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इस आईपीएस अफसर को हरदिन ‘ईश्वर’ देते थे दर्शन, 2005 में न जानें कहां चले गए ‘भगवान’, अब गांव में ‘गॉड’ के नाम से बनवा रहा मकान

जमशेदपुर। जमशेदपुर के एसएसपी डॉक्टर एम तमील वणन की गिनती जिंदादिल इंसान के साथ ही इमानदार पुलिस अफसर के तौर पर की जाती है। डॉक्टर तमील की जिंदगी से जुड़े किस्से से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हें। कैसे, एक दुकान में मुनीम की नौकरी करने वाले पिता ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए खूब पसीना बहाया। बेटा अफसर बने इसके लिए 15-15 दिन जागकर डबल ड्वूटी की। बेटे ने भी किताबों से दोस्ती कर अपने पिता का सपना साकार किया। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद आईपीएस बनकर देश-प्रदेश की सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। बतौर एसएसपी वह कहते हैं कि, मेरे लिए मेरे पापा ही ईश्वर थे। मैं उनके दर्शन व आर्शीवाद लेने के बाद ही घर से बाहर निकलता था। दूसरे शहर में पढ़ाई के लिए भी गया तो पापा की तस्वीर अपने साथ रखी। हालांकि मेरे गॉड 2005 को इस दुनिया से चले गए। जिसके बाद मैं और मेरी बहनें मिलकर उनके नाम से गांव में घर का निर्माण करवा रहे हैं।

कौन हैं आईपीएस डॉ एम तमील वणन
तमिल वणन मुल रूप से तमिलनाडु के पुड्डुकोट्टाई जिला के कुड्डूमियानमलाई गांव के रहने वाले हैं। मिल वणन के पिता का नाम पीएल मुत्थु करुपिया है। वणन के परिवार में चार बहन, चार भाई थे। तमिल वणन के पिता एक दुकान में क्लर्क का काम किया करते थे। उनके पविवार के सातवें नंबर तमिल वणन बचपन से पढ़ाई में अव्वल थे। तमिल वणन अपने पिता को भगवान की तरह से पूजते थे और उनके हर सपने को पूरा करने के लिए जीजान से पढ़ाई में जुट गए। पहले पीएचडी की डिग्र ली फिर सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए। आखिरकार तमिल वणन को कामयाबी मिल गई। उनका आईपीएस में सिलेक्शन हो गया।

पापा ने पीएचडी की पढ़ाई की दी इजाजत
आईपीएस तमिल वणन ने एक अखबार के साथ बातचीत के दौरान बताया कि, वर्ष 2000 में पापा का अंतिम वेतन 1800 रुपए थे। मेरे पापा ने बाहर पढ़ाने का निर्णय लिया। मेरे पापा ने शिक्षा के साथ कभी समझौता नहीं किया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के बाद पापा के सामने मैंने आगे की पढ़ाई करते हुए पीएचडी करने की इच्छा जाहिर की। तब भाई-बहन ने यह कहा कि पापा कहां से इतना पैसा लाएंगे कहीं नौकरी कर लो।मेरी इच्छा को देखते हुए पापा ने मुझे पीएचडी तक की पढ़ाई करने की इजाजत दी।

क्योंकि पापा मेरे साथ नहीं हैं
आईपीएस ने बताया कि, इसके लिए पापा दुकान में ही ओवर टाइम करने लगे। पीएचडी का फार्म भरने के लिए बड़ी मुश्किल से पापा ने मुझे 100 रुपए दी। पीएचडी खत्म हुई और मुझे यूपीएससी की परीक्षा देनी थी, मुझे अपने पापा को कुछ बनकर दिखाना था, ताकि उनकी उम्मीदें न टूटे। पापा के देहांत के बाद मैं और भी अडिग हो गया। अंततः यूपीएससी की परीक्षा पास की और आइपीएस का कैडर मिला, लेकिन मैं खुश नहीं हुआ क्योंकि मेरे साथ मेरे पापा नहीं थे। आज उन्हीं के कारण मैं इतना दूर पहुंच पाया।

पिता के निधन के बाद बने एसएसपी
जमशेदपुर एसएसपी तमिल वणन आठ भाई बहन में सातवें नंबर पर थे। उनके पिता एक दुकान में काम करते थे। सिर्फ 1800 के वेतन में पिता ने परिवार को चलाने के साथ तमील को पीएचडी कराया। लेकिन पिता के देहांत के बाद तमील एसएसपी बने। जमशेदपुर के एसएसपी डॉ एम तमील का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा है। उनके पिता काफी गरीब थे। बकौल तमील वाणन मेरे पापा आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी यादें, प्रेरणा और संघर्ष पूरे क्षेत्र की मिसाल है। पापा के संघर्ष के कारण ही तमिलनाडु के गांव में उनकी अलग पहचान है।

क्योंकि धरा के गॉड मदर एंड फादर
एसएसपी ने बताया कि, मेरे पिता पीएल मुत्थु करुपिया का स्वर्गवास वर्ष 2005 में हो गया। उस समय वे 82 वर्ष के थे। अब सारे भाई-बहन मिलकर पापा के नाम के पर घर बनवा रहे है। पापा का संघर्ष को मैं कभी नहीं भूल सकता। इतनी गरीबी में भी उन्होंने सबको का ख्याल रखा। आइ मिस यू पापा। तमिल वणन कहते हैं कि इस धरा पर माता-पिता ही भगवान हैं। मैं देश के युवा पीढ़ी से कहता हूं कि अगर आप अपने माता-पिता का ख्याल रखेंगे तो आपके जिंदगी में कोई समस्या नहीं आएगी। क्योंकि, जमीन के ईश्वर वहीं हैं।

 

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