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dir="ltr" lang="en-US" prefix="og: https://ogp.me/ns#" > ‘कयामत की घड़ी’ ने धरती पर मानवता के अंत की कर दी बड़ी भविष्यवाणी, कभी भी हो सकता है विश्व युद्ध का ऐलान, जानें 77 साल के बाद फिर क्यों बने परमाणु बम से हमले के हालात - Astitva News
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‘कयामत की घड़ी’ ने धरती पर मानवता के अंत की कर दी बड़ी भविष्यवाणी, कभी भी हो सकता है विश्व युद्ध का ऐलान, जानें 77 साल के बाद फिर क्यों बने परमाणु बम से हमले के हालात

नई दिल्ली। क्या खत्म होने जा रही है दुनिया…कल्पना कीजिए आप जब अपने परिवार के साथ बैठकर इंजॉय कर रहे हो तभी एक तेज धमाके के साथ सब कुछ तहस-नहस हो जाए चारों तरफ चीख-पुकार मत जाए आपकी आंखों के सामने लोग तड़पते हुए दिखाई दें। आप चाहते हुए ना तो किसी को बचा पाए और नाम उसकी मदद कर पाएं। वह मंजर क्या होगा ये तो महज एक कल्पना है। लेकिन सोचिए अगर दुनिया में परमाणु युद्ध छिड़ जाए तो क्या इससे अलग मंजर होगा। आज से 77 साल पहले जब परमाणु बम जापान के दो शहरों पर गिरे थे, तो मौत का तांडव पूरी दुनिया ने देखा था। हजारों-लाखों लोग तड़प-तड़पकर अपनों के सामने दुनिया छोड़कर चले गए थे और जो बचे उन्हें ऐसी बीमारियों ने घेरा कि मौत जिंदगी से ज्यादा प्यारी लगने लगे। कुछ उसी तरह के हालात अब बनते दिखाई दे रहे हैं।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा के साथ ही नॉर्थ कोरिया और यूएस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। 24 घंटे में चार बैलेसक टेस्ट के बाद नॉर्थ कोरिया और यूएस के बीच तनाव बढ़ा है। रूस और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। ईरान और सऊदी अरब के बीच युद्ध के हालात बन रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच पीओके को लेकर एक बार फिर उथल-पुथल शुरू हो गई है। सीधे तौर पर पूरी दुनिया में अशांति अस्थिरता और एक दूसरे की जान लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

डूम्स डे वॉच यानी कयामत की घड़ी का दावा है की मानवता के अंत का समय नजदीक आ गया है। परमाणु युद्ध की आहट तेज होती जा रही है और अगर परमाणु युद्ध हुआ तो दुनिया भर में 36 करोड़ लोगो की जान जाएगी। धरती पर मानवता का अंत का अनुमान लगाने वाली कयामत की घड़ी की निगरानी द बुलेटिन ऑफ द एटेमिक साइंसेज करती है उसका दावा है की दुनिया में परमाणु युद्ध के हालात बनते जा रहे हैं। दो साल पहले ये घड़ी रिसेट की गई थी। इस घड़ी को 1947 में स्थापित किया गया था। जिसके बाद से इसे 24 बाद रिसेट किया जा चुका है।

इस घड़ी को हाल ही में 2020 में रिसेट किया गया था, जब बुलेटिन ने मिनट वाली सुई को आगे बढ़ाया था। घड़ी के अनुसार ‘मध्यरात्रि’ का समय मानवता के लिए ‘कयामत की घड़ी’ होगी।वैसे पुतिन के युद्ध ने अभी तक घड़ी की मिनट वाली सुई को मध्यरात्रि के करीब नहीं बढ़ाया है। बुलेटिन के साइंस और सिक्योरिटी बोर्ड ने वर्तमान संघर्ष की निंदा की है। डियाज़-मॉरिन ने अपने आर्टिकल में संभावित परमाणु युद्ध के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने अनुमान लगाया कि कुछ मिनट के भीतर ही सैकड़ों या हजारों बम विस्फोट हो जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिका-रूस के बीच का युद्ध सीधे तौर पर कम से कम 36 करोड़ लोगों की जान पर हावी होगा।

रूस और यूक्रेन युद्ध पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के अलावा पत्रकारों का कहना है कि, यूं तो अभी बहुत घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन जिस तरह से दुनिया के हालात बन रहे हैं इसमें कोई शक नहीं एक छोटी सी चिंगारी पूरी दुनिया में नशे परमाणु युद्ध की विभीषिका ला सकती है बल्कि दुनिया की खात्मे की पटकथा भी लिख सकती है। ऐसे में जरूरत है देशों के बीच चल रहे तनाव को कम करने की। पत्रकारों का कहना है कि, रूस, अमेरिका, चीन और भारत को मिलकर समाधान निकालना होगा। युद्ध जितने दिन अधिक चलेगा, हालात और खराब होते जाएंगे।

 

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