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88 साल से बंद ताजमहल के 22 कमरों का जानिए क्या है रहस्य ?

आगरा। ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद गरमाया हुआ है तो वहीं अब आगरा के ताजमहल को लेकर कुछ लोग कोर्ट की शरण में गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ताजमहल के 22 बंद कमरों की जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिससे पता लगाया जा सके कि वहीं हिंदू देवताओं की मूर्तियों तो नहीं हैं। याचिका में कहा गया है कि बंद दरवाजों के पीछे हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को बंद करके रखा है। स्तित्व न्यूज आपको इन बंद 22 कमरों के रहस्य से रूबरू कराने जा रहा है। इसके साथ ही ताजमहल को लेकर कब से विवाद शुरू हुआ? कब-कब इसको लेकर लोगों ने सवाल खड़े किए और हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले बीजेपह नेता ने क्या-क्या दावे किए हैं।

एएसआई से सर्वे कराने की मांग
ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अयोध्या के बीजेपी नेता डॉक्टर रजनीश सिंह ने याचिका दायर की है। डॉक्टर सिंह ने अपनी याचिका में ताजमहल के उन 22 कमरों को खोलकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से सर्वे कराने की मांग की है, जो लंबे वक्त से बंद हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ताजमहल में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख हो सकते हैं। अगर सर्वे होता है तो इससे मालूम चलेगा कि ताजमहज में हिंदू मूर्तियां और शिलालेख हैं या नहीं। जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष विरोध कर रहा है। फिलहाल मामले की सुनवाई 10 मई को मुकर्रर की गई है।

1934 में इन कमरों को खोला गया
जानें-माने इतिहासकार प्रोफेसर एसपी वर्मा ने मीडिया को बताया है कि, ताजमहल में मकबरे के नीचे 22 कमरे बने हैं। आखिरी बार साल 1934 में इन कमरों को खोला गया था। अंग्रेज सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में कमरे सिर्फ इसलिए खोले गए थे कि, कहीं अंदर से ताजमहल में कोई क्षति तो नहीं पहुंच रही है। जांच के बाद कमरे बंद कर दिए गए। भारत आजाद हो गया, लेकिन बंद 22 कमरे आज तक नहीं खुले। प्रोफेसर का कहना है कि ताजमहल को लेकर तब के समय के इतिहासकार रहे पीएन ओक ने दो किताबें लिखीं। एक का नाम ’ट्रू स्टोरी ऑफ ताज’ और दूसरे का नाम ’द ताज महल इज तेजो महालय- अ शिव टेंपल’ था। इसमें उन्होंने दावा किया कि ताजमहल एक शिव मंदिर है, जिसे तेजोमहालय के नाम जाना जाता था।

पीएन ओक के किए कई दावे
पीएन ओक ने ’ट्रू स्टोरी ऑफ ताज’ में लिखा, ’यह एक शिव मंदिर या राजपूताना महल था, जिसे शाहजहां ने कब्जा कर मकबरे में बदल दिया।’ ओक ने दावा किया कि ताजमहल से हिंदू अलंकरण और चिन्ह हटा दिए गए और जहां नहीं हटा पाए उन्हें बंद कर दिया। ओक के अनुसार, जिन कमरों में उन वस्तुओं और मूल मंदिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है। उन्होंने अपनी किताब में दावा किया है कि मुमताज महल को उनकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया था। अपने दावे के समर्थन में ओक ने यमुना नदी की ओर के ताजमहल के दरवाजों के काठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिए हैं।

जैन ने दायर की थी याचिका
लखनऊ के हरीशंकर जैन ने आगरा के सिविल कोर्ट में ताजमहल को लार्ड श्रीअग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर घोषित करने को लेकर 2015 में याचिका दायर की थी।ं जिला जज ने याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि जैन ने फिर से रिवीजन के लिए याचिका दायर की थी जो एडीजी पंचम के यहां अभी विचाराधीन है। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद तब के राज्यसभा सांसद रहे विनय कटियार ने ताजमहल का मुद्दा उठाया था। कटियार ने ’ताजमहल’ को ’तेजोमहल’ घोषित करते हुए योगी आदित्यनाथ को यह सलाह दी कि ’उन्हें चाहिए कि वह ताजमहल जाएं और उसमें हिंदू चिह्नों को खुद देख लें।

‘ये तेजोमहल राजा मान सिंह का ही था’
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह का कहना है कि 1600 ई. में आए तमाम यात्रियों ने अपने यात्रा संस्मरण में राजा मानसिंह के महल का वर्णन किया है। ताजमहल 1653 में बना और 1951 में औरंगजेब का एक पत्र सामने आया जिसमें वह लिखता है कि अम्मी के मकबरे की मरम्मत कराने की जरूरत है। कहा जाता है कि ये तेजोमहल राजा मान सिंह का ही था। इससे जुड़ा एक अभिलेख जयपुर स्थित सिटी पैलेस संग्रहालय में है। बीजेपी नेता का कहना है कि, राजा मान सिंह की हवेली के बदले में शाहजहां ने राजा जय सिंह को चार हवेलियां दी थीं। यह फरमान 16 दिसंबर 1633 का है।

 

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