय के गरवारे इंस्टिट्यूट में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा का विषय था हिंदी भाषा और रोजगार। अकसर देखा जाता है की हिंदी भाषा में अगर आपने अध्ययन किया है तो आप अपने भविष्य में रोजगार को लेकर हमेशा संशय में रहते हैं। परिचर्चा के दौरान इसी संशय को दूर करने का प्रयास किया गया। इस परिचर्चा को संबोधित करते हुए गरवारे संस्थान के संचालक डॉ. केयूर कुमार नायक ने कहा कि, हिंदी भाषा और हिंदी भाषी लोगों में आज भी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज भी हिंदी भाषी अपने वरिष्ठों का पैर छूकर सम्मान करते हैं। महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि अभिलाष अवस्थी ने बताया कि आज हिंदी भाषा के दम पर देश के बड़े-बड़े न्यूज चैनलों में लोग काम कर रहें हैं। आज भी हिंदी फिल्में दुनिया में सबसे ज्यादा देखी जाती हैं। आज हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है। यह हिंदी का ही असर है कि ज्यादातर टीवी या ओटीटी पर आने वाली विदेशी और अन्य भाषाई फिल्मों का हिंदी में अनुवाद होने लगा है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी मार्गदशकों ने अपने-अपने अनुभव को साझा करते हुए हिंदी में रोजगार की कोई कमी नहीं इस पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वक्तृत्व प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमे गरवारे के हिंदी पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। स्पर्धा के निर्णायक मंडल में शामिल वरिष्ठ स्तंभलेखक राजेश विक्रांत, वरिष्ठ पत्रकार अभय मिश्रा और धर्मेंद्र पांडेय ने प्रथम पुरस्कार कृष्णा शर्मा को दिया। द्वितीय पुरस्कार मृणाली घाघ और तृतीय पुरस्कार संयुक्त रूप से साखी गिरी और राधा रानी को दिया गया। इस कार्यक्रम में गरवारे शिक्षण संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग के समन्वयक सैयद सलमान, अध्यापकगणों में वागीश सारस्वत, दीपा सिंह, एडवोकेट विजय सिंह सहित वरिष्ठ पत्रकार विजय सिंह, जयप्रकाश सिंह, रत्नेश सिंह, पूर्व बीएमसी शिक्षण अधिकारी राजदेव यादव, क्राइम रिपोर्टर संतोष पांडे, लक्ष्मी यादव, सैयद इरफान, अरुण मिश्रा, पूर्व छात्र अंकित साह, सुनील सावंत, पुरुषोत्तम कनोजिया, मेघा पटैरिया, प्रीति मिश्रा, सुरेंद्र सिंह, अदिति झा, संदीप गुप्ता और वर्तमान में गरवारे हिंदी पत्रकारिता के विद्यार्थी मृणाली घाघ, मोनल भदौरिया, कृष्णा शर्मा, साखी गिरी, अदिति झा, राधारानी जैस्वाल और संदीप गुप्ता सहित कई हिंदी प्रेमी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत वंदना सिंह और साखी गिरी की सरस्वती वंदना से हुई। संचालन विनय सिंह ने किया। राष्ट्रगान के साथ इसकी समाप्ति हुई।

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