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आखिरकार इनके चलते ‘फ्लॉप’ हो गई शशि थरूर की ये थ्योरी, कांग्रेस के नए चीफ चुने गए सिनेमा थियेटर में नौकरी करने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे

नई दिल्ली। लगातार कई चुनाव में मिली पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी 2024 को लेकर रणनीति बनाने में जुटी है। राहुल गांधी जहां भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं तो वहीं बुधवार को पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया। बुधवार को कांग्रेस के नए चीफ को लेकर मतगणना का कार्य शुरू हुआ और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने प्रतिद्वंद्वी और तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर को बड़े अंतर से हरा दिया है। जीत के बाद खड़गे ने कहा कि, आजादी के 75 साल के इतिहास में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लगातार देश के लोकतंत्र को मजबूत और संविधान की रक्षा की। उन्होंने आगे कहा, ‘लोकतंत्र खतरे में है और संविधान पर हमला बोला जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर सांगठनिक चुनाव कराकर देश के लोकतंत्र को मजबूत किया है। उधर, मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत पर शशि थरूर ने ट्वीट के जरिए शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि, ‘मित्रों, कांग्रेस का अध्यक्ष बनना बहुत सम्मान और जिम्मेदारी की बात है। इस कार्य में खड़गे जी की सफलता की कामना करता हूं। 1072 सहयोगियों का समर्थन प्राप्त करना एवं भारत भर में कांग्रेस के इतने शुभचिंतकों की आशाओं व आकांक्षाओं को आगे बढ़ाना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी।

कांग्रेस के 137 साल के इतिहास में छठी बार हुआ चुनाव
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर 2022 को विभिन्न राज्यों में बने पोलिंग बूथ पर वोट डाले गए थे.। 9500 से कुछ ज्यादा डेलिगेट ने वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। कांग्रेस के चुनाव पदाधिकारियों ने 96 फीसद तक वोटिंग होने का दावा किया था। बुधवार सुबह कांग्रेस कार्यालय में काउंटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सभी प्रदेशों से आए मतपत्रों को एकसाथ मिलाकर मतगणना की गई थी। 24 साल बाद गांधी परिवार के बाहर कोई नेता देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष चुना गया है। कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे को जहां 7897 वोट मिले, वहीं शशि थरूर को करीब 1000 वोट मिले। इस तरह खड़गे ने करीब 8 गुना ज्यादा वोट से थरूर को हरा दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले दूसरे दलित नेता हो गए हैं। इससे पहले 1971 में जगजीवन राम के कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। बता दें कि कांग्रेस पार्टी के 137 साल के इतिहास में छठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है।

खड़गे का 1942 को हुआ था जन्म
21 जुलाई 1942 को जन्मे मल्लिकार्जुन खड़गे राजनीति में आने से पहले वकालत के पेशे में थे। उनका जन्म कर्नाटक में गरीब परिवार में हुआ था और उन्होंने स्नातक और वकालत की पढ़ाई की है। 80 वर्ष के खड़गे महादलित समुदाय से आते हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7 साल की उम्र में अपनी मां और परिवार के कुछ सदस्यों को खो दिया था। उन्हें सांप्रदायिक तनाव की वजह से अपने जन्मस्थान को छोड़कर बगल के जिले कलबुर्गी जिसे पहले गुलबर्ग कहा जाता था शिफ्ट होना पड़ा था। उन्होंने पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए सिनेमा थियेटर में नौकरी भी की थी। पिछले 12 चुनावों में वह 11 बार जीत चुके हैं। वह तीन बार मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। वह 6 भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। खड़गे ने 13 मई 1968 को राधाबाई से शादी की और उनकी दो बेटियां और तीन बेटे हैं।

1976 में पहली बार बनाए गए मंत्री
1969 में खड़गे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और गुलबर्गा सिटी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। 1976 में खड़गे कर्नाटक सरकार में प्राथमिक शिक्षा राज्य मंत्री बनाए गए। 1978 में वह दूसरी बार गुरमीतकल निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए और ग्रामीण विकास और पंचायत राज राज्य मंत्री नियुक्त किए गए। 1980 में वह गुंडू राव कैबिनेट में राजस्व मंत्री बने। 1983 में तीसरी बार गुरमीतकल से कर्नाटक विधानसभा का चुनाव जीता। 1985 में वह चौथी बार गुरमीतकल से कर्नाटक विधानसभा जीते और उन्हें कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष का उप नेता नियुक्त किया गया। 1989 में वह गुरमीतकल से पांचवीं बार भी जीतने में कामयाब रहे।

1914 में जीता था लोकसभा का चुनाव
इसी तरह जीतते-जीतते 2004 में खड़गे लगातार आठवीं बार विधानसभा चुनाव जीते थे। 2005 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2008 में वह लगातार नौवीं बार चीतापुर से विधानसभा के लिए चुने गए। खड़गे को 2008 में दूसरी बार विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था। 2009 में खड़गे ने गुलबर्गा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा और अपना लगातार दसवां चुनाव जीता। मोदी लहर होने के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में खड़गे ने गुलबर्गा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 13,404 से अधिक मतों से हराया।

2019 के लोकसभा चुनाव में मिली हार
खड़गे 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए थे। भाजपा के उम्मीदवार जी माधव ने उन्हें करीब 95 हजार वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद 12 जून 2020 को खड़गे कर्नाटक से राज्यसभा के लिए चुने गए। फरवरी 2021 में खड़गे को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया। उन्होंने यूपीए सरकार में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में श्रम एवं रोजगार, रेलवे और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग संभाला है। खड़गे को गांधी परिवार का करीबी बताया जाता है। खड़गे ने इंद्रीरा गांधी, संजय गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ काम किया है। अगले वर्ष कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस खड़गे के जरिए जीत की बुनियाद रखेगी।

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