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फिल्म की तरह है बलई काका के बेटे राजू श्रीवास्तव की असल जिंदकी की लव स्टोरी, संघर्ष-लंबे इंतजार के बाद गजोधर भैया को मिली इटावा की रहने वाली प्रियसी

कानपुर। देश के जाने-माने कमेडियन राजू श्रीवास्तव का बुधवार को दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया। करीब 42 दिन पहले जिम करने वक्त उन्हें हार्टअटैक पड़ा था। परिवारवाले एम्स में लेकर आए। नामी डॉक्टर्स ने इलाज किया, लेकिन सबको हंसाने राजू भैया, 140 करोड़ से ज्यादा लोगों रूलाकर इस दुनिया को छोड़कर दूरी दुनिया में चले गए। राजू श्रीवास्तव ने अपनी असल जिंदगी में भी कईं उतार चढ़ाव देखे, इसके बावजूद उनकी पत्नी शिखा ने उनका कभी साथ नहीं छोड़ा। राजू श्रीवास्तव ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्व्यू में अपनी लव स्टोरी को बताया था। उन्होंने कहा कि, अपनी प्रियसी को पाने के लिए उन्होंने 12 वर्ष तक इंतजार किया। संघर्ष के बाद शिखा उन्हें मिलीं।

राजू श्रीवास्तव के पिता थे कवि
राजू श्रीवास्तव का जन्म कानपुर में 25 दिसम्बर 1963 को हुआ था। उनके पिता का नाम बलई काका था। काका एक कवि थे। राजू श्रीवास्तव का असल नाम सत्य प्रकाश श्रीवास्तव था। राजू श्रीवास्तव का बचपन गरीबी में गुजरा। घर चलाने के लिए उन्होंने ऑटो चलाई। आरकेस्ट्रा में काम कर जो मिलते, उससे रसोई में भोजन पकता। पक्के इरादे और सपने देखने वाले राजू श्रीवास्तव कुछ बनने के लिए मुम्बई की तरफ कदम बढ़ाए। कई साल नौकरी की। फिल्मों में काम मिल जाए, इसके लिए स्टूडियों के बाहर राज गुजारी। आखिरकार उन्होंने अपने को छोटे पर्दे पर केंद्रित किया और कुछ साल के बाद कानपुर का राजू श्रीवास्तव देश व विदेश का गजोधर भैया बन गए।

पहली नजर में शिखा को दे बैठे थे दिल
राजू श्रीवास्तव ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि, कैसे 12 साल के इंतजार के बाद उन्हें उनका प्यार मिला था। राजू श्रीवास्तव ने कहा था कि पहली ही नजर में उनको शिखा से प्यार हो गया था। राजू और शिखा की पहली नजरे उनके भाई की शादी में मिली थी। वह पहली ही नजर में ही अपना दिल दे बैठे थे, लेकिन शिखा का मिलना उनके लिए कोई मामूली बात नहीं थी इसके लिए उन्हे बहुत ही ज्यादा संघर्ष करना पड़ा। नजर मिलने के बाद राजू को रात-दिन शिखा का ही ख्याल आने लगा। जिसके बाद वो जल्दी से जल्दी शिखा को अपना बनाना चाहते थे।

इटावा की रहने वाली थीं शिखा
राजू ने इंटरव्यू में ये भी खुलासा किया था कि वह शिखा की छानबीन करने लगे थे तब उन्हें जानकारी हुई थी कि शिखा का घर इटावा में है और शिखा उनके भाभी के चाचा की बेटी हैं। ये मालूम होते ही धीरे-धीरे उन्होंने शिखा के बारे में सारी बातें पता करना शुरू कर दिया। राजू ने किसी तरह अपने भाई को इस बारे में जानकारी दी। राजू शिखा से शादी करने से पहले कुछ अच्छा करना चाहते थे ताकि जब शिखा के घर वाले राजू के बारे में पता करें तब तक राजू कुछ नाम हासिल कर लें। इसके बाद साल 1982 में वह अपनी किस्मत आजमाने सपनों के शहर मुंबई पहुंचे। जहां उन्होंने कड़ी मेहनत कर अपना नाम कमाया।

अक्सर शिखा को भेजते थे लव लेटर
राजू श्रीवास्तव ने बताया था कि, उस दौरान वह राजू शिखा को लव लेटर भेजा करते थे। तब उनको ये भी चिंता सताने लगी कि कहीं शिखा के घरवाले उनकी कहीं और शादी न करा दें। राजू अपने परिवार वालों को कह कर शिखा के घर रिश्ता भिजवाया। रिश्ता भिजवाने के बाद शिखा के परिवार वाले राजू का घर देखने मुंबई गए इसके बाद सारी तसल्ली होने के बाद 17 मई 1993 को दोनों शादी के बंधन में बंधे। राजू श्रीवास्तव ने बताया था कि, जब उनकी जिंदकी में शिखा की एंट्री हुई, उसी के बाद किस्मत ने रंग दिखाया। राजू ने बताया था कि, उस वक्त फिल्मों के अलावा टीवी शो की तरफ से ऑफर आए। जो फिल्म निर्माता-निर्देशक उन्हें अपने स्टूडियों के अंदर नहीं आने देते, वही फोनकर काम देने लगे थे।

 

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