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मध्य प्रदेश के इस इलाके में नहीं रहते इंसान, अजगरों ने बना ली बस्ती, 7 एकड़ में सैकड़ों अजगर

जबलपुर। जबलपुर से करीब 120 किलोमीटर दूर मंडला जिले में एक ऐसी बस्ती है, जहां इंसान नहीं रहते। रहते हैं तो सिर्फ अजगर। जी हां हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के मंडला जिले के अजगर दादर की। यहां सात एकड़ के एक क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में अजगर हैं। इंसानों की बस्ती भी इस अजगरों की बस्ती के पास है। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि अजगरों की बस्ती में इंसानी बस्ती का दखल किया जाए।

धूप सेकने निकलते हैं बाहर
मंडला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर ककैया गांव में सात एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्थान की गहराई 40 फीट है, जो पूरी तरह से खोखली है। यहां जमीन से निकलकर अजगर धूप सेकने आते हैं। एक जगह इतनी संख्या में मौजूद अजगरों को देखने के लिए दूर-दूर से सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

 

कैसे बनी अजगरों की बस्ती
बताया जाता है कि साल 1926 में इस इलाके में जबरजस्त बाढ़ आई थी, जिसकी वजह से ये इलाका पूरा खोखला हो गया था। बाद में जमीन के नीचे कई जीव-जंतुओं चूहों ने अपना बसेरा बना लिया। अजगर को आलसी बताया जाता है, वो शिकार के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना चाहता है। ऐसे में अजगरों को इस क्षेत्र में चूहे-वगैरह अन्य जीव-जंतु आसानी से मिलने लगे। धीरे-धीरे अजगरों की संख्या यहां बढ़ने लगी, जिसके बाद लोगों ने इस जगह को अजगर दादर का नाम दे दिया। यहां चूहे, गिलहरी और खरगोश भी रहते हैं, जिनका शिकार कर अजगर अपना पेट भरते हैं।

20 फीट लंबे अजगर
इस बस्ती में 4 फिट से लेकर 20 फिट के अजगर देखे जा सकते हैं। ठंड के समय इनका प्रजनन काल होता है जिसके चलते सुबह से दोपहर तक अजगर धूप सेंकने के लिए बाहर आते हैं। जिनको आसानी दे देखा जा सकता है। यही कारण है कि क्षेत्र में सैलानियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

अजगरों की पूजा
इन अजगरों में आसपास के ग्रामीणो की गहरी धार्मिक आस्था है। ये ग्रामीण सालों से विशेष पर्वों में इन अजगरों की पूजापाठ करते चले आ रहे है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अजगरों से खतरा महसूस नहीं होता और अजगरों ने उन लोगों को कभी नुकसान भी नहीं पहुंचाया। यही वजह है कि ग्रामीण उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद सावधान रहते हैं।

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