ब्रेकिंग
Kanpur: डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने परियोजनाओं का किया लोकार्पण, सरकार की गिनाई उपलब्धियांBadaun: एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल, मांगों को लेकर प्रदर्शनBadaun: पुलिस के हाथ लगी बड़ी सफलता, तीन शातिर लुटेरे गिरफ्तारSiddharthnagar: आनंदी बेन पटेल ने आंगनवाडी केंद्र का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देशकानपुर पहुंचे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, विपक्षियों पर कसा तंजहमीरपुर पहुचीं उमा भारती, स्वामी ब्रह्मानंद जी के जन्मोत्सव में हुईं शामिलAgra: दारू के लिए पैसे ना देने पर दोस्तों ने की दोस्त की पिटाईआगरा पुलिस ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों का किया निरीक्षणAgra: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के गड्ढे बने मुसीबत, हादसे को दावत दे रहे हैं दावतदिशा पाटनी ग्लैमरस तस्वीरों में दिखी बोल्ड, सोशल मीडिया पर छाया हॉट लुक

डीजल की बढ़ती कीमतों ने किसानों को वर्षों पीछे धकेला, बैलों के जरिये खेती को विवश हुए किसान

निशानाथ पांडेय/उन्नाव

खबर उन्नाव की हसनगंज तहसील क्षेत्र से है। जहां पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने न सिर्फ समान्य जन जीवन पर प्रभाव डाला है बल्कि उन्हें अपने तौर तरीके भी बदलने पर विवश कर दिया है। ऐसे ही मिले-जुले हालातों की एक तस्वीर क्षेत्र में इन दिनों देखने को मिल रही है। जिससे सुखद और दुःखद दोनों पहलू उजागर हो रहे हैं। बात दरअसल यह है डीजल की बढ़ती कीमतों ने किसानों को बैलों के जरिये खेती करने को विवश कर दिया है।
हसनगंज तहसील क्षेत्र के किसानों ने बढ़ते डीजल और पेट्रोल के दामों को देखकर फिर बैल से खेती करना शुरू किया। किसानों ने बताया कि बैल से खेती करना आसान है जहां ट्रैक्टर की एक घंटे की जुताई की लागत 400 रुपए आती थी, वह अब डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते अब एक घंटे में 600 रुपए पहुंच गई है। किसानों के पास खेती करने के पैसे नहीं तो वह ट्रैक्टर को पैसे कहां से दे। आपको बता दें कि एक लीटर डीजल 93 रुपया 98 पैसे है और पेट्रोल 102 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। नतीजे में किसानों ने महंगाई के कारण ट्रैक्टर से खेती करवाना कम करते हुए बैल से खेती करना धीरे-धीरे शुरू कर दिया है। क्षेत्र के किसान जयसिंह ने बताया बैल से खेती करने से खेत में पैदावार अच्छी होती है और फसल भी अच्छी उगती है।
डीजल की बढ़ती कीमतों के सुखद और दुःखद दोनों पहलू सामने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी फसलों के सबसे बड़े दुश्मन नर गोवंश है क्योंकि वे समय की मार के साथ निष्प्रयोज्य हो चुकें हैं। ऐसे में पशु पालक और मवेशी के दूध देने तक ही उन्हें अपने पास रखते है और मवेशियों को दूध बंद होते ही आवारा छोड़ दिया जाता है। यदि खेती में इनका वापस प्रयोग शुरू हो जाता है तो, अन्ना मवेशियों की समस्या पर काफी हद तक रोक लग सकती है। अब बात करते हैं इसके दूसरे पहलू की, जहां अच्छी फसल के लिए समय रहते खेतों की जुताई और बुआई करानी होती है। क्योंकि बैलों के जरिये खेती की प्रक्रिया काफी धीमी और समय खपाऊ है। आज जब विश्व के तमाम देश खेती में तकनीकी प्रयोग पर जोर दे रहे हैं, ऐसे में बैलों से खेती देश को आर्थिक रूप से पीछे धकेलने का काम करेगी क्योंकि भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि ही है।

Related posts

Leave a Comment

अपना शहर चुने

Top cities