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‘चायवाले’ नरेंद्र मोदी का स्वयंसेवक से लेकर प्रधानसेवक तक का बड़ा दिलचस्प रहा सफर, चाणक्य-ममता और महान योद्धा ने मां भारतीय की मुस्कान के लिए समर्पित कर दिया पूरा जीवन

 नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक साधारण परिवार में जन्में नरेंद्र मोदी का जीवन बड़ा संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने अपनी मां के 100वें जन्मदिन पर सोशल मीडिया में एक ब्लॉग लिखकर पूरी दास्तां बयां की थी। पीएम नरेंद्र मोदी का सफर चायवाले से शुरू हुआ आरएसएस की शाखा तक पहुंचा। एक इमानदार स्वयंसेवक के तौर पर उन्होंने राष्ट्रसेवा की। गुजरात का जब उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया तो नरेंद्र मोदी ने सूबे को बुलंदियों तक पहुंचा दिया। 2014 में जब देश की जनता ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानसेवक चुना तो उन्होंने नामुकिन वाले कामों को मुमकिन कर जमीन पर उतार दिया।

गुजरात के वड़नगर में हुआ था पीएम मोदी का जन्म
प्रधानमंत्री का जन्म गुजरात के वड़नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदार दास मूलचंद मोदी था। उनकी मां का नाम हीराबेन है। अपने 5 भाई-बहनों में प्रधानमंत्री दूसरे नंबर पर आते हैं। मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी। प्रधानमंत्री खुद बता चुके हैं कि कभी वह चाय बेचा करते थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होने स्टेशन से गुजरने वाले सैनिकों को चाय पिलाई थी। वह वड़नगर में भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे। उन्हें एक्टिंग, डिबेट, नाटकों में हिस्सा लेना बहुत पसंद था। वह एनसीसी में भी शामिल हुए।

महान योद्धा की बचपन से दिखी झलख
एक बार नरेंद्र मोदी पास के तालाब से घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर ले आए थे। मां के समझाने-बुझाने पर वह उसे तालाब में दोबारा छोड़कर आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक निडर और साफ छवि वाले नेता हैं। 2014 में ज बवह पहली बार प्रधानमंत्री चुने गए तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी की शादी में अचानक पहुंच गए। पाकिस्तान ने पठानकोट में आतंकी हमला करवाया तो इसका जवाब एयर सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए देकर पूरे पाक के अंदर खलबली मचा दी थी। उरी हमले का जवाब भी सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए देकर आतंकवादियों को उनके घर के अदंर घुसकर भारतीय सेना ने मार गिराया था। राममंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉडीडोर के अलावा नोटबंदी, भ्रष्टाचार पर प्रहार समेत कई ऐसे कार्य किए, जिनकी सराहना देश में हीं नही विदेशों में भी की जाती है।

1970 में आरएएस से जुड़े
नरेंद्र मोदी 1970 के शुरुआती दशक से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे। मोदी बहुत मेहनती और कर्मठ थे। धीरे-धीरे उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां दी जाने लगीं। लोगों को उनमें कुशल प्रबंधकर्ता दिखता था। तमाम आरएसएस नेताओं के ट्रेन और बस के रिजर्वेशन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी गई। इस तरह संगठन के भीतर उनका कद बढ़ता गया। नरेंद्र मोदी शुरू से दाढ़ी रखते हैं। 1975 में जब इमरजेंसी लगी तो उन्होंने सरदार का वेश रखकर ढाई साल पुलिस को छकाया था। मोदी अपने ज्यादातर काम खुद ही कर लेते हैं। कपड़ों को धुलने में ज्यादा परेशानी नहीं हो तो वह कुर्ते की बांह को काटवाकर पहनने लगे। बाद में यही उनका स्टाइल बन गया।

लाल चौक पर फहराया तिरंगा
26 जनवरी 1992 को गणतंत्र दिवस के मौके पर बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुआई में कश्मीर के लाल चौक पर बीजेपी ने तिरंगा झंडा फहराया था। उस वक्त नरेंद्र मोदी भी साथ थे। वहां तक पहुंचने का सफर कन्याकुमारी से शुरू हुआ था। यात्रा के प्रबंधन का पूरा काम नरेंद्र मोदी के हाथों में ही था। उन्होंने बहुत कुशलता के साथ यह काम किया था। कन्याकुमारी से दिसंबर 1991 शुरू हुईयात्रा का अंतिम पड़ाव कश्मीर था। उस वक्त आतंकवादियों ने पोस्टर चस्पा कर धमकी दी थी कि, जिसने अपनी मां का दूध पिया हो, वह यहां आकर दिखाए। तब पीएम मोदी लाल चौक पर खड़े होकर कहा था कि हां मैंने अपनी मां का दूध पिया है और शान से तिरंका फहराया था।

2014 में चूने गए प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री (2001-2014) रह चुके हैं। 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार उन्होंने गुजरात के सीएम के तौर पर शपथ ग्रहण की थी।नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बीजेपी सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने वडोदरा और वाराणसी दोनों लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था। दोनों ही सीटों से उन्हें भारी मतों से सफलता मिली थी। हालांकि, बाद में उन्होंने वडोदरा सीट छोड़ दी थी। पांच साल बाद 2019 में भारतीय जनता पार्टी (ठश्रच्) ने मोदी की अगुआई में फिर चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की।

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