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Exclusive : योगी की सरकार में ब्यूरोक्रेसी ने कर दिया बड़ा खेल, यूपी में ‘मुर्दे’ संभाल रहे स्वास्थ्य व्यवस्था की बागडोर

लखनऊ। एक कहावत है आधी छोड़ पूरी को धावे आधी मिले न पूरी पावे, इस वक्त कुछ यही हालात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हैं। बेचारे उत्तर प्रदेश की व्यवस्थाओं को पटरी में लाने पर दिन रात काम कर रहे हैं। कभी ब्यूरोक्रेसी के पेच कसते हैं तो मंत्री बेलगाम हो जाते हैं और जब मंत्रियों को लगाम लगाते हैं तो अफसरशाही बेलगाम हो जाती है। पिछले कुछ दिनों से सूबे की सियासत में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर बवाल मचा हुआ है। खुद डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने इस खेल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

डिप्टी सीएम नाराज
योगी सरकार -2 अपने सौ दिन के कार्य को लेकर जनता के बीच जाकर उपलब्धियां गिना रही है तो वहीं स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर हुए ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सूबे की सियासत गर्म है। जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग में तबादले किए गए, उसमें मुर्दे को भी जनपद में बतौर सीएमओ के पद पर तैनात कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देख डिप्टी सीएम बूजेश पाठक खासे नाराज हैं। स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादलों को लेकर उनका कहना है कि तबादला नीति का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। डिप्टी सीएम ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने पत्र लिखकर वर्तमान सत्र में हुए तबादले का कारण स्पष्ट करने की हिदायत दी है।

मौत के बाद बना दिया गया सीएमओ
लीवर के इलाज के लिए 5 साल पहले जिस डॉक्टर ने अपना ट्रांसफर मांगा उस डॉक्टर को मरने के बाद सीएमओ बना दिया गया।
जी हां बाराबंकी में तैनात डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सुधीर चंद्रा की 12 जून को बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। उसके बाद भी उनका तबादला सीएमओ फतेहपुर के लिए कर दिया गया। डॉक्टर दीपेंद्र को प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू चिकित्सालय में सर्जन के पद पर भेजने का लेटर जारी हुआ। 17 जून को दीपेंद्र सिंह की मौत हो चुकी थी। उनकी तेरहवीं के अगले दिन मनचाही जगह पर तैनाती का संदेश आया।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद भी मिला पद
डॉ मंजीत सिंह अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में बदायूं में तैनात थे। इनको मुख्य चिकित्सा अधिकारी हाथरस बनाया गया है। इनके खिलाफ तीन बार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। डॉक्टर सुधाकर पांडे 8 महीना पहले सीएमओ गोरखपुर थे सीएम की नाराजगी के बाद उनका ट्रांसफर बुंदेलखंड के महोबा में बतौर वरिष्ठ परामर्शदाता किया गया। चंद दिनों में नाराजगी दूर हो गई इनको मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोबा बना दिया गया। और तो और ठीक 6 महीने बाद फिर इनका और प्रमोशन किया गया और इनको झांसी का सीएमओ बना दिया गया । डॉक्टर जयंत कुमार को सीएमओ बलिया बनाया गया। श्रावस्ती में तैनाती के दौरान उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई जांच में दोषी पाए गए। लेकिन दोषी पाए जाने का इनाम उन्हें सीएमओ बनाकर दिया गया।

रिटायर्डमेंट से पहले बनाए गए सीएमओ
डॉ नीना वर्मा महिला सीएमएस पर श्रावस्ती में तैनाती के दौरान दो बार कार्रवाई हो चुकी है। वधानसभा की कमेटी ने इनकी जांच की दोषी भी पाया फिर भी नीना को सीएमओ महाराजगंज बना दिया गया। डॉ विमल कुमार बैसवार संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण को सीएमओ देवरिया बनाया गया, जबकि उनके रिटायरमेंट के महज 10 महीने बचे हैं। शासनादेश कहता है कि सर्विस के 1 साल से कम बचे होने पर अधिकारी को प्रशासनिक पद नहीं दिया जा सकता। डॉ हरी दास अग्रवाल 26 साल तक गोंडा में रहे रिटायरमेंट के करीब है इनको सीएमओ बस्ती बनाया गया।

दो पत्र लिखकर मांगा जवाब
पूरे खेल की जानकारी होने पर डप्टी सीएम बृजेश पाठक के खासे नाराज हो गए और उन्होंने एसीएस चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद को पत्र भेजकर ट्रांसफर लेटर जारी करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही ट्रांसफर के कारणों का डिटेल देने को कहा है। इसके अलाववा उन्होंने महज 24 घंटे के अंदर दूसरा पत्र सचिव चिकित्सा शिक्षा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण रविंद्र कुमार को लिखा। डिप्टी सीएम ने लिखा कि लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य अस्पतालों से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बड़ी संख्या में हटाया गया. लेकिन उनकी जगह नियुक्ती नहीं की गई। उन्होंने चिंता जताई कि डॉक्टरों का तबादला कर देने और उनके स्थान पर किसी की तैनाती नहीं होने पर चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए क्या किया जा रहा है।

फेसबुक में रोबिन हुड बनकर उभरे
डिप्टी सीएम ने जिस तरह से दो पत्र लिखकर जानकारी मांगी है, उससे पुरी सरकार सकते में आ गई है। जानकार मानते हैं कि यह लेटर बम दरअसल 100 दिनों से चले आ रहे कोल्ड वॉर के बाद सामने आए हैं। क्योंकि एसीएस हेल्थ अमित मोहन प्रसाद कोरोना काल से आज तक ना जाने कितने आरोप-पत्यारोप और लानतों के बाद भी मुख्यमंत्री की कृपा पाने में कामयाब रहे हैं तो वही ताजे ताजे डिप्टी सीएम बने बृजेश पाठक भी फेसबुक में रोबिन हुड बनकर स्वास्थ्य महकमे में क्रांति लाने की कोशिशों में जुटे हैं। लेकिन महकमे के अंदर असल रॉबिनहुड कौन है जंग इस बात की है, असल में स्वास्थ्य महकमे का बॉस कौन है लड़ाई इस बात की है।

 

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