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‘नहीं बनने देंगे कश्मीर गुरू पलायन के बजाए करेंगे पराक्रम’, 250 वर्ष पूराने हाते का जानें इतिहास और क्यों पड़ा चंद्रेश्वर नाम

कानपुर। बेकनगंज थानाक्षेत्र स्थित परेड समेत कई इलाकों में बीते शुक्रवार को हिंसा हुई थी। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उपद्रवियों पर काबू पाया था। फिलहाल यहां काफी हद तक शांति है। इन सबके बीच चंद्रेश्वर हाता में रहने वालों ने मेन गेट पर बैनर टांग दिया है, जिसपर पलायन नहीं पराक्रम करेंगे… की बात लिखकर जवाब दिया है। यहां के लोगों का कहना है कि सबसे पहले पत्थरबाजों ने हमपर पथराव किया था। लोगों का आरोप है कि,ये सब उन्हें हाता से भगाने के लिए किया जा रहा है, पर हम चंद्रेश्वर को कश्मीर नहीं बनने देंगे। डटकर मुकाबला कानून के दायरे में रहते हुए करेंगे।

जूमे के बाद भड़की थी हिंसा
तीन जून को जुमे की नमाज के बाद नई सड़क पर चंद्रेश्वर हाता के सामने पथराव शुरू हो गया था। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था और उपद्रवियों ने पुलिस फोर्स पर भी पथराव कर दिया था। जांच में सामने आया कि नुपुर शर्मा के बयान को लेकर बंदी का आह्वान किया गया था, जिसे लेकर विवाद होने पर पथराव शुरू हो गया था। उपद्रवियों ने चंद्रेश्वर हाता को टारगेट किया था। पुलिस ने तीन अलग-अगल एफआईआर दर्ज कर कुल 56 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है।

पलायन का किया खंडन
चंद्रेश्वर हाता के लोगों ने पलायन की भ्रामक खबरों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है वह हाता में ही रह रहे हैं और कहीं नहीं गए हैं। खास बात यह है कि चंद्रेश्वर हाता वालों ने ऐसे लोगों को जवाब देने के लिए बैनर मुख्य द्वार पर लगा दिया है। बैनर में हनुमान जी के विराट स्वरूप का चित्र है और दूसरी तरफ लिखा है- पलायन नहीं बल्कि पराक्रम करेंगे। वहां रहने वाले लोग पुलिस अधिकारियों से भी मिले और आरोप लगाया कि कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोई घर छोड़कर नहीं गया है। भ्रामक खबरें चलाकर उन्हें नीचा दिखाने का काम किया जा रहा है।

1991 में पहली बार हुआ दंगा
चंद्रेश्वर हाता का निर्माण 250 वर्ष पहले किया गया था। ये हाता चंद्रेश्वर मिश्र की जमीन पर बना है हाता, इसलिए इसका नाम चंद्रेश्वर हाता है। 200 मीटर क्षेत्र में ही हिंदू बाहुल्य हाता सिमट कर रह गया है। यहां करीब 150 मकानों में 1 हजार लोग निवास करते हैं।
हाते में हिंदू सिर्फ हिंदू परिवार को ही मकान बेच सकता है। 1991 में कानपुर में पहली बार हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए थे। 2001 के दंगों में पेट्रोल बम तक हाते में फेंके गए। यहां के लोगों का कहना है कि सैकड़ों परिवार डर के चलते बहुत साल पहले पलायन कर गए थे। अभी 50 से ज्यादा परिवार यहां रहते हैं और उपद्रवियों का डट के मुकाबला कर रहे हैं।

40 साल पहले हिंदू बाहुल्य क्षेत्र हुआ करता था
1991 से पहले शिया और सुन्नी ही आपस में लड़ते थे। 31 सालों से चंद्रेश्वर हाता दंगों में मुस्लिमों का कर रहा सामना। 1984 के दंगे में हाते के ऊपर पेट्रोल बम तक फेंके गए। अब सिर्फ एक हाता बचा, पहले थे 12 हिंदू हाते। कन्हैया बाबू का हाता, मुरारी लाल का हाता, कल्लूमल स्ट्रीट, विसू बाबू का हाता समेत कायस्थियाना रोड हिंदू बाहुल्य क्षेत्र था। वर्ष 2010 में बसपा नेता वासिक अहमद ने हाते को कई बार खरीदने का प्रयास किया। हाते के आसपास अब मुस्लिम बाहुल्य और हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। जबकि 40 साल पहले तक यहां हिंदू बाहुल्य क्षेत्र हुआ करता था।

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