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ताली बजाकर चीतों का भारत की जमीन पर स्वागत कर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आजादी के अमृत काल में अब देश नई ऊर्जा के साथ बेजुबानों का करेगा पुनर्वास

ग्वालियर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने 72वें जन्मदिन पर देशवाायों को बड़ा तोहफा दिया। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को बाड़े से बाहर कर ताली बजाकर बेजुबान शिकारी की भारत की धरती पर स्वागत किया। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि, हमने उस समय को भी देखा, जब प्रकृति के दोहन को शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक मान लिया गया था। 1947 में जब देश में केवल तीन चीते बचे थे, तो उनका भी शिकार कर लिया गया। ये दुर्भाग्य रहा कि 1952 में हमने चीतों को विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक सार्थक प्रयास नहीं किए। आज आजादी के अमृत काल में अब देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि, एक ऐसा काम राजनैतिक दृष्टि से जिसे कोई महत्व नहीं देता, इसके पीछे हमने वर्षों ऊर्जा लगाई। चीता एक्शन प्लान बनाया। हमारे वैज्ञानिकों ने नामीबिया के एक्सपर्ट के साथ काम किया। पूरे देश में वैज्ञानिक सर्वे के बाद नेशनल कूनो पार्क को शुभ शुरुआत के लिए चुना गया। उन्होंने चीता मित्रों से कहा, कूनो में चीता जब फिर से दौड़ेगा, तो यहां बायोडायवर्सिटी बढ़ेगी। यहां विकास की संभावनाएं जन्म लेंगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि अभी धैर्य रखें, चीतों को देखने नहीं आएं। ये चीते मेहमान बनकर आए हैं। इस क्षेत्र से अनजान हैं। कूनो को ये अपना घर बना पाएं, इसके लिए इनको सहयोग देना है।

पीएम मोदी ने कहा कि इन चीतों का जरिए हमारे जंगल का एक बड़ा शून्य भर रहा है। हमारे यहां बच्चों को चीता के बारे में ज्यादा कुछ पता ही नहीं है। भारत में अब बच्चे चीता को अपने ही देश में देख पायेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आज हम पूरे दुनिया को संदेश दे रहे हैं कि हम पर्यावरण के साथ विकास भी कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हम पांचवी अर्थव्यवस्था भी बने हैं और पर्यावरण का संरक्षण भी कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि किसी जीव जंतु का अस्तित्व हमारी वजह से मिट जाए यह कितना दुखद है। हमारी युवा पीढ़ी को पता ही नहीं है कि चीता हमारे यहां कई साल पहले विलुप्त हो चुके हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि चीतों के साथ भारत की प्रकृति प्रेरणा तेजी से जागृत होगी। मुझे विश्वास है कि यह चीते न केवल प्रकृति के प्रति जिम्मेदारियों का बोध कराएंगे बल्कि हमारी मानवीय मूल्यों से भी अवगत कराएंगे। साथ ही कहा कि मुझे विश्वास है कि ये चीते हमें अपने मानवीय मूल्य से भी अवगत कराएंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इस अमृतकाल में हमने अपनी विरासत पर गर्व और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति के पंच प्राणों को दोहराया है। पीएम मोदी ने कहा कि, आगे भी चीते लाए जाएंगे। इसके अलावा भारत में वन्यजीवों की रक्षा के लिए देश व प्रदेश सरकारें अपनी तरफ से कदम उठा रही हैं। आने वाले दिनों में प्रकृति के ये अनमोल धरोहरों कस कुबना मध्य प्रदेश में बढ़ेगा।

बता दें, मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पीएम मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीते को छोड़ दिया है। पीएम मोदी ने बाड़े के दरवाजे खोल कर इन चीतों को जंगल में छोड़ा है। पीएम मोदी के कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मित्रा ने उनका जोरदार स्वागत किया। कूनो में प्रधानमंत्री के लिए 10 फीट ऊंचा प्लेटफॉर्मनुमा मंच बनाया गया था। इसी मंच के नीचे पिंजरे में चीते थे। पीएम ने लीवर के जरिए बॉक्स को खोला। चीते बाहर आते ही अनजान जंगल और अपने नए घर में सकपकाए। सहमते कदमों के साथ इधर-उधर नजरें घुमाईं और चहलकदमी करने लगे। लंबे सफर की थकान साफ दिख रही थी। चीतों के बाहर आते ही पीएम मोदी ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। मोदी ने कुछ फोटो भी क्लिक किए।

पीएम मोदी 500 मीटर चलकर मोदी मंच पर पहुंचे थे। उनके साथ राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी थे। उन्होंने चीता मित्र दल के सदस्यों से भी बात की। बता दें, शनिवार सुबह 7.55 बजे नामीबिया से स्पेशल चार्टर्ड कारगो फ्लाइट 8 चीतों को भारत लेकर आई। 24 लोगों की टीम के साथ चीते ग्वालियर एयरबेस पर उतरे। यहां उनका रुटीन चेकअप हुआ। चीतों के साथ नामीबिया के वेटरनरी डॉक्टर एना बस्टो भी आए हैं। नामीबिया से चीतों को खास तरह के पिंजरों में लाया गया। लकड़ी के बने इन पिंजरों में हवा के लिए कई गोलाकार छेद किए गए हैं। ग्वालियर एयरबेस से चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत में चीतों का पुनर्व्यवस्थापन (री-अरेंजमेंट) तब माना जाएगा, जब यहां चीतों की संख्या 500 हो जाएगी। इस टारगेट को पूरा करने के लिए साउथ अफ्रीका और नामीबिया से हर साल 8 से 12 चीते भारत भेजे जाएंगे। इसके अलावा भारत में चीतों की वंश वृद्धि भी इसमें शामिल होगी। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के आधार पर चीतों के रहन-सहन समेत अन्य मानकों का पूरा खाका बन गया है। चीतों का नामकरण उनके स्वभाव का अध्ययन करने के बाद किया जाएगा। हर एक वन्य प्राणी का अपना स्वभाव होता है। कोई इंसानों को पसंद करता है, तो कई आक्रामक होता है। पार्क के क्थ्व् प्रकाश कुमार वर्मा का कहना है कि चीतों के लिए उनके केयर टेकर भी नियुक्त किए जाएंगे। सभी केयरटेकर के अनुभव को रिकॉर्ड में लिया जाएगा। इसके बाद नामकरण किया जाएगा। इसमें तीन से पांच महीने तक का वक्त लग सकता है।

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