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जोधपुर: ईद और अक्षय तृतीया के अवसर पर जोधपुर में दो पक्षों के बीच हुई हिंसा ने पूरे शहर का रूप बदल दिया है। हर तरफ हिंसा के बाद के निशान नजर आ रहे हैं। वहीं, हिंसा रुकने के बाद एक तस्वीर सामने आई जो किसी के भी मन को झकझोर दे। दरअसल, हिंसा भड़कने के बाद 7 साल की एक मासूम बच्ची उपद्रवियों के बीच फंस गई। वो अपने घर के बाहर खड़ी थी तभी कुछ युवक लाठी-डंडा लेकर निकले थे। 7 साल की बच्ची अपने पापा की दुकान के बाहर खड़ी थी। इन युवकों की नजर बच्ची पर पड़ी तो वो लाठी लेकर बच्ची की ओर दौड़ पड़े। मासूम बच्ची कुछ समझ पाती, इससे पहले ही उपद्रवियों ने लाठी से हमला बोल दिया। इसी बीच पास के किराना व्यवसायी ने ये सब देख लिया और वो अपनी जान की परवाह किए बिना उस बच्ची की ओर दौड़ पड़ा। बच्ची पर किए गए लाठी का वार व्यवसायी ने अपने ऊपर ले लिया। इसके बाद उपद्रवियों ने उस पर लाठी से कई बार वार किए। जिससे उसकी पीठ और कमर पर गंभीर चोटें आई हैं।
घटना मंगलवार सुबह करीब 11 बजे शहर के भीतरी हिस्से की है। यहां पूरा मोहल्ला, भजन की चौकी में पवन सिंघवी का मकान है। उन्हें नहीं पता था कि शहर के बाहर क्या चल रहा है। वो इससे बेफिक्र थे कि दंगे की आग उनके घर तक भी पहुंच जाएगी। 7 साल की बच्ची माननीया सिंघवी भी घर के बाहर ही खड़ी थी। स्थानीय लोगों को भनक लग चुकी थी कि कुछ लोग मोहल्ले की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में अचानक माननीया पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। लेकिन पड़ोसी दुकानदार अजय वहां देवदूत बनकर पहुंचे और बच्ची को उपद्रवियों से बचा लिया।

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