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कानपुर हिंसा की बड़ी साजिश का हुआ पर्दाफाश, ‘हिंदुओं के नरसंहार’ के बाद चंद्रेश्वर हाते पर कब्जे का था प्लान

कानपुर। 3 जून को जुमे की नमाज के बाद कानपुर में हिंसा भड़की थी। उपद्रवी चंद्रेश्वर हाते पर धारा बोल दिया। वहां मौजूद लोगों ने उपद्रवियों से सीधा मोर्चा लिया। आरोपियों ने पत्थरबाजी के साथ प्रेट्रोल बंम से हमला कर दिया। भीड़ हाते में रहने वाले हिंदुओं का नरसंहार करने पर उतारू थी। भीड़ को चंद लोगों ने काबू पर रखा और कुछ देर के बाद पुलिस आ गई और हाते में रहने वाली की जान बचाई। पत्थरबाजी में हाते की कई महिलाएं और बच्चे भी घायल हुए थे। इन तथ्यों का खुलासा हिंसा में शामिल आरोपियों की जमानत अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में किया।

क्या था पूरा मामला
3 जून को जुमे की नमाज के बाद कानपुर के बेकनगंज थानाक्षेत्र में हिंसा हुई थी। उपद्रवियों ने पथराव, फायरिंग और बमबाजी कर इलाके में सनसनी मचा दी थी। पुलिस के एक्शन के बाद उपद्रवी पीछे हटे थे। पुलिस की तरफ से तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं। जिसमें हिंसा के मास्टर माइंड मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात जफर हाशमी समेत 70 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था। गुरुवार को कानपुर कोर्ट में आरोपियों की सुनवाई के दौरान कई राज सामने आए। तीन आरोपियों ने पैसे देकर भीड़ एकत्र की और चंद्रेश्वर हाते पर कब्जे के लिए उन्हें उकसाया।

नूपुर शर्मा का बयान तो सिर्फ एक बहाना
एडीजीसी दिनेश अग्रवाल व विशेष लोक अभियोजक पंकज त्रिपाठी ने घटना की तीन एफआईआर में से एक के वादी परेड निवासी मुकेश के बयान का हवाला देते हुए कोर्ट में तर्क रखा कि नूपुर शर्मा का बयान तो सिर्फ एक बहाना था। बिल्डर वसी, मुख्तार बाबा और हयात को बंदी की आड़ में चंद्रेश्वर हाता कब्जाना था। फोर्स वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात थी इसी का फायदा उठाकर साजिश रची गई। चंद्रेश्वर हाते के लोगों ने फोर्स के आने तक बहादुरी से मोर्चा न संभाला होता, तो बड़े नरसंहार को टालना मुश्किल हो जाता। सबकुछ सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।

ज्मानत याचिका खारिज
सभी पक्षों को सुनने के बाद अपर जिला जज 16 जितेंद्र कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने घटना में नामजद आरोपी बकरमंडी गंदा नाला निवासी मो. नासिर व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी बनाए गए आचार्य नगर निवासी विक्की उर्फ आसिफ अली, सीसामऊ निवासी शहंशाह उर्फ नईम, गांधीनगर निवासी अरशद, हुमायूंबाग निवासी फरहान कालिया, छोटा मियां का हाता कर्नलगंज निवासी मो. अरहाज व मो. नसीम की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। शुक्रवार को कोर्ट में अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।

हयात ने उगले राज
उधर, एसआइटी की जांच में सामने आया है कि, हिंसा के पीछे दो तरह के गुट काम कर रहे थे। एक का मकसद दुनिया में भारत को बदनाम करने की थी जबकि दूसरा गुट मुस्लिम क्षेत्र में आबाद चंद्रेश्वर हाता में दहशत फैलाकर उसे खाली कराना चाहता था। एसआइटी की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने पूछताछ में बताया था कि बंदी की अपील के बाद बिल्डर हाजी वसी, उसके मैनेजर हमजा, मुख्तार बाबा और उसके लड़के महमूद उमर ने चंद्रेश्वर हाता कब्जाने को गुप्त मीटिंग की थी। तय हुआ था कि बाजार बंद कराने के लिए निकलने वाली भीड़ को किसी न किसी बहाने चंद्रेश्वर हाते की ओर मोड़ दिया जाएगा।

बांटे गए थे पैसे
एसआईटी की जंच के मुताबिक, इसके लिए मुख्तार बाबा के लड़के महमूद उमर ने अफजाल को बुलाकर 10 लाख रुपये दिए थे। इससे गोला, बारूद व बम, ठेलों पर ईंट-पत्थर लाने वालों को दिए जाने थे। उपद्रवियों को एक-एक हजार रुपये देकर पथराव के लिए तैयार किया था। अफजाल ने ही छोटे मियां का हाता निवासी अकील खिचड़ी और सबलू को चार-चार लाख रुपये देकर इस योजना में शामिल किया था। वसी ने पिछले साल दिसंबर से पिछले माह जून तक पांच संपत्तियां बेची थीं। इसमें 35 लाख की दो संपत्तियां घटना से ठीक एक दिन पहले ही बेची थीं। फिलहाल मुख्तार बाबा, हयात जफर हाशमी और हाजी वसी जेल में हैं, जबकि हमजा और अफजाल फरार हैं।

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