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कुछ कहूं… अब प्रभु कृपा करहु एहि भांति…

दिनेश सिंह\गाजियाबाद

चुनावी समर में धर्म का कर्म काफी प्रभाव डालता है। भाजपा गठन के बाद मात्र दो सीटों से केंद्र के साथ-साथ कई सूबों में स्थाई सरकार देने में अयोध्या के राजा राम की बड़ी कृपा है. इसलिए देश में चुनाव कहीं हो हर मुद्दे पर राम की विजय दिखाई जाती है. राम को भाजपा ब्रांड अंबेसडर की तरह प्रयोग करती है। शुरुआती दौर में विपक्षी पार्टियों ने भाजपा को सांप्रदायिक कहते हुए राम के अस्तित्व पर विरोधाभास उत्पन्न करने का उपक्रम किया. लेकिन हिंदू सनातन धर्मी राजा राम पर कटाक्ष को बर्दाश्त न करते हुए भाजपा की तरफ आत्मीयता के साथ हाथ बढ़ाकर ईवीएम पर बटन दबाता गया और भाजपा सत्तासीन होती गई. उस पर योगी के रूप में मिला मुख्यमंत्री जो हर साल अयोध्या में भव्य कार्यक्रम करते रहते हैं. या कहें यदि योगी जी सड़क मार्ग से अपने आश्रम एवं ईष्ट स्थान यानी गोरखपुर जाएंगे, तो बीच में सरयू तट स्थित अयोध्या बंधन तो होगा ही इससे चिंतित अन्य दलों के प्रबुद्ध सलाहकारों ने शायद राम महिमा का गुणगान करते हुए पार्टी प्रमुखों के मन मस्तिष्क में राम धुन उड़ेल दी. और कहा कि बिना राम के चरण स्पर्श किए सत्ता सुख नहीं मिलेगा इसलिए राम की शरण में जाइए इसी प्रेरणा से राम को गाली देने वाली बसपा अपने सबसे भरोसेमंद पंडित को अयोध्या भेजकर राम चरण वंदना कर न्योता पहुंचाया. और अपने कर्तव्य कर्म की शुरुआत प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के रूप में कि यद्यपि इस अयोध्या प्रवास का भाजपा ने मजाक उड़ाया। लेकिन यह सर्वदा सच है. कि राम पर सबका हक है. भगवान सभी के हैं ।

उसके बाद रामजन्म भूमि आंदोलन को कुचलने के आरोपित मुलायम सिंह जिनके ऊपर दो काले स्याह दाग हैं। मुस्लिम तुष्टीकरण के जनक के रूप में राम जन्मभूमि विरोध की छवि, दूसरा उत्तराखंड राज्य आंदोलन को कुचलने के लिए रामपुर तिराहा गोलीकांड फिर भी मुलायम सिंह के पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव राम शरण में आए और आशीर्वाद लिया कितना आशीर्वाद मिला यह तो चुनाव परिणाम बताएगा. लेकिन दोनों दलों ने अपनी छवि को बदलते हुए मुस्लिम तुष्टीकरण त्याग हिंदू मतों की तरफ रुख किया है.

आपको बताएं कि हाल के इतिहास में चमत्कारिक रूप से यूपीए के द्वितीय कार्यकाल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन भावनाओं के आक्रोश को भुनाते हुए अन्ना आंदोलन के स्वच्छ छवि को उस दौर के बुद्धिजीवियों के गठजोड़ से उपजी आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल जिन्हें दिल्ली सत्ता नसीन रहते हुए विपक्षियों से ज्यादा अपने शुभचिंतकों को लतियां कर उनके कंधे पर चढ़कर केंद्र सरकार से टकराने की जुर्रत की, जिसमें समयानुसार कभी सफल तो अक्सर असफल साबित हुयें हैं. तो चरण वंदना कार्यक्रम में अपने से बड़े दोनों दलों के राममय हो जाने से चिंतित केजरीवाल ने अपने अंतरंग मित्र उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अयोध्या राजा राम रज लेनें भेंज दिया। जो अपने साथी संजय के साथ अयोध्या पहुंचे. जहां खेमों में बटी संतों के सानिध्य से चुनाव में वंदना किया। देखिए अभी शेष दल कब किस को साथ लेकर राम दरबार में भाजपा के विरुद्ध अर्जी लगाते हैं. और उस अर्जी की सुनवाई में रामचंद्र के अनुयाई अपनी सहमति किधर की तरह सुनाते हैं।

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