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डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के राइट हैंड पर इस IPS ने ‘ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत किया ‘प्रहार’ गोरखपुर से गिरफ्तारी के बाद बिहार के ‘बाहुबली’ को फतेहगढ़ जेल किया गया शिफ्ट

गोरखपुर। बिहार के बाहुबली व पूर्व विधायक राजन तिवारी को गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया थ। उसे पहले दिन मिलेनियम बैरक में रखा गया। इसके बाद शासन के आदेश पर अपराधी को फेतहगढ़ की सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के राइट हैंड रहे राजन तिवारी को 20 साल से गैर जमानती वारंट लेकर पुलिस खोज रही थी। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राजन तिवारी के उन सभी केसों की पैरवी शुरू कर दी है जिनमें ट्रायल चल रहा है। वहीं उन मामलों की भी पड़ताल चल रही है जिसमें दबाव या डर से बरी होने की गुंजाइश दिख रही है। इस कार्रवाई का नाम ऑपरेशन शिकंजा दिया गया है।

श्रीप्रकाश के एनकाउंटर के बाद बिहार में बनाया ठिकाना
राजन तिवारी मूूूूूलरूप से यूपी के गोरखपुर गोरखपुर के सोहगौरा का रहने वाला है। राजन ने पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे डॉन बनने का शौक चढ़ा। दस वक्त पूर्वांचल में श्रीप्रकाश शुक्ला का बोलबाला थ। राजन ने श्रीप्रकाश शुक्ला से दोस्ती की और फिर थोड़े ही समय में राजन तिवारी का नाम उन मामलों में भी जुड़ने लगा, जिनमें श्रीप्रकाश मुख्य आरोपी हुआ करता था। धीरे-धीरे राजन तिवारी अपने कद के चलते श्रीप्रकाश शुक्ला का राइट हैंड बन गया, यहीं से उसके नाम के आगे बाहुबली जुड़ गया। इसके बाद राजन तिवारी ने कई वारदातों को अंजाम दिया। श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर के बाद राजन बिहार चला गया। बिहार से वह विधायक चुना गया।

तीन अपराधी मारे गए पर राजन नहीं लगा पुलिस के हत्थे
15 मई 1998 में कैंट थाना पुलिस ने दाउदपुर निवासी दुर्दांत श्रीप्रकाश शुक्ल, मोहद्दीपुर निवासी अनुज सिंह, संतकबीरनगर के महुली थानाक्षेत्र के जोरवा निवासी आनंद पांडेय, गगहा के सोहगौरा निवासी पूर्व विधायक राजन तिवारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी। श्रीप्रकाश शुक्ल, आनंद व अनुज की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। इस मामले में आरोपित राजन तिवारी ही जिंदा है जो दो दशक से बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के गोविंदगंज में रहता था। कुछ दिनों पहले चुपके से उसने गोरखपुर में वापसी करते हुए प्रापर्टी डीलिंग शुरू की। राजन तिवारी को अपनी गिरफ्तारी की भनक लग गई और वह नेपाल भागने की प्लानिंग कर रहा था। इसी दौरान गुरूवार को गोरखपुर पुलिस ने राजन को दबोच लिया।

इस आईपीएस के चलते पकड़ा गया बाहुबली
राजन तिवारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने का श्रेय एडीजी अखिल कुमार द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन शिंकजा’ को ही जाता है। इसी मामले में एडीजी ने पहले राजन तिवारी का नाम को यूपी की माफिया सूची में शामिल कराया और मुकदमों की पड़ताल शुरू कराई। पड़ताल में राजन पर कई केस मिले लेकिन ज्यादातर में कोर्ट से बरी होने की भी जानकारी सामने आई। इसी पड़ताल के क्रम में गैंगस्टर का मुकदमा और उसमें कोर्ट से जारी गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) हाथ लगा। यहीं से राजन तिवारी के खिलाफ शिंकजा कसना शुरू हुआ।

तीन मामले राजन तिवारी पर चल रहे
राजन तिवारी के खिलाफ ‘आपरेशन शिंकजा’ के तहत फिलहाल पुलिस ने तीन मामलों का चयन किया है। हालांकि इसमें दो मामले गोरखपुर कोर्ट से जुड़े हैं जबकि एक लखनऊ से। गोरखपुर में जिन दो केस का ट्रायल चल रहा है। इनमें एक गैंगस्टर का वही केस है जिसमें राजन तिवारी के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी था जबकि दूसरा केस ठेकेदार विवेक सिंह हत्याकांड का है। ठेकेदार की हत्या 1996 में की गई थी। इसके अलावा गोरखुपर में वीरेन्द्र प्रताप शाही पर हमला हुआ था जिसमें उनका गनर मारा गया था। इन दोनों हत्या में श्रीप्रकाश गैंग का नाम सामने आया था जिसमें राजन तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया था।

ताकि की राजन तिवारी को सजा दिलाए पुलिस
वीरेन्द्र प्रताप शाही के गनर की हत्या में राजन तिवारी को कोर्ट ने बरी कर दिया है जबकि विवेक सिंह हत्याकांड में मुकदमा ट्रायल पर चल रहा है। इसमें आधे लोगों की गवाही हो चुकी है। पुलिस की कोशिश है कि गैंगेस्टर के मामले के अलावा विवेक सिंह हत्याकांड में समय से गवाही कराकर राजन तिवारी को सजा दिलाई जाए। इसके अलावा हत्या का एक केस कैसरबाग लखनऊ में दर्ज है। वहां की पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। फिलहान राजन फतेहगढ़ जेल में है और कोर्ट में आरोपी की पेशी ऑनलाइन करवाई जाएगी।

 

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