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हमीरपुर के कल्लू और चित्रकूट की भूरी की ‘सक्सेसफुल LOVE STORY’ बैंड बाजे और मंगलगीत के बीच दोनों की हुई शादी

हमीरपुर। रविवार का दिन बड़ा खास रहा। जहां एक कुत्ते ने अपनी जान देकर अपने मालिक की जान बचा ली तो वहीं इंसानों ने डॉगी कल्लू और डॉगी भूरी की शादी धूमधाम के साथ करा दी। बैंडबाजे के धुन में बराती थिरके तो महिलाओं ने मंगलगीत गाकर कल्लू और भूरी की प्रेम कहानी को सक्सेसफुल बना दिया। दोनों की शादी को देखने के लिए दूर दराज से लोग दोनाली बंदूक की ठसक के साथ पहुंचे। खास बात है इन दोनों का रिश्ता चित्रकूट में तय हुआ था।

एक-दूसरे का समधी बताया
मनासर बाबा शिव मंदिर सौंखर के महंत द्वारिका दास और बजरंगबली मंदिर परछछ के महंत अर्जुन दास ने अपने पालतू कुत्ते कल्लू और कुतिया भूरी की शादी कराकर खुद को एक-दूसरे का समधी बताया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार रस्में निभाई गईं। बाकायदा बरात की निकासी, द्वारचार, भांवरे, कलेवा और विदाई भी हुई। इस अनोखी शादी में आसपास के गांव के लोग दोनाली बंदूक के साथ पहुंचे। शादी से पहले भोजन किया। डॉग और डॉगी की शादी के बाद उन्हें नेग देने के साथ आर्शीवाद भी दिया।

दोनों मंहत ने तय किया रिश्ता
हमीरपुर जनपद के सुमेरपुर स्थित महेश्वरी बाबा का ऐतिहासिक मंदिर है। यहां पर त्यागी जी महाराज उर्फ द्वारिकादास महाराज रहते हैं। महाराज जी ने बताया कि, उन्होंने बचपन से कल्लू (डॉग) को पाला है। वह हमारे साथ आश्रम में ही रहता है। मंदिर की रखवाली में हमेशा तैनात रहता है। महाराज जी के मुताबिक, तीन माह पहले चित्रकूट में परछछ आश्रम के संत अर्जुनदास से मुलाकात हुई थी। वह अपने साथ भूरी नाम की डॉगी को लेकर आए थे। कल्लू और डॉगी को आश्रृम में रखा गया।

1100 रुपए देकर तिलक भी कर दिया
त्यागी महाराज पे बताया कि, परछछ आश्रम के संत अर्जुनदास से हमने अपनी डॉगी भूरी की शादी, हमारे कल्लू डॉग से करने को कही। पहले तो मैंने मजाक माना। फिर उन्होंने गंभीरता से इस पर विचार करने को कहा। हमने कल्लू और भूरी की शादी करने का निर्णय ले लिया। द्वारिकादास महाराज ने बताया कि भूरी पक्ष से आए कुछ लोगों ने 1100 रुपए देकर तिलक भी कर दिया। इसके बाद शादी की तारीख तय हो गई। दोनों महंतों ने अपने शिष्यों, शुभचिंतकों को कार्ड भेजकर विवाह समारोह में बुलाया।

महंत ने बरातियों की आगवानी
बरात मनासर बाबा शिव मंदिर से गाजे-बाजे के साथ 5 जून 2022 को निकली। परछछ गांव में बजरंगबली मंदिर के महंत ने बरात की अगवानी की। द्वारचार, चढ़ावा, भांवरों, कलेवा की रस्म पूरी कराकर बरात को ससम्मान विदा किया। दोनों को चांदी के जेवरात भी पहनाए गए। बरातियों के लिए कई तरह के व्यंजन तैयार कराए गए। बरात में दोनों पक्षों से तकरीबन 500 लोग शामिल हुए। भोजन में पकवान बनें। बराती और जनातियों ने भोजन कर डॉग-डॉगी को गिफ्ट भी दिए।

25 किमी दूर से आई बारात
परछछ में बारातियों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। हो गई है। टेंट लगाया गया है। मंडप भी तैयार है। ग्रामीण मानसिंह ने बताया कि सुमेरपुर आश्रम से 25 किमी दूर से बारात आई है। खाने के लिए पनीर, कालाजाम, और लड्डू की विशेष व्यवस्था है। बैंड बाजे का भी खास इंतजाम है। उन्होंने बताया कि करीब 400 जनातियों को न्यौता भेजा गया है। साथ ही, 100 बारातियों के खानपान का इंतजाम किए गए थे।

सभी जीवों का महत्व
महंत द्वारिका दास ने बताया, बचपन से पाला है तो अब कुत्ता हमारे परिवार का सदस्य है। समाज को एक संदेश है कि सभी जीवों का महत्व है, जिनसे हमारे आत्मीय संबंध बन जाते हैं। वहीं, महंत अर्जुन दास ने कहा कि द्वारिका दास से उनकी काफी पुरानी मित्रता है। अब मित्रता को रिश्तेदारी में बदलने के लिए हमारा परिवार तो है नहीं। बस इन्हीं जीवों को बचपन से पाला। दोनों जीवों का विवाह करा मित्रता को रिश्ते में बदलकर समधी बन गए हैं।

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