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Raksha Bandhan 2022 : इस वर्ष रात में भाईयों की कलाई पर सजेगी राखी, जानें इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी

कानपुर। कोरोना महामारी के चलते पिछले दो वर्षों में कई त्योहर फीके रहे, लेकिन 2022 में रक्षा बंधन को लेकर बाजार गुलजार हैं। बहनें अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा का धागा बांघने के लिए खरीदारी कर रही हैं तो वहीं भाई भी बहन के लिए गिफ्ट खरीद रहे हैं। इसके अलावा रक्षा बंधन के शुभ मुहुर्त को लेकर पंडितों के पास जाकर जानकारी ले रहे हैं। ऐसे में अस्तित्व न्यूज आपको राखी बांधने का समय समेत अन्य जानकारियों से रूबरू कराने जा रहा है। प्रोफेसर बलराम तिवारी बताते हैं कि, यह पर्व सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार तिथियों के फेर से सावन दो दिन मिल रहा है, लेकिन शास्त्रीय मान-विधान के तहत रक्षा बंधन 11 अगस्त को मनाया जाएगा।

रात 8.26 बजे से रात 11.43 बजे तक मनाना ठीक रहेगा
प्रोफेसर बलराम तिवारी बताते हैं, सावन पूर्णिमा 11 अगस्त की सुबह 9.35 बजे लग रही है जो 12 अगस्त की सुबह 7.18 बजे तक रहेगी। हालांकि 11 की सुबह 9.35 बजे पूर्णिमा लगने के साथ ही भद्रा भी लग जा रहा है जो रात 8.26 बजे तक रहेगा। पंडित बलराम तिवारी के मुताबिक, इस स्थिति को देखते हुए रक्षा बंधन रात 8.26 बजे से रात 11.43 बजे तक मनाना ठीक रहेगा। ऐसे में बहनों को अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा का धागा इसी समय बांधना होग।

अन्य शुभ कार्य वर्जित
प्रोफेसर तिवारी बताते हैं कि, पूर्णिमा पर आधे काल में भद्रा रहता ही है जो इस बार रात तक रहेगा। भद्रा में राखी बांधने के साथ ही अन्य शुभ कार्य वर्जित हैं। हालांकि 12 अगस्त की सुबह पूर्णिमा जरूर मिल रही है लेकिन यह प्रतिपदा से युक्त है। अतः 11 को ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा। रही बात रात में समय मिलने की तो रक्षा बंधन उत्सव में बेला का निषेध नहीं है। इसमें समय-काल का निषेध नहीं। भद्रा मुक्त पूर्णिमा में रक्षा बंधन मनाया जा सकता है।

12 तारीख रहेगी शुभ
रक्षा बंधन का त्यौहार 12 तारीख शुक्रवार को ही मनाना श्रेष्ठ रहेगा। कोई रक्षाबंधन पर सुण जिमाने का कार्य 11 तारीख रात्रि काल को करता है तो कर सकता है, लेकिन रात 8ः53 के बाद इस कार्यक्रम को भी करना लाभदायक नहीं होगा। उदया तिथि पूर्णिमा 12 अगस्त शुक्रवार को प्रातः 7ः15 बजे तक ही है 12 अगस्त शुक्रवार को 7ः30 बजे तक रक्षाबंधन और सुन जिमाने का अपने घर का सगुण करके उदया तिथि के हिसाब से दिन भर रक्षाबंधन का कार्य चलता रहेगा। शास्त्रों में यही कहा गया है कि जो उदया तिथि है उसी का मान दिन भर रहेगा। अतः मांगलिक कार्य पूरे दिन मानाया जाएगा।

इस वजह से भद्रकाल पर नहीं बांधे राखी
बलराम तिवारी बताते हैं कि, रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। बताते हैं, लंकापति रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी और एक वर्ष के अंदर उसका विनाश हो गया था। भद्रा शनिदेव की बहन थी। भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा।

इंद्राणियों ने देवराज इंद्र का रक्षाबंधन किया
बलराम तिवारी ने रक्षा बंधन पर एक कथा का जिक्र करते हुए बताया कि वैदिक काल में एक बार देव-असुरों में भयंकर युद्ध हुआ। लगातार 12 साल तक देवता पराजित होते चले गए। इसे देखते हुए देव मंत्री गुरु बृहस्पति की अनुमति से युद्ध रोकने के साथ इंद्राणियों ने देवराज इंद्र का रक्षाबंधन किया। इसके प्रभाव से इंद्र असुरों का संहार करने में सफल हुए। देवताओं को विजय प्राप्त हुई। विजय की यह तिथि सावन की पूर्णिमा थी। उसी समय से ही सनातन धर्मावलंबियों में रक्षाबंधन पर्व उत्सव की तरह मनाने के परंपरा चली आ रही है।

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