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पूर्व पीएम अटल बिहारी वापजेई के सहपाठी थे कविताओं के दिवाने, कॉलेज से सीखा था राजनीति का हुनर,गंगा किनारे लगती थी मंडली

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई छात्र जीवन से ही प्रतिभा के धनी थे। अटल बिहारी वाजपेई नाम के अनुरूप ही मजबूत इच्छा शक्ति और अटल विचारों ने उनके व्यक्तित्व को निखारा था। पूर्व प्रधानमंत्री ने कानपुर के डीवीए कॉलेज से राजनीति शास्त्र से मास्टर ऑफ आर्ट (एमए) की डिग्री ली थी। डीएवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्होने छात्र राजनीति में भी खासी रूचि ली थी। उन्होने यहीं से ही राजनीति का हुनर भी सीखा था। इस बात का अंदाजा किसी को भी नहीं था कि साधारण सा दिखने वाला छात्र एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के अंदर एक कवि बचपन से ही छिपा हुआ था। बात-बात पर शब्दों को कविताओं की माला में पिरोकर पेश करने का हुनर था। कानपुर के डीएवी कॉलेज से जुड़ी यादें आज भी ताजा है। उन्होने अपनी वीर रस और श्रंगार रस की कविताओं से अपने सहपाठियों के साथ ही साथ प्रोफेसरों को भी अपना दिवाना बना लिया था। कॉलेज में होने वाले सांस्कृतिक मंचों पर अटल बिहारी वाजपेई कविताओं की झड़ी लगा देते थे। उनकी कविताओं पर पूरा कॉलेज झूम उठता था।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई डीएवी कॉलेज के हॉटस्टल में रहते थे। शाम के वक्त गंगा किनारे सिल बट्टे पर भांग पीसी जाती थी। इसके बाद दोस्तों की मंडली लगती थी, और अपने दोस्तों को वीर रस और श्रंगार रस की कविताएं सुनाते थे। दोस्तों की मंडली देश भक्ति गानो से गंगा के किनारे को और भी खुशनुमा कर देते थे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने सन् 1945 में कानपुर के डीएवी कॉलेज में एडमीशन लिया था। डीएवी कॉलेज में बने हॉस्टल के रूम नंबर 104 में रहते थे। 1947 में राजनीति शास्त्र से एमए की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होने अपने पिता के साथ एलएलबी की पढ़ाई शुरू की थी। उनके पिता भी बेटे के साथ हॉस्टल में रहते थे। लेकिन सक्रिय राजनीति में कूदने के बाद एलएलबी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।

अटल बिहारी वाजपेई को छात्र जीवन से ही देश के प्रति गहरा बेहद लगाव था। देश की अजादी के बाद उन्होने राजनीति की तरफ कदम बढ़ा दिए थे। प्रतिदिन संघ की शाखा में जाते थे। इसके साथ ही अपने व्यंग विचारों वाली लेखनी से समाज और देश को सही दिशा दिखाने का काम शुरू कर दिया था। राजनीति में वैचारिक मतभेद रखने वालों को बड़ी ही सहजता से अपनी बात को समझाने का हुनर था।

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