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कंधे पर लकड़ी का बोझ ढोते दिखे छिंदवाड़ा के नवनिर्वाचित ‘मेयर साहब’, साइकिल से सवारी करते कमलनाथ के चेले की तस्वीर हुई वायरल

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के निकाय चुनाव में जहां बीजेपी को प्रचंड जीत मिली तो वहीं कांग्रेस का भी परचम लहराया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ में  31 वर्ष के विक्रम अहाके ने बीजेपी के कद्दावर नेता को मेयर के पद पर हरा कर जीत दर्ज की।  विक्रम ने अपने प्रतिद्धंदी के पैर छूकर आर्शीवाद लिया। इतना ही नहीं मेयर चुने जाने के बाद उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। जिसमें विक्रम अहाके, कंधे पर लकड़ियों का बोझ, तन में गमछे लपेटे और पैर में साधारण चप्पल पहने हुए दिख रहे हैं। इतना ही नहीं एक तस्वीर में वह साइकिल से बाजार जाते हुए देखे जा सकते हैं।

महापौर विक्रम अहके का जीवन परिचय
महापौर विक्रम अहके साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। विक्रम का जन्म 10 अक्टूबर 1991 को छिंदवाड़ा विकासखंड के पैतृक गांव राजाखोह ढाना में हुआ। वो लगभग तीन वर्ष से वार्ड नंबर-40 (तात्या टोप वार्ड) में विक्रम निवास कर रहे हैं। उनके परिवार में दूर-दूर तक कोई राजनीति में सक्रिय नहीं है। उनके पिता नरेश अहके किसान हैं। माता निर्मला अहके आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। विक्रम की शादी जुन्नारदेव निवासी मानषी से हुई है। पीजी कॉलेज से वर्ष 2013 में उन्होंने बीए की डिग्री हासिल की।

हर क्षेत्र में वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराते 
विक्रम ने बताया कि उन्हें प्रारंभ से ही समाजसेवा कार्य करने का जुनून था। गांव में जब किसी को जरूरत पड़ती तो वे उनके साथ खड़े रहते थे। हर क्षेत्र में वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। धीरे-धीरे वे राजनीति में भी सक्रिय होने लगे। एनएसयूआई में उन्हें पदाधिकारी बनाया गया। हालांकि वर्ष 2015 में उन्होंने गांव से सरपंच का चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार मिली। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के काफी करीबी भी माने जाते हैं। विक्रम बताते हैं कि, सरपंच का चुनाव हारने के बाद वह लगातार जनपद के लोगों की समस्याओं को उठाते रहे। सरकार और प्रशासन के जरिए गरीबों को न्याय दिलाया। जिसके कारण जनता ने हमें मेयर के पद पर चुना।

कांग्रेस की छिंदवाड़ा शहर में 18 साल बाद जीत हुई
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ कहे जाने वाले छिंदवाड़ा में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस ने एक बड़ी जीत दर्ज की है। विक्रम अहाके के मेयर बनते ही कांग्रेस की छिंदवाड़ा शहर में 18 साल बाद जीत हुई है। विक्रम आहाके ने बीजेपी प्रत्याशी अंनत धुर्वे को विक्रम ने 3786 वोटों से हराया है। वहीं विक्रम को टोटल 64363 वोट मिले हैं। वहीं अनंत धुर्वे को 60577 मत हासिल हुए हैं। छिंदवाड़ा में कुल मतों की संख्या 130907 रही। विक्रम ने जिस तरह से मेयर चुने गए हैं, उसकी चर्चा पूरे देश में है। विक्रम बताते हैं कि, वह भोजन पकाने के लिए जंगल से लकड़ियां लेकर आते थे। उसी से पूरे परिवार को भोजन पकता था।

सबसे युवा मेयर
बता दें कि विक्रम अहाके 11 मेयर में सबसे युवा मेयर हैं, उनकी उम्र महज 31 साल है। इतना ही नहीं वह जीतने वाले 11 मेयर में सबसे गरीब भी हैं। नामांकन भरते वक्त उन्होंने अपनी संपत्ति को जानकारी दी थी, उसके मुताबिक, उनकी संपत्ति कुल 3 लाख है। इसके अलावा उन पर 50 हजार रुपए का कर्जा भी है। मेयर बने विक्रम अहाके मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं। मेयर का चुनाव जीतने से पहले वह अब तक कांग्रेस आदिवासी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष थे। कमलनाथ के गढ़ माने जाने वाले छिंदवाड़ा में उनके कहने पर ही विक्रम को महापौर पद का टिकट दिया गया था।

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