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Hapur: अंधविश्वास के चक्कर में बलि चढ़ने से बच गई साक्षी, डॉ पराग शर्मा ने बचाई जान

ब्यौरो रिपोर्ट

21वीं सदी में जाते हुए हमारे देश में ये मान्यता है कि अब हम आधुनिक परिवेश में आ गए हैं लेकिन हकीकत इससे एकदम उलट है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास विज्ञान पर हावी होता दिखता है। ऐसा ही एक मामला हापुड़ जनपद के सिंभावली के रहने वाले तेजेंद्र कुमार की 15 वर्षीय पुत्री साक्षी को 24 सितंबर की सुबह में सोते वक्त एक जहरीला सांप काट ने काट लिय़ा था। जिसके बाद उसके परिजन अंधविश्वास में आकर अपनी बेटी को किसी अस्पताल ना ले जाकर झाड़-फूंक बाबाओं के पास ले जाते है और जब उसकी बेटी की हालत ज्यादा खराब होने लगी तो एक ओझा ने उससे कहा कि अब यह नहीं बच पाएगी। इसे तुम ले जाओ तो किसी ने उसको डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी। तब तेजेंद्र अपनी बेटी साक्षी को लेकर हापुड़ के आरोग्य हॉस्पिटल पहुंचा और डॉ पराग शर्मा को उसने दिखलाया।

डॉ पराग ने साक्षी को जब देखा तो उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी और उसकी नब्ज भी बहुत धीमी चल रही थी। लेकिन डॉ पराग शर्मा ने उसकी जान बचाने का प्रण लिया और उसको अपने हॉस्पिटल में एडमिट कर वेंटिलेटर पर ले लिया। उसके बाद उसका इलाज चालू कर दिया गया। लेकिन तेजेंद्र के माली हालात की बात करें तो, वो बेहद गरीब आदमी है जो मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार को पाल रहा था। उसने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए जब डॉक्टर से कहा के आप हमारी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दीजिए मैं इलाज कराने में सक्षम नहीं हूं तो उस समय डॉ पराग शर्मा ने इंसानियत दिखाते हुए उसको भरोसा दिलाया के इसका संपूर्ण इलाज हम अपने खर्चे पर करेंगे। आपको एक भी पैसा देने की आवश्यकता नहीं है। जिसके बाद आज मासूम साक्षी को एक नया जीवन मिल पाया है। कहीं ना कहीं डॉ पराग शर्मा उसके इलाज का खर्चा स्वयं वहन न करते तो शायद आज साक्षी इस दुनिया में नहीं रहती तो, वहीं इस सारे मामले में साक्षी के परिजनों ने बताया कि हम केवल झाड़-फूंक और बाबाओं के चक्कर में लगे हुए थे और हम तो इस को मृत मानकर इसके क्रिया कर्म की भी तैयारी करने वाले थे। लेकिन डॉक्टर पराग शर्मा ने हमारी बेटी को नया जीवन देकर हमारे ऊपर बहुत बड़ा एहसान किया है। हम उनका बार-बार धन्यवाद करते हैं तो, वहीं जब इस सारे मामले में हमने डॉ पराग शर्मा से बात की तो, उन्होंने इस सारे मामले को मीडिया के साथ शेयर किया और कहा कि पिछले करीब 10 दिन में इस बच्ची के इलाज में दो से ढाई लाख रुपए अवश्य खर्च हुए हैं। लेकिन मुझे खुशी इस बात की है कि मैं किसी का जीवन बचा पाया और मैं सभी लोगों से यह भी गुजारिश करता हूं कि कभी भी किसी को अगर सांप काट ले तो उसे तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए ना की किसी बाबाओं के चक्कर में पड़ना चाहिए और लोगों को वेंटिलेटर के बारे में एक बड़ी धारणा है कि डॉक्टर लोग वेंटिलेटर को केवल कमाई के लिए इस्तेमाल करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है जब आदमी की धड़कन चलती रहती है। उसे सांस लेने में प्रॉब्लम होती है तो, उसको वेंटिलेटर पर रखा जाता है जिससे उसके बचने के चांस कुछ हद तक बढ़ जाते हैं तो, लोगों को इस धारणा को अपने मन में भी नहीं रखना चाहिए और थोड़ा भरोसा अपने डॉ० पर करना चाहिए इस बच्ची के पिता को भी शुरुआत में कुछ ऐसा ही लगा था और बच्ची को मृत मानकर घर ले जाने की जिद कर रहा था। तब उसको बताया गया कि आप खर्चे की चिंता न करें। इसे अस्पताल स्वंय खर्च करेगा। तब जाकर इस बच्ची की जान बच सकी और न जाने ये बच्ची भविष्य में क्या बन जाये, यही सोच कर इसका इलाज किया, जबकि मेरा ये मानना है कि किसी गरीब की मौत शिक्षा और पैसों के अभाव में ना हो।

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