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पानी नहीं ‘जहर’ पी रही 80 फीसदी भारत की आबादी, सामने आई सच्चाई तो देशभर में मच गई ‘खलबली’

नई दिल्ली। पानी इंसान की जिंदगी है। एक इंसान दिन में करीब 2 से 3 लीटर पानी पी जाता है। वहीं जब तक वह जिंदा रहता है, तब तक करीब 75 हजार लीटर पानी पीता है। इंसान के शरीर में पानी की मात्रा 66 फीसदी होती है। दिमाग में 75, हड्डियों में 25 और खून में 83 फीसदी पानी होता है। इंसान बिना भोजन के सात दिन ता वहीं बिना पानी के महज एक दि नही जिंदा रह सकता है। लेकिन देशभर की 80 आबादी प्रदूषित पानी पी रही है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि संसद में सरकार ने इस हकीकत से रूबरू कराया है।

सरकार ने दी जानकारी
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि देश के लगभग सभी राज्यों के ज्यादातर जिलों के हिस्सों में ग्राउंड वाटर में जहरीली धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई हैं। सरकार ने बताया है कि देश के 209 जिलों में ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और 491 जिलों में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली है। इनके अलावा सीसा, यूरेनियम, क्रोमियम और कैडमियम की मात्रा भी ग्राउंड वाटर में ज्यादा मिली है। केमिकल युक्त पानी पीने से कैंसर और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

रिहायशी इलाकों के जारी किए आंकड़े
राज्यसभा में सरकार ने उन रिहायशी इलाकों की संख्या का आंकड़ा भी दिया है, जहां पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित हो चुके हैं। इसके मुताबिक, 671 इलाके फ्लोराइड, 814 इलाके आर्सेनिक, 14079 इलाके आयरन, 9930 इलाके खारापन, 517 इलाके नाइट्रेट और 111 इलाके भारी धातु से प्रभावित हैं। जिसके कारण यहां का पानी पीने योग्य नहीं रहा। जो लोग इस पानी को पी रहे हैं, वह कई जटिल बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

शहरों से ज्यादा गंभीर समस्या गांवों में
सरकार ने माना है कि, शहरों से ज्यादा गंभीर समस्या गांवों में है। क्योंकि भारत की आधी से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है। यहां पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी हैंडपंप, कुआं या नदी-तालाब होते हैं। यहां सीधे ग्राउंड वाटर से ही पानी आता है। इसके अलावा इस पानी को साफ करने का कोई तरीका भी गांवों में आमतौर पर नहीं होता है। लिहाजा, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं।

आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा
25 राज्यों के 209 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। 29 राज्यों के 491 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में आयरन की मात्रा 1 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। 21 राज्यों के 176 जिले ऐसे हैं, जहां के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में सीसा तय मानक 0.01 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है।

कैडमियम की मात्रा ज्यादा पाई गई
11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में कैडमियम की मात्रा 0.003 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा पाई गई है। 16 राज्यों के 62 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में क्रोमियम की मात्रा 0.05 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा मिली है। वहीं, 18 राज्यों के 152 जिले ऐसे हैं जहां के कुछ हिस्सों में ग्राउंट वाटर में यूरेनियम 0.03 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा पाया गया है।

स्वास्थ्य पर पड़ेगा प्रभाव
जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के मुताबिक, देश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी को पानी ग्राउंड वाटर से ही मिलता है। लिहाजा, ग्राउंड वाटर में खतरनाक धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा होने का मतलब है कि पानी ’जहर’ बन रहा है। ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक, आयरन, सीसा (लीड), कैडमियम, क्रोमियम और यूरेनियम की मात्रा तय मानक से ज्यादा होने का सीधा-सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है. और कई गंभीर बीमारियों की चपेट में इंसान आ सकता है।

सरकार ने शुरू की कई योजनाएं
संसद में केंद्र सरकार ने बताया कि पानी राज्य का विषय है, इसलिए लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्यों की है। हालांकि, केंद्र सरकार भी पीने का साफ पानी मुहैया कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है। 21 जुलाई को सरकार ने लोकसभा में बताया था कि अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन शुरू किया गया था। इसके तहत 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को नल के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति की जाएगी।

2026 तक का रखा लक्ष्य
सरकार के जवाब के मुताबिक, अभी तक देश के 19.15 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.81 करोड़ परिवारों के घर पर नल से पानी पहुंचाया जा रहा है.। इलके अलावा अक्टूबर 2021 में केंद्र सरकार की ओर से अमृत 2.0 योजना शुरू की गई है। इसके तहत अगले 5 साल में यानी 2026 तक सभी शहरों में नल से पानी पहुंचाने का टारगेट तय किया गया है।

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