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अलकायदा चीफ के बाद मारा गया 30 लाख डॉलर का इनामी उमर खालिद, वाघा बॉर्डर हमले के आरोपी आतंकी के ‘डेथ वारंट’ पर जानिए किसने किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली। अलकायदा चीफ अल जवाहिरी की मौत के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान का कमांडर उमर खालिद खुरासानी उर्फ अब्दुल वली मोहम्मद एक विस्फोट में मारा गया। रविवार को खालिद कार में अपने साथी मुफ्ती हसन और हाफिज दौलत खान के साथ पक्तिका प्रांत में किसी ठिकाने पर जा रहा था। तभी जोरदार धमाके में कार के परखच्चे उड़ गए और तीनों आंतकवादियों की मौत हो गई। अमेरिका ने खालिद पर 30 लाख डॉलर का इनाम रखा था।

अफगान अधिकारी के हवाले से कहा कि, टीटीपी का शीर्ष कमांडर उमर खालिद खुरासानी उर्फ अब्दुल वाली मोहमंद अपने दो साथियों के साथ कार में सवार होकर कहीं जा रहा था। कार जैसे ही पकतिका प्रांत में बरमाल जिले के शरकी गांव पहुंची, तभी वह बारूदी सुरंग की चपेट में आ गई और जोरदार धमाके से उसके परखच्चे उड़ गए। कार में सवार टीटीपी का कमांडर खालिद और उसके दोनों साथी मारे गए। हालांकि हमला कैसे और किसने किया, इसके बारे में तालिबान सरकार की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई। जबकि पाकिस्तान मीडिया रिपोर्ट की मानें तो खालिद को ठिकाने लगाने के लिए पाक आर्मी ने सड़क पर बारूद बिछवाया था।

पूर्व पत्रकार और कवि उमर खालिद खुरासानी, पाकिस्तान के कराची में स्थित कई मदरसों से पढ़ाई की थी। इस खूंखार आतंकी के सिर पर अमेरिकी सरकार ने 30 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा था। उमर खालिद खुरासानी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के महमंद जिले का रहने वाला था। वह टीटीपी की महमंद शाखा का इंचार्ज भी था। पाकिस्तान मीडिया रिपोर्ट की मानें तो खुरासानी ने कम उम्र में ही जिहाद शुरू कर दिया था। वह कश्मीर में भारतीय सेना के खिलाफ भी लड़ाई में शामिल रहा। नवंबर 2014 में वाघा बॉर्डर पर होने वाले समारोह पर हमला कर उसका संगठन जमात-उल-अहरार सुर्खियों में आया था।

पाकिस्तान ने टीटीपी प्रतिबंध लगाया हुआ है। पाकिस्तान की सेना इसके खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन कर चुकी है। इस संगठन ने बीते कुछ साल में पाकिस्तान में कई बड़े धमाके किए हैं। पाकिस्तान में हिंसा रोकने के लिए टीटपी और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। खुरासानी पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत का समर्थक नहीं था। पाकिस्तान का रहने वाला उमर खालिद खुरासानी पाकिस्तान में ही कई हमलों के पीछे शामिल था। वह नहीं चाहता था कि पाकिस्तानी सरकार से टीटीपी की बातचीत हो।

उमर खालिद खुरासानी की मौत के बाद एक बार फिर अफगानिस्तान में तालिबान पर सवाल उठेंगे। टीटीपी के नेता खुद को अफगानिस्तान में सुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि उनके तालिबान से अच्छे संबंध हैं। वहीं पहली बार तहरीक-ए-तालिबान ने खुरासानी की मौत की पुष्टि की है। संगठन के प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि टीटीपी जल्द ही मौत के बारे में ज्यादा जानकारी देगा। वहीं खालिद की मौत के पीछे पाकिस्तान आर्मी चीफ का हाथ बताया जा रहा है। जानकार कहते हैं कि, तालिबान की मदद से पाक आर्मी ने खालिद को मौत के घाट उतार दिया।

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