ब्रेकिंग
Kanpur: बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा का योगी सरकार पर हमला, बोले- बेलगाम हो चुकी है योगी सरकारShahjahanpur: कानून के राज में कानून व्यवस्था ध्वस्त, बदमाशों ने कोर्ट में निपटाया वकीलSiddharthnagar: भाकियू ने केंद्रिय मंत्री अजय मिश्रा को हटाने के विरोध में जाम किया रेलवे ट्रैकHamirpur: किसानों के रेल रोको आंदोलन को लेकर प्रशासन अलर्ट, तैनात की गई जीआरपी और पुलिसAuraiya: किसान यूनियन द्वारा रेल रोकने के मामले में पुलिस प्रशासन सख्तUnnao: किसानों की ओर से रेल रोको आंदोलन का आह्वान, पुलिस और प्रशासनिक टीमें अलर्टHamirpur: आकाशीय बिजली गिरने से बेटे की मौत, मां की हालत गंभीरAgra: किसान आंदोलन के मद्देनजर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामAgra: युवक के ऊपर टूट कर गिरा बिजली का तार, करंट लगने से युवक की मौतJhansi: रजत पदक विजेता शैली सिंह का गुरु पद्मश्री अंजु बॉबी जार्ज के साथ हुआ भव्य सम्मान

प्लास्टिक कर रहा है धरती को नष्ट, हो रहा पर्यावरण दूषित

पूरे विश्व में प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बहित खतरनाक सिध्द हो रहा है। इसीलिए प्लास्टिक इस्तेमाल कम करने और सभी प्रकार के प्लास्टिक पर पाबंदी की मांग उठाई जाती रही है। देश में ऐसी मांग लगातार होती आ रही है. लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी ऐसा नहीं हो पा रहा है। इसका अंदाजा इन आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है कि 1990 में भारत में पालीथीन की खपत करीब 20 हजार टन थी, जो पहले डेढ़ दशकों में बढ़कर तीन लाख टन से भी अधिक हो गई।

नेशनल ग्रीन टिब्यूनल ने साल 2017 में एक मुख्य निर्णय में दिल्ली में 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली नान बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की थैलियों के प्रयोग पर रोक लगाते हुए सरकार को एक सप्ताह के भीतर ऐसे प्लास्टिक के सारे भंडार को अधिहृत करने का आदेश देते हुए कहा था कि दिल्ली में यदि किसी नागरिक के पास से प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त होती हैं तो उसे पर्यावरण क्षतिपूíत के रूप में पांच हजार रुपये की राशि भरनी होगी।

भारत के 20 से भी ज्यादा राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिबंधित प्लास्टिक को लेकर इसी तरह के नियम लागू हैं, लेकिन सख्ती के अभाव में इतना समय बीत जाने के बाद भी दिल्ली तथा देश के तमाम राज्यों में पालीथीन का उपयोग बदस्तूर जारी है। यदि प्रतिबंधित प्लास्टिक के प्रयोग में कमी नहीं आ रही है. तो इसका सही और साफ  मतलब यही है कि इनके उत्पादन, बिक्री और प्रयोग को लेकर संबंधित विभागों का चाल चलन में बहुत ही लापरवाही भरी पड़ी है।

Related posts

Leave a Comment

अपना शहर चुने

Top cities