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Kanpur Violence : कानपुर हिंसा पर ‘साजिशकर्ता’ का सनसनीखेज ‘कबूलनामा’ खास मकसद के जिए जुमा का दिन मुकर्रर किया गया

कानपुर। 3 जून को हुई हिंसा को लेकर हरदिन नए-नए खुलासे होने के साथ वीडियो सामने आ रहे हैं। वहीं पुलिस भी फूल एक्शन में है और रविवार की शाम तक 29 और सोमवार की सुबह 15 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। जिसमें दंगे का मास्टरमाइंड हयाज जफर हाशमी समेत उसके तीन अन्य साथी शामिल हैं। हयाज जफर हाशमी ने पुलिस कर पूछताछ में बताया है कि, हिंसा व बवाल का दिन तीन जून इसलिए मुकर्रर किया गया था, क्योंकि इस दिन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री शहर में थे। इस हिंसा के पीछे पूरे देश को एक संदेश देने की मंशा थी।

26 को दिया बयान 27 को था जुमा
बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने 26 मई (गुरुवार) को टीवी पर विवादित बयान दिया था। उसके अगले दिन जुमा था, लेकिन नमाज के बाद लोग शांति से अपने-अपने घर लौट गए। सूत्रों के मुताबिक हयाज जफर हाशमी से जब पुलिस ने पूछा कि 27 मई को भी जुमा था, तब प्रदर्शन क्यों नहीं किया। इस पर हयात ने कहा कि तीन जून को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री शहर आने वाले थे। ऐसे में हम देश को बड़ा पैगाम देने की नियत से 3 जून की तारीख प्रोटेस्ट के लिए मुकर्रर की।

फिर भड़की आग और जमकर हुआ बवाल
हयाज जफर हाशमी ने 3 जून को लेकर पहले पूरी तैयारी कर ली थी। मुस्लिम बाहूल्य इलाकों में पोस्टर चस्पा किए गए। सोशल मीडिया में प्रोटेस्ट की जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाई। जुमे की नमाज के बाद जब हिंसा भड़की तो हयाज जफर हाशमी मौके से भाग खड़ा हुआ। उपद्रवियों ने करीब चार से पांच घंटे तक पथराव, फायरिंग और प्रेट्रोल बम फेंके। घटना में आठ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पुलिस ने बेकनगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन शुरू किया।

लिहाजा तत्काल शहर छोड़कर चले गए
पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिंसा भड़कने के कुछ ही देर बाद जफर वह उसके साथी अलग-अलग हो गए थे। थोड़ी देर बाद उनको आशंका हो गई थी कि उनका नाम मामले में आएगा। लिहाजा तत्काल शहर छोड़कर चले गए थे। मोबाइल कानपुर में ही बंद कर दिए थे। इसलिए आखिरी लोकेशन शहर की मिली थी। यूपी एसटीएम ने चारों को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। रविवार को चारों की कोर्ट में पेशी हुई। अदालत ने आरोपितों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

चारों ने कहा मकसद पूरा हुआ
पुलिस ने हयात जफर व उसके साथी जावेद, सूफियान व राहिल से अलग-अलग पूछताछ की। कुछ बिंदुओं पर चारों के बयान एक ही थे। सभी ने कहा कि जिस तरह से नूपुर शर्मा ने विवादित बयान दिया है, भविष्य में ऐसा कोई न करे, इसलिए सख्ती के साथ विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि मकसद बात को देश के शीर्ष तक पहुंचाना था, जो पूरा भी हो गया है। उनका इशारा राष्ट्रपति, पीएम व सीएम की ओर था।

तमाम लोग उससे जुड़े हैं
एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन प्रदेश भर में है। तमाम लोग उससे जुड़े हैं और पदाधिकारी हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इसी तरह का विरोध प्रदर्शन हर शहर में होना था। क्योंकि, जो बयान दिया गया था, वह बर्दाश्त करने लायक नहीं था। हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सोमवार को टीम ने हिंसाग्रस्त इलाके में जाकर जांच-पड़ताल की। जबकि यूपी एटीएस के एडीजी आतंकी और पीएफआई कनेक्शन की जांच कर रहे हैं।

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