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मामा की पाठशालाः बचपन से ही बगावती तेवर वाले शिवराज ने खोले जिंदगी के कई राज

भोपाल। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान जब किसी कार्यक्रम में जाते हैं तो हर किसी का उनसे एक खास जुड़ाव हो जाता है। मध्य प्रदेश में वो बच्चों के मामा कहे जाते हैं, सार्वजनिक मंचों में वो प्रदेश के युवाओं और बच्चों को भांजे-भांजियां कहते नजर आते हैं। अपनी इस छवि के कारण वो पूरे प्रदेश में शिवराज मामा के नाम से चर्चित हैं। शिवराज का बच्चों के प्रति प्यार एक बार फिर देखने को मिला, जब भोपाल कके मॉडल स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में वो बच्चों से एक घंटे से अधिक समय तक ऑनलाइन बातचीत करते नजर आए। कार्यक्रम का नाम था मामा की पाठशाला और इस पाठशाला में बच्चों ने शिवराज सिंह से कई सवाल दागे, वो बड़े ही खुले अंदाज में बच्चों के सवालों का जवाब देते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने कई बातें ऐसी भी बताईं, जिससे लोग अभी तक अंजान थे।

 

7वीं क्लास में पहला विरोध प्रदर्शन
शिवराज से जब एक बच्चे ने जब राजनीति की शुरूआत को लेकर सवाल किया तो शिवराज सिंह ने बताया कि मैं गांव में पैदा हुआ और सरकारी स्कूल में पढ़ा। गांव में उस समय किसान और मजदूर हुआ करते थे। उस समय मजदूर को मजदूरी के रूप में रुपए नहीं, बल्कि ढाई पाई अनाज मिलता था। मुझे लगा कि मजदूरों के साथ गलत हो रहा है। शिवराज ने बताया कि मैं उस समय 7वीं क्लास में पढ़ता था, मैंने मजदूरों को इकट्‌ठा किया। उन्हें ढाई की जगह 5 पाई अनाज बतौर मजदूरी मांग रखने के लिए कहा। सिर्फ 20 मजदूर ही मेरे साथ जुलूस निकालने के तैयार हुए। जैसे ही, जुलूस लेकर घर के सामने पहुंचा, तो चाचा डंडा लेकर आ गए। सभी भाग गए। मैं पकड़ा गया। चाचा ने अच्छी पिटाई भी लगाई। उन्होंने मुझे पढ़ाई के लिए भोपाल भेज दिया। शिवराज ने बताया कि वह मेरा पहला असफल आंदोलन था। उसके बाद मॉडल स्कूल में ही छात्र नायक बना। जेपी के आंदोलन में जेल गया। यहीं से राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

बचपन में इस अंदाज में शिवराज मनाते थे आजादी का उत्सव
शिवराज ने देश की आजादी और तिरंगे के महत्व को लेकर बच्चों ने कई सवाल दागे। इन सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज सभी का है। यह कुछ लोगों का उत्सव नहीं है। प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इसे जन-जन को मनाने का अवसर दिया है। इसे पूरे उत्सव के साथ आजादी के अमृत महोत्सव को मनाना है। देश का माथा कभी झुकने नहीं देंगे, चाहे हमें जान देने पड़े। आजादी के उत्सव से जुड़ी अपनी यादों और किस तरह बचपन में स्वतंत्रता दिवस मनाते थे, इसके बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि गांव में प्रभात फेरी निकालते थे। हर घर से प्रसाद मिलता था। दूध से लेकर चने और दाने तक मिलते थे। पूरा गांव निकल पड़ता था। माता-बहनें तक आती थीं। प्रसाद को मिलकर खाते और सभी को बांटते थे। हर किसी के लिए ये उत्सव होता था। शिवराज ने कहा कि अपने लिए जिए तो क्या जिए। हमेशा दूसरों के लिए करने के बारे में सोचें। पढ़ाई करें। खूब खेलें। तरक्की करें, लेकिन जरूरी है कि देश के बारे में सोचें। समाज के बारे में सोचें। यही सोच देश भक्ति है। अपनी दिनचर्या में कोई न कोई ऐसा कार्य करें, जो देश और लोगों के हित में रहे।

 

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