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महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री भारतीय राजनीति के स्तम्भ थे

2 अक्टूबर 2021 महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन पर “अहिंसा का अर्थ आज के परिवेश में अगर देखा जाए तो, अपने राष्ट्र को आततायियों से रक्षा करना अहिंसा है। चीन हमारी जमीन पर कब्जा करता है। हम युद्ध कर परास्त करते हैं यह अहिंसा है। आंतकवादी का राज्य की शांति के लिए वध अहिंसा है। समाज की शांति और सुरक्षा के लिए की गई हिंसा अहिंसा ही कहलायेगी। कोई एक गाल पर थप्पड़़ मारे दूसरा आगे कर देना अहिंसा नहीं अपितु कायरता है। लालबहादुर शास्त्री एक निर्धन परिवार से उठकर भारतीय राजनीति के क्षितिज पर पहुंचे यह उनकी तपस्या का अनुपम उदाहरण है। उनकी सादगी, विनम्रता एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया और देश में एक उत्साह पैदा कर दिया। आज की राजनीति में लालबहादुर शास्त्री पवित्र और साफसुथरी छवि के एक आदर्श मापदण्ड़ हो सकते हैं। देश के प्रत्येक नागरिक को उनके व्यक्तित्व का अनुसरण करना चाहिए। शास्त्री जी की पहचान उनकी ईमानदारी है। शास्त्रीजी ने देश को उन्नति के पथ पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए प्रयास किया था और महात्मा गांधी जी को “महात्मा” की उपाधि स्वामी श्रद्धा नंद जी ने प्रदान की थी। शास्त्री जी की कार्यशैली व नीतियों की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

2 अक्टूबर हिंदुस्तान के लिए बहुत ही खास है। इस दिन हमारे देश के 2 महान विभूतियों ने जन्म लेकर भारत को आजादी दिलाई। देश के दो महान विभूति महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री ने 2 अक्टूबर को जन्म लिया था। इन दोनों के दूरदर्शी सोच से अंग्रेजी हुकूमत को एक तरह से झुकाते हुए भारत को आजाद कराया गया था। बापू ने हमें सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया जिसका अनुसरण आज भी किया जाता है। हमारे सनातन धर्म में अहिंसा पर बहुत ही बड़ा उपदेश दिया गया है। लेकिन धर्म के अलावा सत्य और अहिंसा को परिभाषित करते हुए एक संत के रूप में गांधी जी ने जीवन पर्यंत अंहिसा को अपनाकर दिखाया और समूचे विश्व को एक संदेश दिया कि व्यक्ति चाहे तो हर परिस्थिति में अपने विचारों द्वारा राष्ट्र,  विश्व की धारा को बदल सकता है। वहीं दूसरी तरफ शास्त्री जी की इमानदारी और सच्चे राष्ट्रभक्त की मिसाल बनी, उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए जिस सादगी और नैतिकता का पाठ अपने अल्प कार्यकाल में कर दिखाया। उससे हम लोगों को अभी भी प्रेरणा मिलती है। शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। जो बनारस के पास है। उनके पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एवं माता रामदुलारी देवी थी उनके पिता एक शिक्षक थे। उनकी जयंती पर शत शत नमन अस्तित्व परिवार 2 अक्टूबर के पर्व पर गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी को शत शत नमन करता है और उम्मीद करता है और इन दो महान संतो के पद चिन्हों पर चलकर राष्ट्र आगे बढ़ेगा। शास्त्री जी के आह्वान पर पूरे देश ने सिर्फ एक वक्त की रोटी खाने लगा था। शास्त्री जी खुद एक समय ही भोजन करते थे। उनके ही अदम्य साहस के बल पर संपूर्ण देश में खाद्य क्रांति आई। उन्होंने जवानों और किसानों पर संपूर्ण दायित्व देते हुए नारा दिया जय जवान-जय किसान उन के अनमोल विचार आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। हमें शांति के लिए उतनी ही बहादुरी से लड़ना चाहिए जितना हम युद्ध के मैदान में लड़ते हैं। उन्होंने कहा था कि देश की ताकत और मजबूती के लिए सबसे जरूरी है आपसी भाईचारा और पंथ धर्म जात को त्याग कर राष्ट्रप्रेम एवं एकता स्थापित करना। उन्होंने छुआछूत अस्पृश्यता को दूर करने के लिए बहुत ही काम किया था।

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